परमाणु बम न होता तो कोई पूछता भी नहीं, पाकिस्तान पूरी तरह बर्बादी की कगार पर: सिंगापुर के पूर्व राजनयिक विश्व 2 महीने पहले 83
सिंगापुर के पूर्व राजनयिक बिलहारी कौसिकन ने पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की बर्बादी के जिम्मेदार उसके अपने नेता और सेना हैं, न कि भारत या अफगानिस्तान।

पाकिस्तान की मौजूदा बदहाली और गंभीर आर्थिक संकट के बीच सिंगापुर के एक पूर्व वरिष्ठ राजनयिक ने पड़ोसी देश को कड़ा आईना दिखाया है। सिंगापुर के पूर्व डिप्लोमेट बिलहारी कौसिकन का साफ कहना है कि पाकिस्तान इस समय पूरी तरह से बर्बादी की कगार पर खड़ा है। उन्होंने बहुत ही बेबाकी से कहा कि अगर पाकिस्तान के पास परमाणु बम जैसी सैन्य ताकत नहीं होती, तो आज की तारीख में दुनिया का कोई भी देश उसकी जरा भी परवाह नहीं करता। कौसिकन ने यह तीखी टिप्पणी इंटरनेशनल रिपोर्टिंग फेलोशिप के दौरान पत्रकारों के साथ हुई एक विशेष बैठक में की है।

सेना और राजनेता ही हैं असली समस्या

पूर्व राजनयिक का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की सरकार अपनी तथाकथित कूटनीतिक कामयाबियों का ढिंढोरा पीट रही है। इस्लामाबाद अक्सर अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी और डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ अपने करीबी रिश्तों को लेकर खुद को सफल दिखाता रहा है। इसके विपरीत, जमीनी हकीकत यह है कि वहां की आम जनता भीषण गरीबी, महंगाई और कट्टरपंथ के दलदल में धंसती जा रही है। कौसिकन ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की असल समस्या उसका कोई पड़ोसी देश जैसे भारत या अफगानिस्तान नहीं है। उनके अनुसार, पाकिस्तान की इस दुर्गति के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण हैं:

  • सैन्य हस्तक्षेप: पाकिस्तान की सेना ही उसके विकास की राह में सबसे बड़ी रुकावट और मौजूदा संकट की मुख्य वजह है।
  • राजनीतिक विफलता: वहां के राजनेता देश की जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के बजाय अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में व्यस्त हैं।
  • परमाणु हथियारों की आड़: यदि पाकिस्तान परमाणु संपन्न देश न होता, तो वैश्विक मंच पर उसे कोई गंभीरता से नहीं लेता।

अमेरिका की करीबी भी नहीं बचा पाएगी पाकिस्तान को

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान पाकिस्तान द्वारा मध्यस्थता की कोशिशों पर भी पूर्व राजनयिक ने अपनी राय रखी। उन्होंने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान ने निश्चित रूप से इस कूटनीतिक मौके का तेजी से फायदा उठाया है। इससे कम से कम वॉशिंगटन के सामने उसकी कूटनीतिक छवि थोड़ी सुधरी होगी, लेकिन इस तरह की सक्रियता से पाकिस्तान के भूखे लोगों का पेट नहीं भरा जा सकता। उनका सीधा इशारा पाकिस्तान में चल रहे अत्यंत गहरे आर्थिक संकट की तरफ था, जहां बुनियादी चीजों के लिए भी हाहाकार मचा हुआ है।

गौरतलब है कि बिलहारी कौसिकन कोई साधारण विश्लेषक नहीं हैं, बल्कि वे एक बेहद अनुभवी राजनयिक रहे हैं। उन्होंने साल 2010 से 2013 तक सिंगापुर के विदेश मामलों के स्थायी सचिव के रूप में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दी थीं। इसके अलावा, उन्होंने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के एक प्रमुख स्वायत्त संस्थान, 'मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट' के चेयरमैन के तौर पर भी काम किया है।

ट्रंप प्रशासन और इस्लामाबाद के रिश्तों का सच

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के साथ इस्लामाबाद के कथित करीबी संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल पर भी कौसिकन ने बेबाक राय रखी। उन्होंने साफ कहा कि वॉशिंगटन का इस्लामाबाद को लेकर जो बुनियादी नजरिया है, उसमें कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने पाकिस्तान को 'बर्बादी की कगार पर खड़ा देश' करार देते हुए कहा कि कोई भी अस्थाई कूटनीतिक सफलता इस कड़वे सच को बदल नहीं सकती।

कौसिकन ने आगे कहा कि हालात अभी पूरी तरह से तबाह नहीं हुए हैं, जिसके लिए निश्चित रूप से शुक्रगुजार होना चाहिए, लेकिन इस कूटनीतिक कामयाबी से जमीनी हकीकत को झुठलाया नहीं जा सकता। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि अमेरिका आने वाले समय में पाकिस्तान पर लगी तमाम तरह की पाबंदियों को पूरी तरह से हटा लेगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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