इथेनॉल ब्लेंडिंग पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का बड़ा बयान, अफवाहों को खारिज करते हुए कहा- 'कमियां बताएं, हम सुधार करेंगे' भारत एक महीने पहले 55
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने को लेकर फैल रही अफवाहों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि बायोफ्यूल के इस्तेमाल से गाड़ियों के इंजन खराब होने का दावा पूरी तरह गलत है और सरकार जनता के रचनात्मक सुझावों का स्वागत करती है।

राजस्थान के जोधपुर शहर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इथेनॉल ब्लेंडिंग (पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की प्रक्रिया) को लेकर देश में चल रही चर्चाओं पर खुलकर अपनी बात रखी। केंद्रीय मंत्री ने इस प्रक्रिया को लेकर जताई जा रही चिंताओं और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों का न केवल खंडन किया, बल्कि जनता से यह अपील भी की कि यदि उन्हें इस नीति में कोई कमी नजर आती है, तो वे बेझिझक अपनी राय साझा करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार रचनात्मक आलोचना का हमेशा स्वागत करती है और सही सुझावों के आधार पर आवश्यक सुधार करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

सोशल मीडिया पर तैरती अफवाहों का मंत्री ने किया जोरदार खंडन

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर बायोफ्यूल ब्लेंडिंग को लेकर चल रही विभिन्न पोस्ट और भ्रामक जानकारियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना का अपना महत्व है और वे इसका खुले दिल से स्वागत करते हैं। उन्होंने जनता से सीधा संवाद करते हुए कहा कि यदि किसी को लगता है कि सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों में कोई खामी है, तो वे सीधे उनके सामने अपनी बात रख सकते हैं। सरकार उन सभी सुझावों को गंभीरता से सुनेगी और नीतिगत सुधारों में उन्हें शामिल करेगी।

इसके साथ ही, उन्होंने उन प्रमुख अफवाहों को पूरी तरह निराधार बताया जो पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के खिलाफ फैलाई जा रही थीं। उन्होंने विस्तार से बताया कि मुख्य रूप से दो तरह की अफवाहें लोगों के बीच भ्रम पैदा कर रही थीं। पहली अफवाह यह थी कि इथेनॉल के इस्तेमाल से ईंधन टैंक में कीड़े पैदा हो जाएंगे। दूसरी अफवाह यह फैलाई जा रही थी कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन पूरी तरह ठप हो जाएंगे, वे खराब हो जाएंगे या फिर उनके फ्यूल पंप काम करना बंद कर देंगे। केंद्रीय मंत्री ने साफ शब्दों में आश्वासन दिया कि अब तक देश में ऐसी एक भी घटना सामने नहीं आई है और भविष्य में भी ऐसा कुछ होने की कोई गुंजाइश नहीं है।

नया नहीं है इथेनॉल का यह विचार: हेनरी फोर्ड से जुड़ा इतिहास

हरदीप सिंह पुरी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की तकनीक कोई नई अवधारणा नहीं है। भारत के आम लोगों के लिए यह भले ही नया अनुभव हो सकता है, लेकिन वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक और ऑटोमोबाइल जगत के विशेषज्ञ इस तकनीक पर एक सदी से भी अधिक समय से काम कर रहे हैं। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए बताया कि विख्यात फोर्ड मोटर कंपनी के संस्थापक हेनरी फोर्ड खुद अपने समय में बायोफ्यूल, केरोसिन और फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) के विभिन्न मिश्रणों का उपयोग करके गाड़ियां चलाया करते थे।

भारत के संदर्भ में चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इस दिशा में शुरुआती कदम तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उठाए गए थे। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए ब्राजील में भारत के राजदूत के रूप में बिताए गए समय को याद किया, विशेष रूप से वर्ष 2006 और वर्ष 2008 के बीच की अवधि को। उस समय देश के कृषि मंत्री शरद पवार थे। उन्होंने बताया कि उस दौर में भारत सरकार ने देश के 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मिलाकर 5% बायोफ्यूल ब्लेंडिंग का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया था। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से उस समय हम इस लक्ष्य को पूरी तरह हासिल करने में असमर्थ रहे थे और हमारी प्रगति केवल 1.4% पर ही ठहर गई थी।

रेसिंग कारों में भी होता है इस्तेमाल, माइलेज और इंश्योरेंस की भ्रांतियां दूर कीं

शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने उन तकनीकी पहलुओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला जो इस नीति की सफलता को प्रमाणित करते हैं। माइलेज कम होने की चिंताओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह एक सर्वविदित तथ्य है कि दुनिया की सबसे तेज दौड़ने वाली रेसिंग कारों में भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन का ही इस्तेमाल किया जाता है। इसके उपयोग से गाड़ियों का एक्सेलरेशन यानी त्वरण काफी बेहतर हो जाता है और इंजन में होने वाली नॉकिंग (खटखटाहट) की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाती है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि माइलेज में थोड़ी बहुत कमी आ सकती है, लेकिन इसके पीछे केवल इथेनॉल ही नहीं, बल्कि गाड़ी चलाने के तरीके और सड़क की स्थिति जैसी कई अन्य वजहें भी जिम्मेदार होती हैं।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने यह कदम बिना सोचे-समझे नहीं उठाया है। इसके लिए SIAM और ARAI जैसी देश की शीर्ष ऑटोमोटिव और रिसर्च संस्थाओं के साथ-साथ सभी संबंधित हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) से गहन विचार-विमर्श किया गया है और व्यापक परीक्षणों के बाद ही इसे लागू किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने उन अफवाहों को भी खारिज कर दिया जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल करने पर बीमा कंपनियां गाड़ी के नुकसान का क्लेम नहीं देंगी। उन्होंने साफ किया कि बीमा कंपनियों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा कोई नियम नहीं है और बीमा कवरेज पर इसका कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

मंत्री ने सवाल उठाया कि इस तरह की झूठी अफवाहें फैलाकर आखिर किसे फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है? उन्होंने किसी पर सीधा आरोप लगाने से बचते हुए कहा कि भारत का उपभोक्ता बाजार इतना बड़ा और तेजी से बढ़ता हुआ है कि यहां सभी प्रकार की प्रौद्योगिकियों के लिए पर्याप्त जगह है। चाहे वह पूरी तरह से इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EV) हों या फिर बायोफ्यूल मिश्रित ईंधन से चलने वाली गाड़ियां, सभी के लिए यहां व्यापक अवसर मौजूद हैं। उन्होंने अंत में कहा कि वर्तमान में हम पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग के स्तर पर पहुंच चुके हैं। यदि भविष्य में हम इस सीमा को 20% से बढ़ाकर 25% करने का निर्णय लेते हैं, तो वह भी सभी आवश्यक तकनीकी मानकों और कड़े परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ही किया जाएगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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