Agriculture Tips: 1 खेत, 4 फसलें और दोगुनी कमाई! कपास के साथ करें ये खेती, हो जाएंगे मालामाल मध्य प्रदेश एक महीने पहले 42
मध्य प्रदेश के खरगोन में किसान अब कपास के साथ अन्य फसलों की खेती करके अपनी आय कई गुना बढ़ा रहे हैं। यह मिश्रित खेती का तरीका न केवल जोखिम कम करता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी बढ़ाता है।

कपास के साथ अपनाएं मिश्रित खेती

मध्य प्रदेश का Khargone जिला अपनी कपास उत्पादन क्षमता के लिए पूरे देश में मशहूर है, जहां के कॉटन को 'सफेद सोना' कहा जाता है। आमतौर पर किसान खरीफ सीजन में केवल कपास उगाते हैं, लेकिन कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि किसान थोड़ी सूझबूझ के साथ मिश्रित खेती अपनाएं, तो एक ही जमीन से 4 फसलें लेकर अपनी कमाई दोगुनी कर सकते हैं। कपास के साथ सोयाबीन, मूंग और उड़द जैसी फसलें लगाना आर्थिक दृष्टि से काफी फायदेमंद साबित होता है।

कैसे लें 4 फसलों का उत्पादन

कृषि वैज्ञानिक Dr. Rajiv Singh के मुताबिक, कपास की खेती में कतारों के बीच 4-4 फीट की खाली जगह छोड़ी जाती है। किसान इस जगह का उपयोग सोयाबीन, मूंग या उड़द की 2-2 लाइन लगाकर कर सकते हैं। इस तकनीक का पालन करने पर किसानों को प्रति एकड़ 4 से 5 क्विंटल तक अतिरिक्त पैदावार मिल सकती है, जो एक नया आय का स्रोत बन जाता है।

मिश्रित खेती के मुख्य फायदे

  • मिट्टी को पोषण: सोयाबीन, मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलें वातावरण से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में मिला देती हैं, जिससे कपास को प्राकृतिक पोषण मिलता है और खाद का खर्च कम होता है।
  • कीटों से बचाव: मिश्रित खेती से मुख्य फसल पर कीटों का दबाव कम हो जाता है, क्योंकि कई कीट सहायक फसलों की ओर आकर्षित होते हैं।
  • खरपतवार में कमी: खेत में खाली जगह कम रहने से खरपतवार कम उगते हैं, जिससे निराई-गुड़ाई पर होने वाला अतिरिक्त खर्च बच जाता है।
  • लागत की भरपाई: Dr. Rajiv Singh का कहना है कि इन सहायक फसलों से मिलने वाला उत्पादन अक्सर खेती की पूरी लागत निकाल देता है, जिससे कपास से होने वाली आय पूरी तरह मुनाफा बन जाती है।

जोखिम कम करने का सबसे बेहतर तरीका

वर्तमान समय में केवल एक फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि मौसम की मार या बाजार भाव में गिरावट से भारी नुकसान की आशंका रहती है। मिश्रित खेती न केवल जोखिम को बांटती है, बल्कि खेत की जैव विविधता को बढ़ाकर मिट्टी की सेहत को भी लंबे समय तक बेहतर बनाए रखती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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