ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को बेनकाब करने वाले विक्रम मिस्री को मिला बड़ा ईनाम, विदेश सचिव के तौर पर एक साल का सेवा विस्तार राष्ट्रीय राजनीति 2 महीने पहले 66
पाकिस्तान के कुटिल झूठ की धज्जियां उड़ाने वाले विदेश सचिव विक्रम मिस्री के कार्यकाल में केंद्र सरकार ने एक साल की वृद्धि की है। यह फैसला वैश्विक स्तर पर भारत की कूटनीतिक पकड़ और पड़ोसियों के साथ जारी तनाव के बीच निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा को धूल चटाने का ईनाम

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के झूठ को वैश्विक मंच पर बेनकाब करने वाले विदेश सचिव विक्रम मिस्री को भारत सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उनका मौजूदा कार्यकाल 14 जुलाई 2026 को समाप्त होने वाला था, लेकिन सरकार ने उनके अनुभव और कूटनीतिक कुशलता पर भरोसा जताते हुए उन्हें एक और साल का कार्यकाल देने का निर्णय लिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत न केवल अपने पड़ोसियों की चुनौतियों से जूझ रहा है, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी अपनी धाक जमाए हुए है। विदेश नीति में स्थिरता और निरंतरता बनाए रखने के लिए सरकार का यह कदम रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कुटिल पड़ोसी की चालों का जवाब

जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ एक बड़ा चक्रव्यूह रचने की कोशिश की थी, तब पर्दे के पीछे से विक्रम मिस्री की टीम ने ऐसी कूटनीतिक बिसात बिछाई कि दुश्मन का पूरा प्रोपेगैंडा धराशायी हो गया। ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के सफेद झूठ को दुनिया के सामने लाने में मिस्री की भूमिका निर्णायक रही। उनकी इसी आक्रामक और सटीक कूटनीति के चलते केंद्र सरकार ने उन्हें इनाम के तौर पर यह सेवा विस्तार दिया है। यह स्पष्ट संकेत है कि चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के प्रति भारत की विदेश नीति के अभेद्य किले को और अधिक मजबूत करने के लिए मिस्री की उपस्थिति अनिवार्य है।

संकटमोचक की भूमिका और लंबा अनुभव

साल 2024 में विदेश सचिव का पद संभालने के बाद से ही विक्रम मिस्री ने भारत की विदेश नीति को नई दिशा देने का काम किया है। 1989 बैच के आईएफएस अधिकारी के तौर पर उनके पास कूटनीति का लंबा और समृद्ध अनुभव है। अपने करियर के दौरान उन्होंने म्यांमार और चीन जैसे अत्यंत संवेदनशील देशों में भारत के राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान, यूरोप और अमेरिका में महत्वपूर्ण पदों पर रहकर उन्होंने भारत के रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। पश्चिम एशिया से लेकर यूक्रेन तक फैले वैश्विक तनाव के बीच भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के चुनौतीपूर्ण मिशनों में भी उनकी भूमिका किसी संकटमोचक से कम नहीं रही है।

कूटनीतिक निरंतरता की आवश्यकता

सूत्रों के अनुसार, यह सेवा विस्तार फंडामेंटल रूल 56(डी) के तहत प्रदान किया गया है। वर्तमान में भारत के सामने कई बड़ी वैश्विक जिम्मेदारियां हैं, जिनमें ब्रिक्स की अध्यक्षता और जी20 का भावी रोडमैप शामिल है। इसके अलावा, बांग्लादेश, पाकिस्तान और चीन के साथ बदलते क्षेत्रीय समीकरणों के कारण भारत को ऐसे चतुर राजनयिकों की जरूरत है जो संकट के समय में सटीक फैसले ले सकें। रक्षा सहयोग और आधुनिक तकनीक के आदान-प्रदान में भी मिस्री ने जिस प्रकार से समन्वय स्थापित किया है, उसकी सराहना वैश्विक स्तर पर हुई है। आने वाले एक साल में, उनके मार्गदर्शन में भारत अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर अपनी स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करने के प्रयास जारी रखेगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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