बल्लभगढ़ सिटी पार्क में बंदरों को लेकर बंटी राय, कोई बता रहा आतंक तो कोई कह रहा इंसानी गलती हरियाणा 2 घंटे पहले 2
बल्लभगढ़ के सिटी पार्क में बंदरों को लेकर लोगों की राय अलग-अलग है—कुछ इसे बच्चों और दुकानदारों के लिए बड़ी समस्या मानते हैं तो कुछ का कहना है कि बंदर तभी हमला करते हैं जब उन्हें छेड़ा जाए। बढ़ती शिकायतों के बीच आगंतुक स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

बल्लभगढ़ का सिटी पार्क शहर की एक खास पहचान बन चुका है। सुबह की ताजी हवा हो, शाम की सैर हो या दोपहर का खाली समय—यहां हर वक्त लोगों की आवाजाही बनी रहती है। बच्चे झूलों पर खेलते दिखते हैं, बुजुर्ग टहलते हैं और युवा अपने दोस्तों के साथ समय बिताने पहुंचते हैं। लेकिन इन दिनों यहां एक ऐसी समस्या चर्चा में है, जिसने आने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

कई लोगों का कहना है कि पार्क में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जबकि कुछ का मानना है कि बंदर तभी हमला करते हैं जब उन्हें छेड़ा जाता है। बातचीत में पार्क आने वाले लोगों ने बंदरों को लेकर अपने अलग-अलग अनुभव साझा किए। कुछ ने इसे गंभीर समस्या बताया तो कुछ ने इसके पीछे इंसानों की गलती को वजह माना।

सुबह-शाम बढ़ जाती है दिक्कत

नियमित रूप से पार्क आने वाले मनोज कुमार बताते हैं कि वे अक्सर यहां सिटी पार्क आते रहते हैं। उनके मुताबिक बंदरों का आतंक सुबह और शाम के समय ज्यादा देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि अभी गर्मी ज्यादा होने के कारण बंदर दिन में कम निकलते हैं, लेकिन शाम करीब 5 से 6 बजे के बाद बड़ी संख्या में दिखाई देने लगते हैं।

मनोज के अनुसार, कई बार बंदर खेलते हुए बच्चों को पकड़ लेते हैं, नाखून मार देते हैं और कभी-कभी काट भी लेते हैं। उन्होंने बताया कि यह समस्या कई सालों से बनी हुई है। यहां एक-दो बार जाल भी लगाए गए थे, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। उन्होंने कई बार शिकायत भी की, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।

दुकानदारों की परेशानी

पार्क में भेलपुरी बेचने वाले अशोक का कहना है कि यहां बंदरों का काफी आतंक है। वे बताते हैं कि बंदर उनका टमाटर, प्याज और खाने का सामान उठाकर भाग जाते हैं और इनका कोई तय समय नहीं होता—जब मन करता है तभी आ जाते हैं। उनके मुताबिक एक साथ 8 से 10 बंदर घूमते रहते हैं, जिससे बेचने वालों को काफी दिक्कत होती है और कई बार ग्राहक भी डर जाते हैं।

छेड़ने पर ही काटते हैं बंदर

दूसरी ओर, यासीन सैफी की राय इससे अलग है। वे बताते हैं कि वे अक्सर सिटी पार्क घूमने जाते हैं और उनके हिसाब से यहां बंदरों का कोई आतंक नहीं है। उनका कहना है कि असल में इंसान खुद बंदरों को परेशान करता है, और जब कोई उन्हें छेड़ेगा तो बंदर काटेंगे ही। उन्होंने सलाह दी कि अगर बंदर आपस में लड़ रहे हों तो उनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

बल्लभगढ़ के रहने वाले जेपी कौशिक भी अक्सर यहां घूमने आते हैं। वे कहते हैं कि जैसे कोई उन्हें तंग करेगा तो वे भी जवाब देंगे, ठीक वैसे ही बंदर भी तभी काटते हैं जब कोई उन्हें छेड़ता है। उनके मुताबिक बंदर बिना वजह किसी को परेशान नहीं करते।

स्थायी समाधान की मांग

बढ़ती शिकायतों और बंटी हुई राय के बीच पार्क में आने वाले लोग चाहते हैं कि इस समस्या का कोई स्थायी हल निकाला जाए, ताकि बच्चे, बुजुर्ग, युवा और दुकानदार सभी बिना किसी डर के यहां समय बिता सकें।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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