उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में मुगल आक्रांता मोहम्मद गौरी के सेनापति शम्सुद्दीन की मजार पर प्रशासन का बुलडोजर चल गया। बुधवार-गुरुवार की मध्य रात्रि में वन विभाग की टीम ने मौके पर तीन बुलडोजर मंगवाकर इस मजार को पूरी तरह जमींदोज कर दिया। यह मजार इटावा के फिसरवन क्षेत्र में स्थित थी।
शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
इस मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने बीते जनवरी माह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी। शिकायत मिलने के बाद वन विभाग ने वन एक्ट के तहत अदालती सुनवाई की और उसके बाद मजार को ढहाने का निर्णय लिया गया। देर रात बुलडोजर लेकर खुद डीएफओ मौके पर पहुंचे और कार्रवाई को अंजाम दिया।
डीएफओ विकास नायक ने अपनी अदालत में सुनवाई के उपरांत बेदखली की कार्रवाई का आदेश दिया था। मजार के केयरटेकर फजले इलाही ने वन संरक्षक कानपुर के यहां इसके खिलाफ अपील की थी, लेकिन अपील खारिज होने के बाद मजार को ध्वस्त कर दिया गया।
हर साल लगता था उर्स का मेला
स्थानीय लोग इस मजार को बीहड़ वाले सैयद बाबा के नाम से पुकारते थे। मजार की मुख्य दीवार पर श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के लिए लिखा गया था कि यह कुदरत की शान है, यहां शेर आता है और अपनी पूंछ से इस दर पर झाड़ू लगाता है।
बिना किसी अनुमति के इस मजार पर हर साल सालाना उर्स का आयोजन किया जाता था। इसके अलावा हर गुरुवार को बड़ी संख्या में मुस्लिम तबके से जुड़े लोग यहां अकीदत पेश करने पहुंचते थे। मजार ढहाए जाने के बाद अब यह सिलसिला बंद हो जाएगा।
यह मजार इटावा सफारी पार्क के बिल्कुल करीब और केदारेश्वर महादेव मंदिर से एक किलोमीटर की दूरी पर फिशर वन में स्थापित थी।
धीरे-धीरे होता रहा निर्माण
समय के साथ बदलते स्वरूप में फिशर वन के भीतर इस मजार का निर्माण धीरे-धीरे करके अवैध रूप से कर लिया गया था। इटावा सफारी पार्क से पहले फिशर वन के पार्ट तीन में करीब एक किलोमीटर कच्चा रास्ता तय करने के बाद इस पुरानी मजार तक पहुंचा जा सकता था।
यहां न केवल मजार का निर्माण अवैध तरीके से किया गया, बल्कि एक पहाड़ीनुमा टीले पर काफी ऊंचाई तक पक्की सीढ़ियों का भी निर्माण कर दिया गया था, जो यहां आने वाले अकीदतमंदों की सहूलियत के लिए बनाई गई थीं।
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