महाराष्ट्र एमएलसी चुनाव नतीजों के बाद महायुति में घमासान, नितेश राणे और संजय निरुपम आमने-सामने भारत एक घंटा पहले 6
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में खींचतान तेज हो गई है। बीजेपी नेता नितेश राणे और शिवसेना के संजय निरुपम के बयानों ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।

विधान परिषद चुनाव नतीजों पर मची खलबली

महाराष्ट्र विधान परिषद यानी एमएलसी चुनाव के नतीजों ने महायुति गठबंधन के भीतर की कलह को खुलकर सामने ला दिया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता नितेश राणे ने चुनाव के परिणामों पर तीखी टिप्पणी करते हुए गठबंधन के भीतर के उन लोगों पर निशाना साधा है जो शायद वफादारी के दायरे में नहीं हैं। नितेश राणे ने सवाल खड़ा किया कि क्या गठबंधन के भीतर कोई मातोश्री का प्रेमी बैठा है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि महायुति के 'शकुनी मामा' को खोजने का समय आ गया है। राणे ने जोर देकर कहा कि महायुति का गठबंधन फेविकोल के जोड़ जैसा है, लेकिन सबको यह समझना होगा कि 'एक हैं तो सेफ हैं'। इस परिणाम को लेकर पार्टी स्तर पर गंभीरता से आत्मचिंतन किया जाएगा।

संजय राउत पर नितेश राणे का कटाक्ष

नितेश राणे ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि संजय राउत को अब खुद आईना देखना चाहिए। उन्होंने संजय राउत को 'उजड़े हुए गांव का पाटिल' तक करार दे दिया। राणे ने तंज कसते हुए कहा कि राउत को पहले अपने मालिक से यह पूछना चाहिए कि उनके जो तीन उम्मीदवार मैदान में थे, उनका हश्र क्या हुआ। नितेश राणे के अनुसार, गठबंधन में किसने अनुशासनहीनता की है और कौन भीतरघात कर रहा है, इसकी पहचान करने के लिए सभी नेता एक साथ बैठकर गहन मंथन करेंगे।

संजय निरुपम ने जताया कड़ा विरोध

नितेश राणे के बयानों और बीजेपी के कुछ अन्य नेताओं द्वारा शिवसेना पर लगाए जा रहे आरोपों से शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता संजय निरुपम बेहद नाराज नजर आए। उन्होंने साफ कहा कि गठबंधन के भीतर रहकर इस तरह का व्यवहार कतई स्वीकार्य नहीं है। संजय निरुपम ने बीजेपी नेताओं को नसीहत दी कि सार्वजनिक रूप से सहयोगी दल पर आरोप लगाने के बजाय आपसी समन्वय पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी नगर पंचायत और नगर परिषदों के चुनाव में 'फ्रेंडली फाइट' हुई है, लेकिन तब इस तरह की बदजुबानी नहीं की गई थी।

विश्वास बहाली की जरूरत

संजय निरुपम के अनुसार, मौजूदा बयानों से गठबंधन के साथियों के बीच आपसी भरोसे पर संकट पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी मतभेद होने पर उसे बंद कमरों में बैठकर सुलझाया जाना चाहिए, न कि मीडिया के सामने बयानबाजी करके। उन्होंने बीजेपी की उस नीति पर भी सवाल उठाए जिसमें वे अकेले दम पर चुनाव जीतने का प्रयास कर रहे हैं और सहयोगियों के प्रति अपना रवैया बदल रहे हैं। निरुपम ने जोर देकर कहा कि गठबंधन को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने के लिए आपसी विश्वास को बहाल करना बहुत जरूरी है।

कांग्रेस की जीत पर क्या बोले राणे?

चुनाव नतीजों के विश्लेषण पर नितेश राणे ने कांग्रेस की खुशी को व्यर्थ बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को यह तक नहीं पता कि उनके हाथ क्या लगा है। राणे का दावा है कि इंडिपेंडेंट कैंडिडेट कराले गुरुजी की जीत का फायदा कांग्रेस को मिला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस क्यों जश्न मना रही है, जबकि देश में उनकी स्थिति पहले से ही काफी गिर चुकी है। राणे ने अंत में दोहराया कि हमें इन नतीजों का विस्तृत विश्लेषण करने के लिए थोड़ा समय चाहिए।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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