हरियाणा
2 घंटे पहले
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फसलों पर भारी पड़ी बारिश
फरीदाबाद में इन दिनों मौसम का मिजाज काफी बदला हुआ है और लगातार हो रही बारिश ने कृषि क्षेत्र को प्रभावित किया है। बारिश के इस दौर में कई ऐसे किसान हैं जिनकी मिर्च की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि, इसी चुनौती के बीच कुछ ऐसे किसान भी हैं जिन्होंने अपनी सूझबूझ से न केवल फसल को बचाया, बल्कि पूरे सीजन अच्छा मुनाफा भी कमाया है। इन किसानों के खेतों में मिर्च की पैदावार काफी बेहतर रही है और अब जब सीजन का अंतिम समय चल रहा है, वे खेतों से मिर्च की आखिरी तुड़ाई कर रहे हैं।
सफलता का राज और किसान का अनुभव
सुनपेड़ गांव के रहने वाले 63 साल के किसान दयाल दास ने बताया कि मिर्च की खेती में सफलता का सबसे बड़ा आधार सही बीज का चुनाव और कंपनी की गुणवत्ता होती है। उनका मानना है कि अगर किसान सही कंपनी का बीज चुनते हैं, तो नुकसान की संभावना काफी कम हो जाती है। दयाल दास बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव में निवास करते हैं, जबकि उनकी खेती सुनपेड़ गांव में स्थित है। वे अपनी सवा एकड़ जमीन पर मिर्च और तोरी की खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार मिर्च की पैदावार पूरे सीजन बेहतरीन रही है और अब यह वैरायटी अपने अंतिम दौर में है। दयाल दास के अनुसार, उन्होंने मिर्च की बुवाई में देरी की थी और 26 जनवरी के बाद खेतों में पौधे लगाए थे, जिसने फसल को सुरक्षित रखने में मदद की।
बदलती तकनीक और दवाओं का बढ़ता प्रयोग
दयाल दास का कहना है कि खेती के तौर तरीकों में समय के साथ काफी बदलाव आया है। पहले की तुलना में आज फसलों पर दवाओं का छिड़काव कहीं अधिक करना पड़ता है। उन्होंने साझा किया कि जब वे छोटे थे, तब फसलों में इतनी रासायनिक दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती थी, लेकिन आज हर फसल को कीड़ों और बीमारियों से बचाने के लिए नियमित स्प्रे आवश्यक हो गया है। वे खुद सुवाल कंपनी की दवाओं का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि कई किसान बाजार से सस्ती या नकली दवाएं खरीद लेते हैं, जो न केवल फसल को खराब करती हैं बल्कि पूरी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। बारिश के दौरान कीटनाशकों का समय पर छिड़काव करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यदि छिड़काव में देरी हो, तो छोटे कीड़े फसल को नुकसान पहुंचा देते हैं जो जल्दी दिखाई भी नहीं देते।
खेती में लागत और मंडी के भाव
मिर्च की खेती में आने वाले खर्च के बारे में बताते हुए दयाल दास ने विस्तार से जानकारी दी। मिर्च के बीज का एक पैकेट 550 रुपये में मिलता है। यदि जुताई से लेकर बीज और अन्य खर्चों को जोड़ दिया जाए, तो प्रति एकड़ 25 से 30 हजार रुपये की लागत आती है। इसके अलावा दवाओं पर होने वाला खर्च अलग है, जिस पर उन्होंने खुद 25 से 30 हजार रुपये खर्च किए हैं। वर्तमान में मंडी में मिर्च का भाव करीब 30 रुपये प्रति किलो चल रहा है।
बारिश से बचाव के लिए जरूरी सावधानी
बरसात के मौसम में मिर्च की फसल को बचाने के लिए उन्होंने एक विशेष सुझाव दिया है। दयाल दास का कहना है कि लगातार बारिश के दौरान मिर्च के पौधे पत्तों से ढके रहते हैं। यदि खेत में लंबे समय तक नमी बनी रहे और हवा का संचार न हो, तो मिर्च खराब होने लगती है। इसलिए, खेत में पौधों के बीच हवा का आना-जाना सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है। वे बचपन से खेती कर रहे हैं और 63 वर्ष की उम्र में भी अपने अनुभवों के आधार पर खेती को लगातार लाभ का व्यवसाय बनाए हुए हैं।
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