हरियाणा
एक घंटा पहले
3
विचारों
सेक्टर 56 की बदहाल स्थिति
फरीदाबाद में बारिश का मौसम एक तरफ जहां लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत दिला रहा है, वहीं सेक्टर 56 और उसके आसपास के इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए यह आफत की बारिश साबित हो रही है। इस इलाके में स्थित डंपिंग यार्ड से उठने वाली भीषण दुर्गंध ने स्थानीय निवासियों का जीना दूभर कर दिया है। बारिश होते ही कूड़े से निकलने वाली गैसों और बदबू का स्तर काफी बढ़ जाता है, जो हवा के साथ फैलकर आसपास की कॉलोनियों और सेक्टरों तक पहुंच जाता है। स्थिति इतनी गंभीर है कि लोग अपने ही घरों में चैन की सांस लेने के लिए तरस गए हैं, और खाना पीना तक दूभर हो गया है।
लगातार शिकायतों के बाद भी चुप्पी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने डंपिंग यार्ड की समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की हैं और प्रदर्शन के दौरान सड़कों पर उतरकर जाम भी लगाया है। हालांकि, उन्हें हर बार सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रशासन की तरफ से आज तक लिखित में कोई आश्वासन नहीं दिया गया है। लोगों को डर है कि मानसून के दौरान यह समस्या और अधिक विकराल रूप लेगी, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ेगा।
तीन साल से जारी है संघर्ष
रामनगर निवासी मीना बताती हैं कि पिछले करीब 3 सालों से स्थानीय लोग इस कचरे के ढेर की मार झेल रहे हैं। उनके अनुसार, अधिकारी और जनप्रतिनिधि हर बार यह वादा करते हैं कि डंपिंग यार्ड को यहां से स्थानांतरित कर दिया जाएगा, लेकिन इसकी समय सीमा कोई नहीं बताता। इसका दुष्प्रभाव बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पर पड़ रहा है। मीना ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन को यहां कूड़ा डालना ही था, तो इस कॉलोनी को बसाने की अनुमति क्यों दी गई? बदबू के कारण बच्चों की तबीयत लगातार बिगड़ रही है और उन्हें मजबूरी में अस्पताल जाना पड़ रहा है।
प्रदर्शन के बाद भी समाधान नदारद
गीता नाम की एक निवासी बताती हैं कि बीते 3 वर्षों से दुर्गंध इतनी बढ़ गई है कि सामान्य जीवन असंभव हो गया है। कई बार सड़क पर उतरकर विरोध करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। यदि नेताओं और प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो जनता अपने स्तर पर समाधान निकालने के लिए मजबूर होगी। गीता ने बताया कि बच्चों के गले में संक्रमण जैसी दिक्कतें आ रही हैं। जनता जिन्हें वोट देकर जिताती है, वही बाद में सुनवाई करने को तैयार नहीं होते।
स्वास्थ्य और घर के माहौल पर असर
रिंकी मिश्रा, जो पिछले 9 साल से यहां रह रही हैं, ने बताया कि जब भी अधिकारी आते हैं, वे सिर्फ आश्वासन देते हैं कि डंपिंग यार्ड हटा देंगे, लेकिन वे कभी लिखित में वादा नहीं करते। इस बदबू के कारण बच्चों के साथ-साथ बड़ों की सेहत भी गिर रही है। सिर दर्द और सांस लेने में तकलीफ होना आम बात हो गई है। देव आशीष सिंह का कहना है कि पिछले 3 वर्षों से इस यार्ड के कारण इलाके में कैंसर जैसी घातक बीमारियों के फैलने का डर बना हुआ है। बदबू इतनी तेज होती है कि कूलर और पंखे तक चलाने की हिम्मत नहीं होती, क्योंकि वे बाहर की दुर्गंध को घर के अंदर खींच लेते हैं।
सरकारी दावों की पोल
विनोद कुमार शर्मा ने पूरे मामले का विवरण देते हुए बताया कि साल 2016 में यह कॉलोनी विकसित हुई थी। 10 साल बीतने को आए हैं, लेकिन पिछले 3 सालों में इस जगह को नर्क में बदल दिया गया है। यह पूरी तरह सरकार से अप्रूव्ड कॉलोनी है, जहां करीब 200 लोगों की रजिस्ट्री हो चुकी है। निवासी एमसीएफ (MCF) को बिल और डेवलपमेंट चार्ज भी समय पर भरते हैं।
विनोद ने बताया कि साल 2023 में आश्वासन दिया गया था कि यह डंपिंग यार्ड केवल एक अस्थाई व्यवस्था है। लेकिन अब तीन साल बीत चुके हैं और स्थिति जस की तस है। बंधवाड़ी का कचरा केंद्र बंद होने के बाद अब उसका सीधा असर हमारे इलाके पर पड़ रहा है। इस क्षेत्र के आसपास करीब 15370 घर हैं। यदि हम प्रति घर में औसतन 5 सदस्य भी मानकर चलें, तो लगभग 1 लाख लोगों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है।
जनप्रतिनिधियों से आर-पार की अपील
विनोद कुमार शर्मा ने विधायक, पार्षद और मेयर से अपील की है कि वे अपने किए गए वादों को पूरा करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले समय में सेक्टर 55 के पुल से नीचे आना भी मुश्किल हो जाएगा। निवासियों का कहना है कि वे जनप्रतिनिधियों का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन 6 बार वादे करने के बाद भी डंपिंग यार्ड को न हटाना विश्वासघात है। अब जनता को उम्मीद है कि प्रशासन इस गंभीर स्वास्थ्य संकट का संज्ञान लेगा और इसे हटाने के लिए कोई ठोस योजना लागू करेगा।
Comments
0 comment