गोरखपुर से सिलीगुड़ी अब सिर्फ 6 घंटे में! यूपी-बिहार-बंगाल को जोड़ेगा यह एक्सप्रेसवे, फर्राटा भरेंगी गाड़ियां व्यापार 3 महीने पहले 48
उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाला प्रस्तावित एक्सप्रेसवे गोरखपुर से सिलीगुड़ी की दूरी को 14-15 घंटे से घटाकर महज 6-8 घंटे कर देगा। करीब 32,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना पर वाहन 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगे।

उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है। इन तीनों राज्यों से होकर गुजरने वाला प्रस्तावित एक्सप्रेसवे न सिर्फ आपसी कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा, बल्कि गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक का सफर भी बेहद आसान कर देगा। अभी जहां इस यात्रा में 14-15 घंटे लग जाते हैं, वहीं इस कॉरिडोर के बनने के बाद यह दूरी सिर्फ 6-8 घंटे में तय की जा सकेगी।

तीन राज्यों की बदल जाएगी तस्वीर

यह हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे जल्द ही यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल की सूरत बदलने वाला है। इस प्रस्तावित कॉरिडोर के जरिए गोरखपुर से सिलीगुड़ी पहुंचने में केवल 6 घंटे का समय लगेगा। परियोजना करीब 32,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही है और हाल ही में इसके निर्माण कार्य में तेजी लाई गई है। इस कॉरिडोर के पूरा होने पर यात्रा का समय काफी घट जाएगा, माल ढुलाई को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र के अहम आर्थिक एवं पर्यटन केंद्रों तक पहुंच आसान हो जाएगी।

छह लेन से आठ लेन तक विस्तार की तैयारी

रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल इस एक्सप्रेसवे को छह लेन वाले ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। हालांकि भविष्य में इसे आठ लेन तक बढ़ाने की योजना अभी से बना ली गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 32,000 करोड़ रुपये है और इस पर वाहन 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगे।

जगदीशपुर से सिलीगुड़ी तक का रूट

यह एक्सप्रेसवे पूर्वी उत्तर प्रदेश से बिहार होते हुए उत्तरी पश्चिम बंगाल तक एक बेहतरीन सड़क कॉरिडोर तैयार करेगा। इसका रास्ता गोरखपुर के पास जगदीशपुर से शुरू होकर सिलीगुड़ी तक जाएगा, जिसे भारत के पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार माना जाता है। भारत-नेपाल सीमा के नजदीक स्थित होने और 'चिकन नेक' के नाम से मशहूर संकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास होने के कारण यह एक्सप्रेसवे क्षेत्रीय पहुंच को बेहतर बनाने के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों से कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगा।

12 जिलों से गुजरेगा कॉरिडोर, बिहार को सबसे बड़ा फायदा

यह एक्सप्रेसवे तीन राज्यों के 12 जिलों से होकर गुजरेगा। उत्तर प्रदेश में इसकी लंबाई करीब 84 किमी होगी और यह गोरखपुर, देवरिया तथा कुशीनगर जिलों से होकर निकलेगा। सबसे लंबा हिस्सा बिहार में रहेगा, जहां यह करीब 416 किमी तक फैला होगा।

बिहार में यह रूट पश्चिम चंपारण, शिवहर, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, सुपौल, मधुबनी, अररिया और किशनगंज जैसे जिलों से गुजरने की उम्मीद है। ऐसे में इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ बिहार राज्य को मिलने वाला है।

14-15 घंटे का सफर सिमटकर 6-8 घंटे का

इस परियोजना का सबसे अहम फायदा गोरखपुर और सिलीगुड़ी के बीच यात्रा समय में आने वाली कमी होगी। सड़क मार्ग से यह सफर इस समय आमतौर पर 14 से 15 घंटे में पूरा होता है। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यह समय घटकर लगभग 6 से 8 घंटे रह जाएगा, जिससे यात्रियों और व्यापारिक यातायात के लिए रास्ता काफी तेज और सुविधाजनक हो जाएगा। साथ ही लोग अपनी गाड़ियों से इस बेहतर सफर का आनंद उठा सकेंगे।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, जो आगे चलकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। इससे उत्तर भारत में एक बड़ा हाई-स्पीड रोड नेटवर्क बनेगा, जिससे प्रमुख शहरों के बीच पहुंच आसान होगी और माल व यात्रियों की आवाजाही भी सुगम होगी। अधिकारियों का मानना है कि यह कॉरिडोर क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा दे सकता है। सिलीगुड़ी दार्जिलिंग, गंगटोक और कई पूर्वोत्तर राज्यों जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों का मुख्य प्रवेश द्वार है।

व्यापार और क्षेत्रीय विकास को मिलेगी रफ्तार

बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से बिहार और आसपास के क्षेत्रों के उन यात्रियों को खास फायदा मिलेगा जो अक्सर इन जगहों की यात्रा करते हैं। यह परियोजना शहरी केंद्रों, सीमावर्ती क्षेत्रों और प्रमुख आर्थिक कॉरिडोर के बीच पहुंच को बेहतर बनाकर व्यापार, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय विकास को भी मजबूती देगी।

निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे पूर्वी भारत की सबसे महत्वपूर्ण सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक बनने जा रहा है। तीन राज्यों को हाई-स्पीड कॉरिडोर से जोड़कर यह परियोजना क्षेत्र में आवाजाही, यात्रा समय और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को नई दिशा देगी।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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