अंदेशा सच हुआ: समंदर के रास्ते भारत पहुंची आफत, IMD की चेतावनी से करोड़ों लोगों की चिंता बढ़ी राष्ट्रीय राजनीति एक महीने पहले 29
दक्षिण-पश्चिम मानसून को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाला अल नीनो भारत में सक्रिय हो चुका है। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में यह और मजबूत हो सकता है, जिससे तापमान बढ़ने और बारिश घटने की आशंका है।

भारत के मौसम विज्ञानी जिस खतरे को लेकर लगातार आशंका जता रहे थे, अब वह हकीकत बन चुका है। दक्षिण-पश्चिम मानसून पर नकारात्मक असर डालने वाला अल नीनो देश में सक्रिय हो गया है। आने वाले कुछ दिनों में इसके और प्रबल होने के आसार जताए जा रहे हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और अर्थ सिस्टम साइंस ऑर्गेनाइजेशन (ESSO) के मौसम विशेषज्ञों ने इस बात की पुष्टि की है कि प्रशांत महासागर में सक्रिय हुआ यह परिघटना अब भारत तक अपना असर दिखा रही है।

अल नीनो आखिर है क्या

भारत में मौसम का मिजाज कई कारणों से बदलता रहता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून को प्रभावित करने वाले कारकों में अल नीनो और ला नीना बेहद अहम माने जाते हैं। प्रशांत महासागर में अल नीनो के सक्रिय होने का सीधा असर भारत के लाखों-करोड़ों लोगों पर पड़ता है, क्योंकि यह मानसून पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।

दो बड़े असर की आशंका

विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो के सक्रिय होने से दो बड़े प्रभाव सामने आ सकते हैं।

  • पहला, तापमान में वृद्धि होगी।
  • दूसरा, बारिश की तीव्रता यानी रेनफॉल में कमी आएगी।

खेती पर मंडराया संकट

भारत की कृषि अर्थव्यवस्था का अधिकांश हिस्सा आज भी मानसूनी बारिश पर ही निर्भर है। ऐसे में बरसात कम होने की स्थिति में देश के लाखों-करोड़ों लोगों का प्रभावित होना तय माना जा रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक अल नीनो के सक्रिय होने से खेतीबारी के प्रभावित होने की आशंका और बढ़ गई है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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