सुकमा में भ्रष्टाचार का खेल: 16 लाख के एरियर के बदले रिश्वत मांगते पकड़ा गया शिक्षा अधिकारी छत्तीसगढ़ 3 घंटे पहले 6
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में एसीबी ने कोंटा के खंड शिक्षा अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी ने महिला कर्मचारी का बकाया भुगतान करने के एवज में 10 हजार रुपये की घूस ली थी।

भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी की बड़ी कार्रवाई

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से भ्रष्टाचार का एक मामला सामने आया है, जहां भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी ने एक सरकारी अधिकारी को रिश्वत लेते हुए धर दबोचा। यह कार्रवाई कोंटा स्थित खंड शिक्षा कार्यालय में की गई है। आरोपी अधिकारी की पहचान चंद्र कुमार यारदा के तौर पर हुई है, जो सुकमा के कोंटा ब्लॉक में खंड शिक्षा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। एसीबी की इस छापेमारी के बाद से पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

महिला कर्मचारी के एरियर का था मामला

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब सुकमा के मिसमा गांव निवासी कवासी मंगल राम ने जगदलपुर स्थित एसीबी कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। मंगल राम की पत्नी, कवासी सुशीला, डूब्बाटोटा स्थित कन्या आश्रम में अधीक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। कन्या आश्रम सरकार द्वारा संचालित एक आवासीय विद्यालय है। शिकायत के अनुसार, कवासी सुशीला के वेतन निर्धारण के बाद उन्हें करीब 16 लाख रुपये की बड़ी राशि बकाया एरियर के रूप में मिलनी थी। इसी सरकारी भुगतान को प्रक्रिया में लाने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी चंद्र कुमार यारदा ने कमीशन की मांग शुरू कर दी थी।

कुल राशि का 5 प्रतिशत मांगा घूस

पीड़ित पति का आरोप है कि जब उन्होंने अपने बकाया भुगतान के सिलसिले में खंड शिक्षा अधिकारी से मुलाकात की, तो यारदा ने नियमों को ताक पर रखते हुए घूस की मांग की। आरोपी अधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि 16 लाख रुपये का भुगतान कराने के लिए उन्हें कुल एरियर राशि का 5 प्रतिशत कमीशन देना होगा। इस हिसाब से रिश्वत की कुल रकम लगभग 80 हजार रुपये तय हुई थी। इतनी बड़ी रकम रिश्वत के रूप में मांगे जाने के बाद मंगल राम ने बिना देरी किए एसीबी से संपर्क किया और आरोपी के खिलाफ लिखित शिकायत दी।

जाल बिछाकर रंगे हाथ पकड़ा

शिकायत मिलते ही एसीबी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए सत्यापन किया। सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान यह साफ हो गया कि आरोपी अधिकारी घूस लेने का आदी है और उसने पैसे की पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये की मांग की थी। एसीबी के अधिकारियों ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। बुधवार को जब शिकायतकर्ता कवासी मंगल राम ने जैसे ही आरोपी चंद्र कुमार यारदा को 10 हजार रुपये की रिश्वत की रकम थमाई, तभी वहां मौजूद एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

गिरफ्तारी के बाद एसीबी की टीम ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर आगे की विवेचना जारी रहेगी। इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए एसीबी पूरी तरह से मुस्तैद है। गौरतलब है कि सुकमा जिले में इससे पहले भी एक लिपिक को इसी तरह रिश्वतखोरी के आरोप में एसीबी ने गिरफ्तार किया था। इस ताज़ा घटना के बाद अब विभाग के अन्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं और आम जनता में भ्रष्टाचार के प्रति नाराजगी देखी जा रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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