दोस्ती से दुश्मनी और फिर खूनखराबा: गैंगस्‍टर जितेंद्र गोगी और टिल्‍लू ताजपुरिया की खूनी दास्‍तान क्राइम 2 घंटे पहले 3
दिल्ली-एनसीआर में वर्चस्व की जंग ने 25 से अधिक लोगों की बलि ले ली है। गोगी और ताजपुरिया की पुरानी रंजिश का असर आज भी जारी है और हालिया शामली हत्‍याकांड ने इस आग को फिर हवा दे दी है।

कॉलेज की दोस्ती और खूनी रंजिश

छात्रसंघ चुनावों के दौरान शुरू हुई आपसी प्रतिस्पर्धा धीरे-धीरे वर्चस्व की जंग में बदल गई। जितेंद्र गोगी और टिल्‍लू ताजपुरिया कभी दोस्त हुआ करते थे, लेकिन यही दोस्ती बाद में दिल्ली और एनसीआर के लिए काल बन गई। इस गैंगवार के कारण अब तक 25 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

कोर्ट और जेल में मर्डर की पटकथा

साल 2021 में रोहिणी कोर्ट के अंदर वकीलों की वेशभूषा में आए हमलावरों ने गैंगस्‍टर जितेंद्र गोगी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना ने पूरे देश को दहला दिया था। इसके बाद, बदला लेने की भावना से साल 2023 में तिहाड़ जेल के भीतर टिल्लू ताजपुरिया को मौत के घाट उतार दिया गया।

शामली हत्याकांड और गोगी का नाम

हाल ही में शामली में हरियाणवी गायक अंकित बालियान की हत्या के बाद गोगी का नाम फिर से चर्चा में आ गया है। पांच साल पहले मर चुके गोगी के गैंग का नाम इस नई वारदात के साथ जुड़ने से यह साफ हो गया है कि जेल की दीवारों के पीछे और बाहर दोनों जगह खूनी खेल का सिलसिला अभी थमा नहीं है। यह पूरी कहानी एक दोस्ती के अंत और उसके बाद शुरू हुए अंतहीन अपराध के चक्र को दर्शाती है।

सान्वी राणा पाबना के क्राइम एवं राज्य रिपोर्टर हैं, जो अपराध और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें कवर करते हैं। कानून-व्यवस्था, जांच और बड़ी आपराधिक घटनाओं की वे जिम्मेदार रिपोर्टिंग करते हैं। तथ्यों की पुष्टि और संवेदनशीलता उनके काम की पहचान हैं।

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