बिहार: सारण के किसान फूलों की खेती से बदल रहे किस्मत, 2 हजार का निवेश देकर 7 हजार तक की कमाई बिहार एक महीने पहले 47
सारण जिले के किसान अब पारंपरिक फसलों के बजाय फूलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उन्हें काफी मुनाफा हो रहा है। मिर्जापुर गांव के किसान गेंदा और गुलाब उगाकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।

पारंपरिक खेती को छोड़कर फूलों की ओर बढ़े कदम

बिहार के सारण जिले में कृषि का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। यहां के किसान अब पुराने ढर्रे की खेती से बाहर निकलकर नगदी फसलों की ओर तेजी से अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। विशेष रूप से मढ़ौरा प्रखंड का मिर्जापुर गांव इस बदलाव का एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है। यहां के किसान साग-सब्जियों के अलावा अब बड़े पैमाने पर फूलों की खेती कर रहे हैं, जो उनके लिए कमाई का एक शानदार जरिया साबित हो रहा है। इस नई पहल ने न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारा है, बल्कि पूरे इलाके को एक नई पहचान भी दिलाई है।

मुनाफे का गणित और खेती का विस्तार

मिर्जापुर गांव में वर्तमान में लगभग 8 से 10 बीघा भूमि पर साल भर फूलों की खेती की जा रही है। फूलों की मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पटना, हाजीपुर, वैशाली और छपरा जैसे बड़े शहरों के व्यापारी खुद खेतों तक पहुंचकर माल उठा रहे हैं। स्थानीय किसान संतोष भगत, जो पिछले 15 वर्षों से फूलों की खेती से जुड़े हैं, बताते हैं कि सब्जियों की तुलना में फूलों की खेती में मुनाफा कहीं अधिक है।

खेती के खर्च और लाभ का हिसाब देते हुए किसान बताते हैं कि यदि कोई एक कट्ठा खेत में गेंदे की खेती करता है, तो उसमें लगभग 2 हजार रुपये का खर्च आता है। इसके बदले में किसान को 5 से 7 हजार रुपये तक की शुद्ध कमाई आसानी से हो जाती है। सीजन के आखिरी दौर में भी एक किसान अपने 5 कट्ठा खेत से रोजाना 200 से 500 गेंदे की लड़ियां बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहा है। बाजार में इन फूलों की कीमत 15 से 20 रुपये प्रति लड़ी तक मिल जाती है।

फूलों की वैरायटी और तकनीक

मिर्जापुर क्षेत्र में माली समाज के लोग पीढ़ियों से फूलों के काम से जुड़े रहे हैं, लेकिन अब इसे आधुनिक तरीके से किया जा रहा है। यहां मुख्य रूप से गेंदे की विभिन्न किस्में उगाई जाती हैं ताकि साल भर खेतों में फूल उपलब्ध रहें। इसके अतिरिक्त, कुछ किसान सीमित मात्रा में 'चेरी गुलाब' की खेती भी कर रहे हैं। उन्नत किस्मों के बीज प्राप्त करने के लिए किसान अब ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं या सीधे कोलकाता से उच्च गुणवत्ता वाले बीज मंगवा रहे हैं।

जीवन स्तर में बदलाव और भविष्य की राह

फूलों की खेती से हुई बंपर कमाई ने यहां के किसानों के जीवन स्तर को पूरी तरह बदल दिया है। कई किसान परिवारों ने अपनी मेहनत के दम पर पक्के मकान तैयार कर लिए हैं। इसके अलावा, अपने बच्चों की उच्च शिक्षा और उनके विवाह जैसे महत्वपूर्ण खर्चों को पूरा करने में भी उन्हें अब कठिनाई नहीं होती। किसान अब रासायनिक खाद के बजाय जैविक खेती को अधिक महत्व दे रहे हैं, जिससे न केवल पैदावार बेहतर हुई है बल्कि फूलों की गुणवत्ता में भी सुधार आया है। विशेषज्ञों द्वारा किसानों को 'कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी' से प्रशिक्षण प्राप्त करने की सलाह दी जा रही है। वैज्ञानिक तरीके अपनाने से लागत में और कमी आएगी और मुनाफे का आंकड़ा और ऊपर जाएगा, जिससे किसानों का भविष्य और अधिक सुरक्षित होगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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