पशुपालकों के लिए बड़ी खबर: पलामू में मवेशियों को FMD से बचाने के लिए शुरू हुआ मुफ्त टीकाकरण अभियान, 29 अगस्त तक उठाएं लाभ झारखंड 2 महीने पहले 78
पलामू जिले में खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए 1 जुलाई से 29 अगस्त तक 4 लाख दुधारू पशुओं को मुफ्त टीका लगाया जाएगा।

ग्रामीण भारत की आर्थिक व्यवस्था मुख्य रूप से खेती और पशुपालन पर निर्भर करती है। झारखंड के पलामू जिले में भी पशुपालन ग्रामीणों की आजीविका का एक बहुत बड़ा जरिया है। हालांकि, अक्सर दुधारू पशुओं में होने वाली बीमारियां किसानों की मेहनत पर पानी फेर देती हैं। ऐसी ही एक सबसे खतरनाक और संक्रामक बीमारी है खुरपका-मुंहपका, जिसे आम तौर पर FMD कहा जाता है। इस कष्टदायक बीमारी से मवेशियों को बचाने के लिए पलामू जिले में एक व्यापक टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत पशुपालक अपने जानवरों को बिल्कुल मुफ्त में टीका लगवा सकते हैं ताकि वे सुरक्षित रहें।

पलामू में बड़े पैमाने पर मुफ्त टीकाकरण अभियान की शुरुआत

पलामू जिले में मवेशियों को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। जिला पशुपालन पदाधिकारी प्रभाकर सिन्हा ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के FMD राउंड-6 अभियान के तहत जिले में एक विशेष टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। यह अभियान 1 जुलाई से शुरू हो चुका है और आगामी 29 अगस्त तक सक्रिय रहेगा। इस दो महीने लंबे अभियान के दौरान पलामू जिले के करीब 4 लाख दुधारू पशुओं को पूरी तरह से निशुल्क वैक्सीन दी जाएगी।

पशुपालन विभाग की ओर से इस बार एक विशेष व्यवस्था भी की जा रही है। टीकाकरण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले प्रत्येक पशु की पहचान के लिए उसकी टैगिंग की जाएगी। इस टैगिंग के जरिए पशु का एक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, ताकि भविष्य में उसकी सेहत और अगले टीकों की समय पर निगरानी रखी जा सके। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस बीमारी को ग्रामीण इलाकों से पूरी तरह से समाप्त करना है।

दूध उत्पादन पर पड़ता है सीधा असर, जानिए बीमारी के लक्षण

खुरपका-मुंहपका बीमारी दुधारू पशुओं के लिए अत्यंत पीड़ादायक होती है। जब कोई पशु इस बीमारी की चपेट में आता है, तो उसकी शारीरिक क्षमता तेजी से घटने लगती है। जिला पशुपालन पदाधिकारी के अनुसार, इस संक्रामक रोग की शुरुआत बहुत हल्के बुखार से होती है। लेकिन समय के साथ यह बुखार बढ़कर 105 डिग्री तक पहुंच सकता है।

इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

  • संक्रमित मवेशी के मुंह से लगातार अत्यधिक मात्रा में लार टपकने लगती है।
  • पशु पूरी तरह से खाना-पीना बंद कर देता है और जुगाली करना भी छोड़ देता है।
  • बीमारी के बढ़ने पर पशु की जीभ और मुंह के भीतर छोटे-छोटे छाले और घाव हो जाते हैं।
  • इसके बाद मवेशी के खुरों में गंभीर सूजन आ जाती है और उनमें सड़न होने लगती है, जिससे पशु का चलना-फिरना भी दूभर हो जाता है।

इस बीमारी का सबसे गंभीर प्रभाव पशु के दूध उत्पादन पर पड़ता है, जो अचानक बेहद कम हो जाता है। इसके अतिरिक्त, यदि कोई गर्भवती गाय या भैंस इस बीमारी की चपेट में आ जाए, तो उसमें गर्भपात का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। इससे पशुपालकों को न केवल वर्तमान में बल्कि भविष्य में भी भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।

बीमारी के शुरुआती घरेलू उपचार और प्राथमिक चिकित्सा

पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यदि किसी पशु में इस बीमारी के शुरुआती लक्षण नजर आते हैं, तो पशुपालक कुछ बेहद आसान घरेलू उपायों की मदद से उसे अस्थायी राहत पहुंचा सकते हैं। इन उपायों को अपनाकर मवेशियों की तकलीफ को कम किया जा सकता है:

  • एक मग साफ पानी लेकर उसमें बहुत थोड़ी मात्रा में पोटेशियम परमैंगनेट मिला लें, जिससे वह हल्का गुलाबी रंग का हो जाए। इस घोल से पशु के मुंह और जीभ को दिन में दो से तीन बार अच्छी तरह साफ करें।
  • सफाई करने के बाद पशु की जीभ पर ग्लिसरीन लगाने से छालों में काफी ठंडक मिलती है और दर्द कम होता है।
  • मवेशी के पैरों और खुरों में हुए घावों को साफ करने के लिए पोटेशियम परमैंगनेट या फिर फिटकरी मिले गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।
  • पैरों की अच्छी तरह सफाई करने के बाद प्रभावित हिस्सों पर हिमेक्स क्रीम लगाएं, जो घाव को सुखाने और कीटाणुओं को मारने में मदद करती है।

हालांकि, विभाग ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि ये घरेलू नुस्खे केवल पशु को प्राथमिक राहत देने के लिए हैं। इन्हें अंतिम इलाज नहीं माना जाना चाहिए। बीमारी के लक्षण दिखते ही तुरंत किसी नजदीकी और योग्य सरकारी पशु चिकित्सक से संपर्क करना बेहद जरूरी है।

पशुपालकों से अधिकारियों की विशेष अपील

पलामू जिले के पशुपालन विभाग ने क्षेत्र के सभी किसानों और मवेशी पालकों से इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाने की पुरजोर अपील की है। विभाग का कहना है कि लापरवाही के कारण पशुओं को होने वाली तकलीफ और आर्थिक नुकसान से बचने का एकमात्र उपाय समय पर टीकाकरण ही है। किसानों को अपनी गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशुओं को इस अभियान के तहत टीका जरूर दिलवाना चाहिए। यह मुफ्त वैक्सीन न केवल पशुओं के जीवन की रक्षा करेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, दूध उत्पादन के स्तर और किसानों की मेहनत की कमाई को भी सुरक्षित रखेगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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