परमा एकादशी 2026: व्रत पारण का शुभ मुहूर्त और उपवास खोलने की सही विधि जानें धर्म एक महीने पहले 17
परमा एकादशी का व्रत 12 जून को सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 8 बजकर 10 मिनट के बीच खोला जाएगा। जानिए पारण की विधि, दान का महत्व और व्रत से जुड़े जरूरी नियम।

परमा एकादशी को सबसे अधिक पुण्य देने वाले व्रतों में गिना जाता है। यह व्रत पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आता है और इसका शुभ संयोग हर 3 साल में एक बार बनता है, जब हिंदू कैलेंडर में अधिक मास पड़ता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से जीवन में सुख और समृद्धि का आगमन होता है। लेकिन व्रत का पूरा फल तभी प्राप्त होता है जब इसका पारण शुभ मुहूर्त और सही विधि के साथ किया जाए।

पारण का सही समय क्या है

वैदिक पंचांग के अनुसार आज अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। यह तिथि 11 जून को रात 12 बजकर 57 मिनट पर आरंभ हुई और इसका समापन 11 जून को रात 10 बजकर 36 मिनट पर होगा। इस बार 11 जून को सूर्योदय के समय शुद्ध एकादशी तिथि बनी रहेगी, इसलिए व्रत का पारण 12 जून को होगा। उपवास खोलने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 23 मिनट से लेकर 8 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। द्वादशी तिथि में तय समय पर पारण करना शुभ और आवश्यक माना गया है।

इस तरह करें व्रत का पारण

द्वादशी तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इसके बाद भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए विधि-विधान से उनकी पूजा करें। पूजा के पश्चात किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, अन्न अथवा अपनी क्षमता के अनुसार दान दें। दान-पुण्य करने के बाद सात्विक और हल्का भोजन ग्रहण कर व्रत खोलना चाहिए।

दान-पुण्य क्यों है जरूरी

एकादशी और द्वादशी पर दान का खास महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस अवसर पर अन्न, वस्त्र या धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं रहती। सच्चे मन से किया गया यह छोटा-सा कर्म व्यक्ति को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी संतोष प्रदान करता है।

इन नियमों का रखें ध्यान

एकादशी व्रत रखने वालों को कुछ नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। दरअसल इस व्रत की शुरुआत एक दिन पहले से ही हो जाती है, इसलिए दशमी के दिन तामसिक और भारी भोजन से परहेज करें। एकादशी पर क्रोध, झूठ, चुगली, निंदा, हिंसा और विवाद से दूरी बनाए रखें। इस दौरान मन को शांत रखते हुए अधिक से अधिक समय विष्णु भक्ति, मंत्र जाप और पूजा-पाठ में लगाना चाहिए।

परमा एकादशी का महत्व

परमा एकादशी को बेहद दुर्लभ और शुभ तिथि माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा और नियम के साथ भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। साथ ही परिवार में सुख-शांति और वैभव का वास होता है।

मीरा शर्मा पाबना की धर्म एवं संस्कृति लेखिका हैं, जो त्योहार, धर्म, ज्योतिष और परंपराओं पर लिखती हैं। व्रत-त्योहारों के महत्व, पूजा विधि और आस्था से जुड़े विषयों को वे श्रद्धा और जानकारी के साथ पेश करती हैं। वाराणसी से उनका जुड़ाव उनके लेखन में झलकता है।

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