पारंपरिक बीए-बीएससी से अलग, यह डिग्री आपको दिलाएगी 100% जॉब रेडी स्किल करियर एक घंटा पहले 8
12वीं के बाद क्या करें, यह सवाल हर स्टूडेंट के मन में होता है। अब पारंपरिक डिग्री के बजाय बैचलर ऑफ वोकेशन यानी बीवॉक (B.Voc) एक बेहतर करियर विकल्प बनकर उभर रहा है, जो थ्योरी के बजाय प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर आधारित है।

12वीं के बाद करियर का नया रास्ता

12वीं कक्षा के नतीजे आने के बाद लाखों छात्र और उनके परिजन एक ही बड़ी दुविधा में रहते हैं कि आगे कौन सा कोर्स किया जाए। आज के दौर में बीए, बीएससी या बीकॉम जैसी पारंपरिक डिग्रियां हमेशा नौकरी की गारंटी नहीं देती हैं। इसी वजह से छात्र और अभिभावक अब ऐसे विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं जहां केवल किताबों का बोझ न हो, बल्कि वास्तविक काम सीखने का मौका भी मिले। इस नए और प्रभावी विकल्प का नाम है बैचलर ऑफ वोकेशन (B.Voc)। यह 3 साल का एक ऐसा अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम है जो किताबी ज्ञान से कहीं अधिक व्यावहारिक कौशल यानी स्किल सिखाने पर ध्यान केंद्रित करता है।

बीवॉक डिग्री क्या है और इसका महत्व

शिक्षा और वेलनेस क्षेत्र के विशेषज्ञ संस्थान क्षेमवन (SDM इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज) के चीफ वेलनेस ऑफिसर डॉ. नरेंद्र के शेट्टी का कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के लागू होने के बाद से स्किल-बेस्ड कोर्सेज का महत्व काफी बढ़ गया है। क्षेमवन में टीडीयू (ट्रांस-डिसिप्लिनरी हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी) से मान्यता प्राप्त बीवॉक प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जो छात्र अपनी ग्रेजुएशन पूरी होते ही इंडस्ट्री के लिए तैयार होना चाहते हैं, उनके लिए यह डिग्री किसी गेम-चेंजर से कम नहीं है। यह कोर्स यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा मान्यता प्राप्त है और 12वीं पास कोई भी छात्र किसी भी स्ट्रीम से इसमें प्रवेश ले सकता है।

प्रैक्टिकल और थ्योरी का तालमेल

बीए या बीएससी जैसे पारंपरिक कोर्सों के मुकाबले बीवॉक का पाठ्यक्रम पूरी तरह से अलग है। इसमें 60 से 70 प्रतिशत जोर प्रैक्टिकल, ऑन-जॉब ट्रेनिंग और इंटर्नशिप पर दिया जाता है। छात्र अपनी पढ़ाई का केवल 30 से 40 प्रतिशत समय ही थ्योरी कक्षाओं में बिताते हैं। इस कोर्स के माध्यम से छात्रों को उद्योग जगत की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जाता है। क्षेमवन जैसे संस्थान बीवॉक के तहत मुख्य रूप से दो विशेष पाठ्यक्रम संचालित करते हैं:

  • पंचकर्म और नेचुरोपैथी थेरेपी: इसमें छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं दिया जाता, बल्कि विशेषज्ञों की निगरानी में योग, थेरेपी, ब्यूटी केयर और लाइफस्टाइल मैनेजमेंट का लाइव क्लिनिकल अनुभव प्राप्त होता है।
  • हॉस्पिटैलिटी एंड वेलनेस: इसमें वेलनेस टूरिज्म के साथ-साथ गेस्ट रिलेशंस, फ्रंट ऑफिस और फूड एंड बेवरेज सर्विस का रियल-टाइम अनुभव मिलता है। इन कौशलों की मांग भारत के साथ-साथ विदेशों में भी बहुत अधिक है।

मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का फायदा

इस डिग्री की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लचीली प्रकृति है। यदि कोई विद्यार्थी किसी कारणवश 3 साल का पूरा कोर्स करने में असमर्थ रहता है, तो भी उसकी शिक्षा बेकार नहीं जाती। इसमें मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का विकल्प उपलब्ध है:

  • 1 साल पूरा होने पर: छात्र को डिप्लोमा सर्टिफिकेट मिलता है।
  • 2 साल पूरा होने पर: छात्र को एडवांस डिप्लोमा दिया जाता है।
  • 3 साल पूरा होने पर: पूरी बीवॉक डिग्री (B.Voc Degree) प्रदान की जाती है।

करियर और नौकरी की अपार संभावनाएं

बीवॉक पास करने वाले युवाओं के लिए करियर के कई रास्ते खुले हैं। पंचकर्म और नेचुरोपैथी में प्रशिक्षित छात्र बड़े नेचुरोपैथी हॉस्पिटल, रिजॉर्ट, स्पा और वेलनेस सेंटर्स में कार्य कर सकते हैं। वे स्वयं का वेलनेस एंटरप्रेन्योर बनकर भी अपना काम शुरू कर सकते हैं। इसी प्रकार, हॉस्पिटैलिटी में ग्रेजुएट होने वाले छात्र होटल, रेस्तरां, एविएशन सेक्टर, इवेंट मैनेजमेंट और हॉस्पिटल हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में बेहतर वेतन पर नौकरियां पा सकते हैं।

अभिभावकों के लिए विशेष सलाह

यदि आप चाहते हैं कि आपका बच्चा किसी विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करे और पढ़ाई खत्म होते ही उसे नौकरी मिले, तो बीवॉक एक शानदार विकल्प है। हालांकि, किसी भी संस्थान में दाखिला लेने से पहले अभिभावकों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वह कॉलेज या यूनिवर्सिटी UGC से मान्यता प्राप्त हो। साथ ही, संस्थान के पास ट्रेनिंग के लिए बेहतर इंडस्ट्री पार्टनरशिप होनी चाहिए ताकि छात्रों को सही इंटर्नशिप और प्लेसमेंट के अवसर मिल सकें।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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