गहरी जुताई बनी खेती की गेमचेंजर: एक तरीका, तीन फायदे और बढ़ता उत्पादन मध्य प्रदेश एक महीने पहले 44
खरीफ सीजन की तैयारी में जून की तेज धूप का लाभ उठाकर की गई गहरी जुताई फसल को रोग-कीट से बचाती है, उत्पादन बढ़ाती है और सूखे में बीमा की तरह काम करती है।

बारिश का मौसम दस्तक देने ही वाला है और जून की चिलचिलाती धूप आम लोगों को भले ही परेशान करे, लेकिन किसानों के लिए यही धूप बेहद उपयोगी साबित होती है। मध्य प्रदेश समेत पूरे देश में इस समय खरीफ की खेती की तैयारियां जोरों पर हैं और किसान अपने खेतों को आगामी फसल के लिए तैयार कर रहे हैं। हालांकि, कई किसान अक्सर एक चूक कर बैठते हैं—वे जून की धूप को नजरअंदाज कर खेत की तैयारी के लिए पहली बारिश का इंतजार करते रहते हैं, जो उनके हित में नहीं है।

बालाघाट के कृषि उपसंचालक फूल सिंह मालवीय ने किसान भाइयों को सलाह दी है कि खेत में गहरी जुताई के लिए यही सबसे उपयुक्त समय है, क्योंकि इसका सीधा लाभ आने वाली फसलों को मिलता है।

गहरी जुताई न करने पर क्या होता है

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान जून की धूप का फायदा उठाकर जुताई नहीं करते, तो यह एक बड़ी चूक है। इसी महीने खेतों में गहरी जुताई करनी चाहिए। अगर यह प्रक्रिया सही ढंग से की जाए, तो फसल में लगभग 50 प्रतिशत तक बीमारियां कम लगती हैं और कीटों का प्रकोप भी घट सकता है। बावजूद इसके, कई किसान अपनी लागत बचाने के चक्कर में गहरी जुताई से बचते हैं।

क्यों जरूरी है गहरी जुताई

ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई से मिट्टी में छिपे कीटों के अंडे, लार्वा और दूसरे रोग कारक तेज धूप के संपर्क में आकर नष्ट हो जाते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि फसल लगाने पर कीटों और रोगों का असर काफी कम रहता है। साथ ही, मिट्टी के टूटने से उसमें हवा और पानी की आवाजाही बढ़ती है, जिससे फसल उत्पादन में लगभग 15 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।

सूखे के लिए बीमा जैसा काम

भारतीय कृषि को यूं ही मानसून का जुआ नहीं कहा जाता। किसी साल जरूरत से ज्यादा बारिश होती है तो किसी साल बेहद कम। इस वर्ष अलनीनो का प्रभाव पड़ने की आशंका है, जिसका असर खेती पर दिख सकता है। ऐसी स्थिति में गहरी जुताई से मिट्टी के ढेले बनते हैं और जब बारिश होती है, तो पानी आसानी से जमीन के भीतर पहुंच जाता है। इस तरह जमा हुआ पानी इतना मददगार होता है कि 15 से 20 दिन तक बारिश न हो, तब भी फसल पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता। यही वजह है कि जुताई को सूखे का इंश्योरेंस कहा जा सकता है।

जुताई के साथ ये काम भी कर सकते हैं किसान

गहरी जुताई के दौरान किसान खेत में कुछ चीजें मिला सकते हैं, जिससे अगली फसल के लिए जरूरी पोषक तत्व भूमि में समाहित हो जाते हैं। इसके अलावा फसलों के अवशेषों को भी भूमि में मिलाया जा सकता है, जिससे मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ती है। एक बार किया गया यह निवेश आगे चलकर खाद, कीटनाशकों और कचरा निकालने पर होने वाले खर्च को काफी कम कर देता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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