स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संविधान का मूल ढांचा है, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को दिए कड़े निर्देश राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 7
आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान नामांकन में बाधाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग को उम्मीदवारों को सुरक्षा देने और प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

चुनाव की निष्पक्षता पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 21 अक्टूबर 2026 को चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता और उसके महत्व पर जोर देते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव भारतीय संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न अंग हैं। शीर्ष अदालत ने इस बात को दोहराया कि चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल करना चुनावी प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है। कोर्ट ने कहा कि जब किसी प्रमुख विपक्षी दल द्वारा नामांकन प्रक्रिया में बाधा डाले जाने के गंभीर आरोप लगाए जाते हैं और इस संबंध में साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जाते हैं, तो संवैधानिक अदालतें मूकदर्शक बनी नहीं रह सकतीं।

चुनाव आयोग को जांच के निर्देश

अदालत ने आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग को यह निर्देश दिया है कि वह शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी यानी वाईएसआरसीपी के उम्मीदवारों को नामांकन भरने से रोकने के आरोपों की बारीकी से जांच करे। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने आयोग को गुरुवार तक यह तय करने का आदेश दिया है कि जिन नगरपालिकाओं में शिकायतें मिली हैं, वहां नामांकन की समयसीमा बढ़ाई जानी चाहिए या नहीं। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नामांकन की अवधि बढ़ाई जाती है, तो उम्मीदवारों को कम से कम 48 घंटे का अतिरिक्त समय मिलना चाहिए। इसके लिए चुनाव अधिसूचना में भी जरूरी बदलाव करने होंगे। साथ ही, अदालत ने चुनाव परिणामों और प्रक्रिया को लेकर निर्देश दिया है कि आयोग के अंतिम फैसले तक चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की अंतिम सूची 25 अक्टूबर तक जारी न की जाए।

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस महानिदेशक की जिम्मेदारी

नामांकन केंद्रों पर सुरक्षा के दावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि नामांकन केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इसमें पुलिस बलों की तैनाती के साथ-साथ सीसीटीवी कैमरों का प्रभावी इस्तेमाल शामिल है। पुलिस महानिदेशक को इस आदेश के पालन के संबंध में अदालत में रिपोर्ट भी पेश करनी होगी। इसके अलावा, संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे वाईएसआरसीपी के उम्मीदवारों को पूरी सुरक्षा प्रदान करें। यदि आवश्यक हो, तो नामांकन पत्र स्वीकार करने के लिए जिला मुख्यालयों में कलेक्टरों के माध्यम से व्यवस्था करने को भी कहा गया है।

वाईएसआरसीपी के आरोप और याचिका का आधार

यह पूरा मामला वाईएसआरसीपी द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका पर आधारित है। पार्टी ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें नामांकन की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया गया था। याचिका में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि 16 अक्टूबर को नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही कई क्षेत्रों में पार्टी के उम्मीदवारों को अपना पर्चा भरने से जबरन रोका गया।

  • पुंगनूर, रायचोटी, कडपा और तिरुपति जैसे इलाकों में उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने में बाधाओं का सामना करना पड़ा।
  • कडपा में एक उम्मीदवार के नामांकन पत्र छीनकर फाड़ने की घटना का उल्लेख किया गया।
  • तिरुपति में उम्मीदवारों को निर्वाचन अधिकारियों के कक्ष में प्रवेश करने से रोकने के आरोप लगाए गए।
  • पार्टी ने दावा किया कि उनके कार्यकर्ताओं और सांसद पी.वी. मिधुन रेड्डी पर नामांकन के दौरान हमले किए गए।

लोकतंत्र के लिए विश्वास जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि चुनावी प्रक्रिया में आम जनता और प्रत्याशियों का विश्वास कायम रखना संवैधानिक लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। अदालत ने निर्वाचन आयोग से कहा है कि वह सभी शिकायतों का दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष रूप से आकलन करे। कोर्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र उम्मीदवारों को समान अवसर मिले और चुनाव प्रक्रिया में कोई भी बाधा न आए। इससे पहले वाईएसआरसीपी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और सुरक्षा के साथ वैकल्पिक नामांकन केंद्रों की मांग की थी, लेकिन तब उन्हें पर्याप्त राहत नहीं मिल पाई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप से चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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