जमुई का यह अनोखा सरकारी स्कूल दे रहा है बड़े-बड़े प्राइवेट स्कूलों को मात, सुविधाएं और बच्चों की उपस्थिति देखकर रह जाएंगे हैरान करियर 4 घंटे पहले 6
बिहार के जमुई जिले में स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय दिघौत अपनी बेहतरीन शिक्षा व्यवस्था, विशेष चेतना सत्र और मात्र 1.5 प्रतिशत ड्रॉपआउट दर के कारण क्षेत्र में मिसाल पेश कर रहा है।

बिहार में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर अक्सर कई तरह की नकारात्मक बातें सुनने को मिलती हैं, लेकिन जमुई जिले में एक ऐसा सरकारी स्कूल भी है जो इस पूरी धारणा को बदल रहा है। अगर आप सोचते हैं कि बेहतर शिक्षा, अनुशासन और सुविधाएं केवल महंगे प्राइवेट स्कूलों में ही मिल सकती हैं, तो आपको जमुई के इस विद्यालय के बारे में जरूर जानना चाहिए। सुदूर ग्रामीण इलाके में स्थित होने के बावजूद इस स्कूल का प्रबंधन और यहां दी जाने वाली शिक्षा बड़े-बड़े नामी निजी स्कूलों को पीछे छोड़ रही है। इस शानदार शिक्षण संस्थान का नाम उत्क्रमित मध्य विद्यालय दिघौत है।

ग्रामीण इलाके में शिक्षा की नई अलख जगाता 'दिघौत' स्कूल

यह बेहतरीन सरकारी विद्यालय जमुई जिले के इस्लामनगर अलीगंज प्रखंड के अंतर्गत आने वाले एक छोटे और ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है। आमतौर पर ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों को लेकर लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं होती हैं, लेकिन इस स्कूल ने अपनी कड़ी मेहनत और बेहतरीन व्यवस्था से इन सभी शंकाओं को दूर कर दिया है। यहां की अनुशासित और व्यवस्थित शिक्षा प्रणाली को देखकर हर कोई आश्चर्यचकित रह जाता है। इस स्कूल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पढ़ने वाले बच्चे किसी भी मामले में शहर के बड़े स्कूलों के बच्चों से कम नहीं हैं।

नामांकन और उपस्थिति के मामले में रचा इतिहास

इस सरकारी स्कूल में शिक्षा के प्रति बच्चों का लगाव साफ देखा जा सकता है। विद्यालय के प्रधानाचार्य अभिषेक कुमार के अनुसार, इस स्कूल में कक्षा एक से लेकर कक्षा 8 तक के बच्चों को शिक्षा दी जाती है। वर्तमान में स्कूल की स्थिति और आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • विद्यालय में कुल नामांकित छात्र-छात्राओं की संख्या 553 है।
  • स्कूल में बच्चों की दैनिक उपस्थिति 85 से 90 प्रतिशत तक रहती है।
  • विद्यालय में शिक्षण कार्य के लिए कुल 9 शिक्षक पदस्थापित हैं, जिनमें 7 शिक्षक और 2 शिक्षिकाएं शामिल हैं।
  • बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार करने के लिए 5 रसोइयों की नियुक्ति की गई है।

प्रधानाचार्य बताते हैं कि बच्चों की इतनी अधिक उपस्थिति के पीछे शिक्षकों का कोई दबाव नहीं होता, बल्कि स्कूल का माहौल और वहां की व्यवस्था इतनी आकर्षक है कि बच्चे खुद-ब-खुद हर दिन स्कूल आने के लिए लालायित रहते हैं। सुबह 9:00 बजे जैसे ही स्कूल की घंटी बजती है, पूरा परिसर बच्चों की ऊर्जा से सराबोर हो जाता है।

