विकसित भारत का सपना केवल आज की कमाई से नहीं, कल की ताकत से पूरा होगा: गौतम अदानी व्यापार 5 घंटे पहले 4
अदानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदानी ने इंफ्रास्ट्रक्चर रेटिंग के नए मॉडलों की वकालत करते हुए कहा कि भारत को अब पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर बड़े स्तर पर सोचना होगा ताकि भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

विकसित भारत के विजन पर बड़ी बात

भारत के जाने-माने उद्योगपति और अदानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदानी ने विकसित भारत की राह पर चर्चा करते हुए एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया है। मुंबई में आयोजित केयर एज रेटिंग्स के इंफ्रास्ट्रक्चर लैंडस्केप कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए, उन्होंने देश के आर्थिक और बुनियादी ढांचे को लेकर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का लक्ष्य केवल वर्तमान लाभ कमाना नहीं, बल्कि कल के लिए एक मजबूत और टिकाऊ ताकत तैयार करना होना चाहिए।

व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता

अदानी ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से आह्वान किया कि वे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के जोखिम और उनकी आर्थिक उपयोगिता को समझने के लिए एक अधिक व्यापक और आधुनिक विश्लेषणात्मक ढांचा तैयार करें। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा पारंपरिक रेटिंग मॉडल अक्सर उन बड़ी परियोजनाओं की वास्तविक क्षमता को नहीं भांप पाते हैं, जो नए बाजार बनाने और उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुंबई में केयर एज ग्रुप के वार्षिक शिखर सम्मेलन में संबोधित करते हुए उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भारत को अपने क्रेडिट मानकों को कम करने की जरूरत नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे को देखने का नजरिया बदलने की जरूरत है। उन्होंने दोहराया कि भारत को कम मानकों की नहीं, बल्कि एक विस्तृत और बड़े नजरिए की आवश्यकता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर का वर्गीकरण और मूल्यांकन

गौतम अदानी ने इंफ्रास्ट्रक्चर को तीन स्पष्ट श्रेणियों में विभाजित करने का सुझाव दिया है। उनके अनुसार, रिप्लेसमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पारंपरिक रेटिंग मॉडल पूरी तरह उपयुक्त हैं। हालांकि, जब बात ग्रोथ इंफ्रास्ट्रक्चर की आती है, तो आकलन में इकोसिस्टम से मिलने वाले व्यापक लाभ को भी शामिल करना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर की अवधारणा पर चर्चा की, जो न केवल वर्तमान मांगों को पूरा करता है, बल्कि नई औद्योगिक क्षमताओं और बाजारों का निर्माण भी करता है। मुंद्रा, विझिंजम और खावड़ा का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि ये प्लेटफॉर्म भविष्य के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलते हैं।

मुंद्रा पोर्ट का सफल उदाहरण

अदानी ने गुजरात स्थित मुंद्रा पोर्ट का उदाहरण पेश किया। उन्होंने बताया कि जिस परियोजना की शुरुआत एक साधारण बंदरगाह के रूप में हुई थी, वह समय के साथ रेल नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स सेंटर, पावर जनरेशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे विविध क्षेत्रों का केंद्र बन गई। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी परियोजनाओं को केवल अलग-अलग परिसंपत्ति या डिस्काउंटेड-कैश-फ्लो मॉडल के जरिए मापा जाएगा, तो उनकी असली उपयोगिता कभी सामने नहीं आएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भारत केवल वर्तमान मांग के आधार पर विकास करेगा, तो वह भविष्य के बड़े अवसरों से चूक जाएगा।

विझिंजम प्रोजेक्ट की रणनीतिक महत्ता

केरल के विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट का उल्लेख करते हुए अदानी ने बताया कि भारत वर्षों से विदेशी ट्रांशिपमेंट हब पर निर्भर रहा है। जबकि विझिंजम की ভৌगोलिक स्थिति वैश्विक शिपिंग मार्गों के काफी करीब है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक वित्तीय आकलन इस प्रोजेक्ट के रणनीतिक महत्व को समझने में विफल रहे। अदानी के अनुसार, इस परियोजना को पूरा करने में सबसे बड़ी चुनौती केवल निर्माण की नहीं थी, बल्कि भारत का यह विश्वास था कि वह इस स्तर के कार्य करने में सक्षम है या नहीं।

खावड़ा प्रोजेक्ट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का संबंध

गुजरात के कच्छ में स्थित खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसे केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह स्वच्छ ऊर्जा आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे ऊर्जा-गहन क्षेत्रों के लिए आधार बनेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि AI भले ही सॉफ्टवेयर के रूप में दिखता हो, लेकिन उसे चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली, कूलिंग, ट्रांसमिशन नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है।

रेटिंग फ्रेमवर्क में बदलाव की अपील

अदानी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी मांग रेटिंग में ढील देने की बिल्कुल नहीं है। वे चाहते हैं कि रेटिंग एजेंसियां अपनी स्वतंत्रता और मानकों को बरकरार रखें, लेकिन ऐसे डायनेमिक मॉडल अपनाएं जो राष्ट्रीय महत्व के बड़े प्लेटफॉर्म्स को सही ढंग से परख सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि नए क्रेडिट फ्रेमवर्क में लेवरेज और कैश फ्लो के साथ ही रणनीतिक मजबूती और भविष्य की क्षमताओं को भी स्थान मिलना चाहिए।

भविष्य का रोडमैप: 2047 की राह

अंत में, गौतम अदानी ने केयर एज रेटिंग्स से वैश्विक स्तर पर एक व्यापक क्रेडिट फ्रेमवर्क विकसित करने का नेतृत्व करने का आग्रह किया, जो न केवल भारत के लिए, बल्कि दुनिया के अन्य उभरते देशों के लिए भी एक मिसाल बन सके। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल महत्वाकांक्षा से पूरा नहीं होगा, बल्कि इसके लिए भरोसे की पूंजी और राष्ट्र की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है। अपने संबोधन को विराम देते हुए उन्होंने एक कविता के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं, जिसमें उन्होंने भारत के आत्मविश्वास और संकल्प को राष्ट्र के सम्मान का आधार बताया।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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