राष्ट्रीय राजनीति
एक दिन पहले
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राहत भरी खबर
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के चलते समुद्री रास्ते पर मंडरा रहे संकट के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। यूरिया, डीएपी और सल्फर से लदे 4 कार्गो जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं। ये जहाज अब भारत के विभिन्न बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे देश में खाद की कमी को लेकर जताई जा रही चिंता काफी हद तक दूर हो गई है।
कहां पहुंचेंगे जहाज
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ये जहाज देश के चार प्रमुख बंदरगाहों पर लंगर डालेंगे:
- आंध्र प्रदेश का कृष्णापट्टनम बंदरगाह
- आंध्र प्रदेश का काकीनाडा बंदरगाह
- ओडिशा का पारादीप बंदरगाह
- गुजरात का मुंद्रा बंदरगाह
उर्वरक आपूर्ति की स्थिति
पिछले सप्ताह यह जानकारी सामने आई थी कि भारत के लिए उर्वरक ले जा रहे लगभग 16 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फंस गए थे, जिनमें करीब 7 लाख टन उर्वरक लदा हुआ था। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण इनकी आवाजाही पर खतरा पैदा हो गया था। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि संभावित संकट को देखते हुए पहले से ही व्यापक इंतजाम कर लिए गए थे। खरीफ सीजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत अब तक 50 लाख टन यानी 5 मिलियन टन उर्वरक का आयात कर चुका है और घरेलू स्तर पर भी उत्पादन बढ़ाया गया है।
देश में मौजूद पर्याप्त स्टॉक
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस समय देश के पास कुल 1.96 करोड़ मीट्रिक टन यानी 19.60 मिलियन मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडार उपलब्ध है। सरकार का दावा है कि यह स्टॉक मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पूरी तरह सक्षम है और किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। भारत अपनी उर्वरक जरूरतों और यूरिया उत्पादन में काम आने वाली एलएनजी के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया से होने वाले आयात पर निर्भर है, जिसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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