सपनों का टूटना या मजबूरी: नीट की स्टेट टॉपर बेटियां कैसे बन गईं सॉल्वर गैंग की मोहरे? करियर 2 महीने पहले 80
नीट परीक्षा में पकड़े गए अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग में दो मेधावी छात्राओं के नाम सामने आए हैं, जो खुद स्टेट टॉपर रह चुकी हैं। इस मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर होनहार छात्र आर्थिक तंगी और दबाव के कारण इस गलत रास्ते पर क्यों उतर रहे हैं।

नीट सॉल्वर गैंग और मेधावी छात्राओं की गिरफ्तारी

नीट यूजी री-टेस्ट 2026 के दौरान बिहार के लखीसराय में एक बड़े अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले में पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें कोई सामान्य अपराधी नहीं बल्कि मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों के होनहार छात्र शामिल हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गिरोह में झारखंड की स्टेट टॉपर पूनम कुमारी और पलामू की जिला टॉपर चंचल कुमारी जैसी छात्राएं डमी कैंडिडेट बनकर दूसरों के नाम पर परीक्षा दे रही थीं।

कैसे एक टॉपर बन गई सॉल्वर?

पूनम कुमारी साल 2021 में झारखंड की 12वीं साइंस टॉपर रही थी। उसके पिता उसे वाराणसी स्थित बीएचयू में बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कराने के लिए हर महीने 7,000 रुपये भेजते थे। हालांकि, तीन बार नीट में असफलता और पढ़ाई के बढ़ते खर्च के दबाव में आकर उसने शॉर्टकट का रास्ता अपनाया। वहीं, 2016 की जिला टॉपर चंचल कुमारी, जो फिलहाल ओडिशा में बीएएमएस अंतिम वर्ष की छात्रा है, वह नंदनी राज नाम की छात्रा की जगह परीक्षा में बैठी थी। चंद रुपयों के लालच ने इन मेधावी छात्राओं के भविष्य को दांव पर लगा दिया है।

कैसे काम करता है यह गिरोह?

लखीसराय की एसपी प्रेरणा कुमार के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा केवल पेपर हल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश है:

  • फर्जी पहचान पत्र: डमी उम्मीदवारों के लिए आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों में छेड़छाड़ की जाती है।
  • बायोमेट्रिक में सेंध: इस पूरे रैकेट में 18 बायोमेट्रिक कर्मियों को गिरफ्तार किया गया है, जो उंगलियों के निशान के वेरिफिकेशन में धांधली करते थे।
  • अंतरराज्यीय नेटवर्क: इस सिंडिकेट के तार दिल्ली, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे 5 राज्यों तक फैले हुए हैं।

टूटते सपने और सामाजिक दंश

इस पूरी घटना ने न केवल परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि परिवारों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है। पूनम के पिता बालेश्वर प्रसाद राणा का कहना है कि उनकी बेटी ने पूरे परिवार की प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिला दिया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कोचिंग की भारी फीस और मेडिकल शिक्षा का अत्यधिक खर्च कई छात्रों को इस तरह के खतरनाक जाल में धकेल देता है, जहाँ मास्टरमाइंड मेधावी छात्रों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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