भारत
एक घंटा पहले
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विचारों
परंपरागत फसलों से हटकर कुछ नया करने की सोच ने एक किसान की किस्मत बदल दी। मनोज पाटिल ने केला और कपास जैसी फसलों को छोड़कर पपीते की खेती की राह चुनी, और आज यही फैसला उनकी अच्छी कमाई का जरिया बन गया है।
5 एकड़ में पपीते की खेती
मनोज पाटिल बताते हैं कि वे करीब 5 एकड़ जमीन पर पपीते की खेती कर रहे हैं। इस फसल को तैयार करने में उन्हें लगभग 3 से 4 लाख रुपये का खर्च आता है। हालांकि, इसके बदले में मिलने वाला मुनाफा इस लागत से कई गुना ज्यादा है।
लागत से कई गुना मुनाफा
उनके मुताबिक, इस खेती से उन्हें 10 से 15 लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है। यानी जितना पैसा वे फसल पर लगाते हैं, उससे कहीं अधिक कमाई उन्हें वापस मिल जाती है, जो इस खेती को आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद बनाती है।
आठ महीने में तैयार होती है फसल
मनोज पाटिल का कहना है कि पपीते की फसल लगभग 8 महीने में तैयार हो जाती है। इसके बाद करीब 3 महीने तक लगातार फलों की तुड़ाई चलती रहती है, जिससे उन्हें कई महीनों तक उपज मिलती रहती है।
दूसरों को भी मिला रोजगार
इस खेती ने सिर्फ मनोज पाटिल को ही फायदा नहीं पहुंचाया, बल्कि उनके इस काम से करीब 10 लोगों को रोजगार भी मिला है। इस तरह उनकी मेहनत और सही फैसले ने न केवल उनकी अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी आजीविका का साधन तैयार किया।
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