'चेतना सत्र' है इस स्कूल की असली ताकत

इस विद्यालय की सबसे अनूठी और आकर्षक विशेषता यहां आयोजित होने वाला चेतना सत्र है। हर सुबह स्कूल शुरू होने के साथ ही यह विशेष सत्र आयोजित किया जाता है, जो सामान्य प्रार्थना सभाओं से बिल्कुल अलग होता है। इसके लिए शिक्षक और बच्चे मिलकर बेहद खास तैयारी करते हैं।

इस चेतना सत्र की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • 15 मिनट का विशेष सत्र: प्रतिदिन बच्चों को उनके नियमित पाठ्यक्रम से हटकर कुछ नया और उपयोगी सिखाया जाता है, जो उनके सामान्य ज्ञान को बढ़ाता है।
  • बेहतरीन पूर्व-नियोजन: चेतना सत्र में क्या सिखाया जाएगा, इसकी तैयारी एक दिन पहले ही पूरी प्लानिंग के साथ कर ली जाती है ताकि अगले दिन सुचारू रूप से कार्यक्रम आयोजित हो सके।
  • सामान्य ज्ञान और इतिहास पर जोर: हर दिन के चेतना सत्र को उस तारीख के ऐतिहासिक महत्व से जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि सत्र 5 सितंबर का है, तो बच्चों को देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन और शिक्षक दिवस के महत्व के बारे में विस्तार से बताया जाता है। इसी तरह हर दिन के इतिहास से बच्चों को रूबरू कराया जाता है।
  • शारीरिक और मानसिक विकास: इस सत्र के दौरान बच्चों को नियमित रूप से योग कराया जाता है, जिससे वे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें।
  • नैतिक शिक्षा और अनुशासन: बच्चों को देश के महान महापुरुषों के विचार और उनकी जीवनियां सुनाई जाती हैं ताकि वे अपने जीवन में अनुशासन और नैतिक मूल्यों को अपना सकें।

इसके अलावा, चेतना सत्र के दौरान बच्चों के खड़े होने का तरीका और उनकी कतारबद्ध व्यवस्था भी इतनी उत्कृष्ट होती है कि इसे देखकर लोग दंग रह जाते हैं।

पीएम श्री योजना में शामिल और न्यूनतम ड्रॉपआउट दर

इस सरकारी स्कूल की बेहतरीन व्यवस्था और लगातार मिल रही सफलताओं को देखते हुए इसे केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम श्री योजना में भी शामिल किया गया है, जो इस स्कूल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

जहां आज पूरे बिहार में माध्यमिक स्तर पर बच्चों के बीच स्कूल छोड़ने (ड्रॉपआउट) की दर एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं दिघौत के इस स्कूल ने इस मामले में भी एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस स्कूल में ड्रॉपआउट की दर मात्र 1.5 प्रतिशत है। इसका सीधा मतलब यह है कि जो भी बच्चा इस स्कूल में प्राथमिक शिक्षा के लिए दाखिला लेता है, वह अपनी शिक्षा पूरी किए बिना स्कूल नहीं छोड़ता। इस सफलता के पीछे स्कूल के शिक्षकों की लगन के साथ-साथ स्थानीय अभिभावकों का भी पूरा सहयोग रहता है।

सालों की मेहनत से बदला स्कूल का स्वरूप

ऐसा नहीं है कि यह स्कूल हमेशा से ही इतना भव्य और अनुशासित था। कुछ साल पहले तक यहां भी अन्य सामान्य सरकारी स्कूलों जैसी ही स्थिति थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां के शिक्षकों, ग्रामीणों, अभिभावकों और खुद बच्चों के सामूहिक प्रयासों ने इस स्कूल की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल दी है। सभी के अटूट समन्वय और कड़ी मेहनत की बदौलत आज यह स्कूल बिहार के गिने-चुने सबसे बेहतरीन और आदर्श विद्यालयों की सूची में अपनी जगह बना चुका है। अब ग्रामीणों को अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए महंगे प्राइवेट स्कूलों में भारी-भरकम फीस चुकाने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि उनके अपने गांव का यह सरकारी स्कूल ही उन्हें बेहतरीन शिक्षा और संस्कार प्रदान कर रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप