भिंडी बनी किसान की 'हरी कमाई', 75 डिसमिल खेत से रमाशंकर कुशवाहा कर रहे लाखों की आमदनी मध्य प्रदेश एक महीने पहले 19
सीधी जिले के मोड़ी गांव के किसान रमाशंकर कुशवाहा ने 75 डिसमिल जमीन में भिंडी की खेती कर मिसाल कायम की है। करीब 20 हजार रुपये की लागत से तैयार फसल से वह एक सीजन में एक लाख रुपये तक की आमदनी कर लेते हैं।

सीधी जिले के मोड़ी गांव के किसान रमाशंकर कुशवाहा ने यह दिखा दिया है कि अगर खेती में आधुनिक तकनीक और सही फसल का चुनाव किया जाए, तो थोड़ी जमीन से भी अच्छी कमाई हो सकती है। परंपरागत खेती से हटकर उन्होंने भिंडी की खेती को अपनाया और महज 75 डिसमिल जमीन में ऐसी कामयाबी हासिल की, जो आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है।

खेती से बचपन का नाता

रमाशंकर कुशवाहा पेशे से किसान हैं और बचपन से ही खेती-किसानी से जुड़े रहे हैं। उन्होंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की और इसके बाद परिवार की खेती की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। समय के साथ उन्होंने खेती के नए तरीके सीखे और सब्जी उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाया। उनका मानना है कि परंपरागत फसलों के मुकाबले सब्जियों की खेती में कम समय में बेहतर आमदनी की संभावना बनी रहती है।

45 से 50 दिन में तैयार होने वाली फसल

रमाशंकर ने बताया कि उन्होंने मार्च महीने में भिंडी की बुवाई की थी। भिंडी एक ऐसी फसल है, जो किस्म के अनुसार 45 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है। इसी वजह से किसान कम समय में उत्पादन लेकर बाजार में बिक्री शुरू कर सकते हैं। जल्दी तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए नकदी फसल का अच्छा विकल्प साबित हो रही है।

भिंडी की खेती में कितनी लागत

उन्होंने बताया कि 75 डिसमिल जमीन में भिंडी की खेती में लगभग 20 हजार रुपये की लागत आई। इसमें बीज, खाद, सिंचाई और दवा सहित अन्य कृषि कार्यों का खर्च शामिल है। फसल तैयार होने के बाद किसान करीब दो महीने तक लगातार भिंडी की तुड़ाई कर सकते हैं। पूरे सीजन में 50 से 60 क्विंटल तक उत्पादन मिलने की संभावना रहती है।

एक सीजन में एक लाख तक की कमाई

रमाशंकर के अनुसार इस समय बाजार में भिंडी लगभग 20 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रही है। वह अपनी उपज सीधी मंडी और आसपास के स्थानीय बाजारों में बेचते हैं। यदि 50 क्विंटल उत्पादन मिलता है, तो कुल बिक्री से लगभग एक लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है। 20 हजार रुपये की लागत निकालने के बाद किसान को करीब 70 हजार रुपये तक का शुद्ध लाभ मिल सकता है। यानी लागत के मुकाबले कई गुना अधिक कमाई संभव है।

चुनौतियां और जरूरी देखभाल

हालांकि भिंडी की खेती में कुछ मुश्किलें भी हैं। किसान ने बताया कि फसल में कीट लगने और फल टेढ़ा होने की समस्या अक्सर सामने आती है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं। यही कारण है कि समय-समय पर दवा का छिड़काव और फसल की निगरानी बेहद जरूरी है।

रमाशंकर कुशवाहा का मानना है कि अगर किसान आधुनिक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल करें, फसल की सही देखभाल करें और बाजार की मांग के अनुसार खेती करें, तो कम जमीन में भी अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है। उनकी यह कामयाबी क्षेत्र के दूसरे किसानों को भी सब्जी की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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