शिक्षक दिवस विशेष: दिल्ली के ये शिक्षक बदल रहे हैं छात्रों का भाग्य, शून्य से शिखर तक का सफर करियर 2 घंटे पहले 7
शिक्षक दिवस के अवसर पर आज हम आपको दिल्ली के उन प्रेरणादायक शिक्षकों से मिलवा रहे हैं, जिन्होंने स्वयं कठिन संघर्षों को पार कर आज हजारों युवाओं के भविष्य को संवारने का बीड़ा उठाया है।

शिक्षा जगत के ये नायक बदल रहे हैं युवाओं की तकदीर

हर साल 5 सितंबर को पूरा देश शिक्षक दिवस के रूप में मनाता है, जो हमारे गुरुओं के प्रति सम्मान प्रकट करने का दिन है। इस खास अवसर पर, आज हम दिल्ली के ऐसे असाधारण शिक्षकों पर प्रकाश डालेंगे, जिन्होंने अपनी मेहनत और दूरदृष्टि से शिक्षा के क्षेत्र में नई क्रांति ला दी है। इन शिक्षकों की कहानियां केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये एक ऐसे संघर्ष की गाथा हैं जो किसी भी छात्र को प्रेरित करने के लिए काफी है। कोई सड़क पर पोस्टर चिपकाकर आईईएस (IES) बना, तो किसी ने अपनी मोटी सैलरी छोड़कर शिक्षा के क्षेत्र में स्टार्टअप की शुरुआत की।

मनोज गर्ग: दिल्ली के खान सर

दिल्ली के शैक्षिक परिदृश्य में मनोज गर्ग का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में औपचारिक प्रोफेसर न होने के बावजूद दिल्ली के छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र अपने नियमित प्राध्यापकों से कहीं अधिक मनोज गर्ग के नाम और उनके पढ़ाने के अंदाज से परिचित हैं। छात्रों में उनकी लोकप्रियता का आलम यह है कि वे ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यमों से भी उनसे जुड़ना पसंद करते हैं। उन्हें अक्सर 'दिल्ली का खान सर' कहकर संबोधित किया जाता है, जो उनके पढ़ाने के प्रभावशाली तरीके को दर्शाता है।

जुगल चौहान: डिजिटल युग के गुरु

आज के दौर में जब हर तरफ तकनीकी कौशल की मांग बढ़ रही है, जुगल चौहान अपने प्लेटफॉर्म 'कोर्स अनबॉक्स' के जरिए युवाओं को डिजिटल क्षेत्र में एक्सपर्ट बनाने का काम कर रहे हैं। वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस जैसे आधुनिक कोर्स सिखाते हैं। यह उन छात्रों के लिए एक बड़ा सहारा है जो आईआईटी और नीट की दौड़ में सफल नहीं हो पाए। जुगल चौहान की सफलता की कहानी यह है कि उन्होंने 20 लाख रुपये के वार्षिक पैकेज वाली एक शानदार नौकरी को अलविदा कहकर अपना स्टार्टअप शुरू किया। आज उनके पढ़ाए हुए छात्र गूगल और मेटा जैसी दिग्गज कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

विनोद कुमार यादव: शिक्षा का मसीहा

विनोद कुमार यादव की कहानी एक स्कूटर की दुकान से शुरू होती है। काम के दौरान उन्होंने एक आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे को पैसों की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ते देखा, जिसने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला। उस पल को उन्होंने अपने जीवन का टर्निंग पॉइंट बनाया और संकल्प लिया कि अब कोई भी बच्चा गरीबी की वजह से शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। आज वे अपना स्कूल चलाते हैं जहाँ दर्जनों जरूरतमंद बच्चों को न केवल मुफ्त शिक्षा दी जाती है, बल्कि किताबें और कॉपियां भी मुहैया कराई जाती हैं। इसके साथ ही, वे दिल्ली के विभिन्न मंदिरों और गुरुद्वारों के साथ मिलकर समाज सेवा का दायरा भी बढ़ा रहे हैं।

बी. सिंह: पोस्टर चिपकाने से आईएएस फैक्ट्री तक

देश के प्रतिष्ठित आईएएस कोचिंग संस्थानों में शुमार 'नेक्स्ट आईएएस' के प्रमुख बी. सिंह का सफर बेहद प्रेरणादायी है। कभी कड़ाके की ठंड में दिल्ली की सड़कों पर पोस्टर चिपकाने वाले बी. सिंह ने खेती-किसानी और हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के बावजूद आईईएस (IES) जैसी कठिन परीक्षा में टॉप रैंक हासिल की थी। आज वे 'आईएएस फैक्ट्री' के नाम से मशहूर अपने संस्थान का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके द्वारा दी गई टिप्स से देश भर के छात्र लगातार आईएएस और आईपीएस बनने का सपना पूरा कर रहे हैं।

आशीष शर्मा: आईआईटी जेईई के विशेषज्ञ

आशीष शर्मा का व्यक्तित्व भले ही शांत हो, लेकिन शिक्षण और एकेडमिक्स में उनका स्तर काफी ऊंचा है। आईआईटी रुड़की से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले आशीष शर्मा के पास भी मोटी तनख्वाह वाली नौकरियों के ढेरों विकल्प थे, लेकिन उन्होंने शिक्षण को अपना पेशा चुना। आज वे आईआईटी और जेईई की कठिन परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले शिक्षकों में एक बड़ा नाम बन चुके हैं। उनकी पढ़ाने की शैली छात्रों के बीच काफी सराही जाती है।

हरप्रीत सिंह: नीट परीक्षाओं के लिए भरोसेमंद चेहरा

जब भी नीट (NEET) परीक्षा की बात आती है, तो हरप्रीत सिंह का नाम सबसे ऊपर आता है। दिल्ली की एक प्रमुख कोचिंग संस्था में कार्यरत हरप्रीत सिंह न केवल परीक्षा की तैयारी करवाते हैं, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों को समय-समय पर मार्गदर्शन और टिप्स भी देते हैं। परीक्षा के परिणामों के विश्लेषण से लेकर तैयारी की रणनीति तक, हरप्रीत सिंह का चेहरा छात्रों के लिए भरोसे का प्रतीक बन चुका है। उनके मार्गदर्शन में छात्र नीट की परीक्षा में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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