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5 घंटे पहले
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विचारों
Shukra Pradosh Vrat 2026 Date: सनातन परंपरा में प्रदोष व्रत को बेहद फलदायी माना गया है। देवों के देव महादेव को समर्पित यह व्रत प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि महीने में दो बार पड़ने वाली इस तिथि पर उपवास रखकर पूरे विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से उनकी विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है। जून के महीने में यह व्रत शुक्रवार को आ रहा है, इसीलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। इस अवधि में अधिक मास भी चल रहा है, जिसके चलते इस व्रत का पुण्यफल कई गुना बढ़ जाने की धारणा है। आइए जानते हैं कि यह व्रत किस तिथि को है और इसे करने से क्या-क्या लाभ मिलते हैं।
शुक्र प्रदोष व्रत की तारीख
इस बार प्रदोष व्रत 12 जून 2026, शुक्रवार को पड़ रहा है। यह व्रत ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर आ रहा है। जीवन की समस्त बाधाओं और संकटों से मुक्ति की कामना के साथ यह व्रत किया जाता है। इस दिन महादेव के साथ-साथ मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है।
प्रदोष व्रत पर बनेगा सर्वार्थ सिद्धि योग
इस बार प्रदोष व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जिसे किसी भी अहम कार्य या प्रोजेक्ट की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 05 बजकर 23 मिनट से 06 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
प्रदोष व्रत रखने के 5 बड़े फायदे
1. पापों से मुक्ति और मानसिक शांति: धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में महादेव की उपासना करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और साधक को जाने-अनजाने हुए सभी पापों से छुटकारा मिलता है। शिव साधना तनाव और नकारात्मक विचारों को दूर कर मन को शांति प्रदान करती है।
2. चंद्र तत्व में सुधार: त्रयोदशी तिथि का संबंध चंद्रमा से माना जाता है। इस तिथि पर व्रत रखने से शरीर के चंद्र तत्व में सुधार होता है। इस दिन अन्न त्यागकर केवल फलाहार ग्रहण करने वाले व्यक्ति का चंद्रमा चाहे कितना भी कमजोर क्यों न हो, वह सुधरने लगता है।
3. चंद्रमा के नकारात्मक प्रभाव में कमी: चंद्रमा की स्थिति का असर हर व्यक्ति पर पड़ता है। चंद्र ग्रह की अच्छी या खराब स्थिति व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से प्रभावित करती है। ऐसे में पूरे विधि-विधान के साथ प्रदोष व्रत रखने पर चंद्रमा के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है।
4. तीन ग्रहों का शुभ फल: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रह की स्थिति सुधरने से व्यक्ति का शुक्र भी मजबूत होता है और शुक्र के बेहतर होने पर बुध ग्रह में भी सुधार आता है। इस प्रकार प्रदोष व्रत करने से तीन ग्रहों का शुभ फल मिलने लगता है। चंद्रमा के मजबूत होने से धन-समृद्धि बढ़ती है, शुक्र से प्रेम, सुख और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है, वहीं बुध से नौकरी और कारोबार में लाभ मिलता है।
5. अशुभ संस्कारों का नाश: ऐसी मान्यता है कि प्रदोष व्रत का सकारात्मक प्रभाव साधक के शरीर और मन दोनों पर पड़ता है। इस कारण यह व्रत आपके अशुभ संस्कारों को भी समाप्त कर सकता है।
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