फरीदाबाद के इस घेवर का जलवा: विदेशों तक पहुंची स्वाद की महक, दूसरे ही साल में ग्राहकों की लगी लंबी कतार हरियाणा एक घंटा पहले 2
सावन और रक्षाबंधन के त्योहारों के बीच फरीदाबाद के दयालपुर गांव का घेवर खूब सुर्खियां बटोर रहा है। महज दो साल पुरानी यह दुकान अब देश-विदेश में अपनी खास पहचान बना चुकी है।

त्योहारी सीजन में छाई घेवर की मिठास

सावन का महीना, तीज का त्योहार और आने वाला रक्षाबंधन का मौका, इन खास दिनों में फरीदाबाद के दयालपुर गांव का घेवर लोगों की पहली पसंद बन चुका है। अपनी स्थापना के महज दूसरे ही साल में इस मिठाई ने न केवल दिल्ली और एनसीआर, बल्कि गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी अपनी धाक जमा ली है। स्वाद की यह खुशबू अब देश की सीमाओं को पार कर सुदूर विदेशों तक पहुंच गई है।

कोयले की आंच और देसी घी का जादू

इस घेवर की खासियत इसकी पारंपरिक बनाने की विधि है। यहां घेवर को शुद्ध देसी घी और खांड का उपयोग करके कोयले की भट्ठी पर तैयार किया जाता है। इस बेहतरीन स्वाद की बदौलत रोजाना करीब 1 क्विंटल घेवर की बिक्री हो रही है। दुकान के संचालक नमन बताते हैं कि उनकी दुकान पिछले साल ही शुरू हुई थी, लेकिन इतने कम समय में इसे लोगों का भरपूर प्यार मिला है।

अमेरिका और जर्मनी तक मांग

नमन के अनुसार, उनके घेवर की लोकप्रियता का आलम यह है कि इसके ऑर्डर अब अमेरिका के न्यू जर्सी और जर्मनी तक से आ रहे हैं। उनके पिता, जो कि एक पूर्व सूबेदार हैं और 28 फरवरी 2023 को सेवानिवृत्त हुए थे, ने ही इस दुकान की शुरुआत की थी।

क्या है कीमत?

ग्राहकों के लिए यहाँ घेवर के दो विकल्प उपलब्ध हैं:

  • बिना दूध वाला घेवर: 500 रुपये प्रति किलो।
  • मलाई और खोया वाला घेवर: 550 रुपये प्रति किलो।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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