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8 घंटे पहले
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विचारों
भारत में इंजीनियरिंग की चर्चा होते ही ज्यादातर लोगों के मन में सबसे पहले आईआईटी का नाम आता है। लेकिन देश में एक ऐसा संस्थान भी है जो रैंकिंग, रिसर्च और प्लेसमेंट के मामले में कई नामी आईआईटी से भी आगे निकल जाता है। यह संस्थान है बेंगलुरु में स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान यानी आईआईएससी, जिसे विज्ञान, शोध और एडवांस इंजीनियरिंग का सबसे प्रतिष्ठित केंद्र माना जाता है। जो छात्र किसी आम नौकरी के बजाय वैज्ञानिक बनने का सपना देखते हैं, उनके लिए यह संस्थान किसी सपनों की दुनिया से कम नहीं है।
छात्रों के मन में अक्सर कई सवाल रहते हैं — क्या यह सरकारी संस्थान है या प्राइवेट, क्या यहां केवल पीएचडी करने वाले ही पढ़ सकते हैं या 12वीं के बाद भी प्रवेश मिलता है, और इस उच्च स्तरीय संस्थान में दाखिले की पूरी प्रक्रिया क्या है। हरे-भरे विशाल कैंपस में फैले इस संस्थान का इतिहास देश की आजादी से भी पुराना है। इसकी नींव महान उद्योगपति जमशेदजी टाटा और मैसूर के महाराजा के सहयोग से रखी गई थी।
आईआईएससी सरकारी है या प्राइवेट?
आईआईएससी बेंगलुरु पूरी तरह से एक सार्वजनिक यानी सरकारी मानद विश्वविद्यालय (डीम्ड पब्लिक रिसर्च यूनिवर्सिटी) है। यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करता है और इसे इंस्टीट्यूट ऑफ एमीनेंस का दर्जा भी मिला हुआ है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इसे सरकार की ओर से शोध और नए आविष्कारों के लिए भारी-भरकम फंड के साथ-साथ पूरी स्वायत्तता भी हासिल है।
रैंकिंग में बड़े आईआईटी भी पीछे
रैंकिंग के मामले में आईआईएससी का दबदबा पूरी दुनिया में देखा जाता है।
- एनआईआरएफ रैंकिंग: भारत सरकार की एनआईआरएफ रैंकिंग में आईआईएससी बेंगलुरु लगातार कई वर्षों से 'यूनिवर्सिटी कैटेगरी' और 'रिसर्च कैटेगरी' दोनों में नंबर-1 के स्थान पर बना हुआ है।
- ग्लोबल रैंकिंग: क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग की बात करें तो रिसर्च और प्रति फैकल्टी साइटेशन के मामले में आईआईएससी की गिनती दुनिया के टॉप संस्थानों में होती है।
आईआईएससी में कौन-कौन से कोर्स हैं?
शुरुआत में आईआईएससी को केवल पोस्ट-ग्रेजुएट और शोध के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यहां अंडरग्रेजुएट कोर्स भी काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। मुख्य रूप से यहां तीन स्तरों पर पढ़ाई होती है।
- अंडरग्रेजुएट (UG): 12वीं के बाद छात्र 4 साल के बैचलर ऑफ साइंस (रिसर्च) कोर्स या 4 साल के बीटेक इन मैथमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग में दाखिला ले सकते हैं।
- पोस्ट-ग्रेजुएट (PG): इसमें एमटेक, M.Des (डिजाइन) और मास्टर ऑफ मैनेजमेंट जैसे प्रोफेशनल कोर्स शामिल हैं।
- रिसर्च (PhD/Integrated PhD): विज्ञान और इंजीनियरिंग के अलग-अलग विषयों में वर्ल्ड-क्लास रिसर्च और पीएचडी प्रोग्राम उपलब्ध हैं।
दाखिला कैसे मिलता है?
आईआईएससी में प्रवेश के लिए कोई अलग प्रवेश परीक्षा नहीं होती, बल्कि यह देश की सबसे कठिन राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के स्कोर को स्वीकार करता है।
- 12वीं के बाद (बीएससी रिसर्च/बीटेक): इसके लिए जेईई मेन, जेईई एडवांस्ड या नीट यूजी परीक्षा में बहुत ऊंची रैंक हासिल करनी होती है। बीटेक (मैथ्स एंड कंप्यूटिंग) के लिए सिर्फ जेईई एडवांस्ड का स्कोर ही मान्य होता है।
- एमटेक/पीजी के लिए: छात्रों को गेट (ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग) या CEED (डिजाइन के लिए) परीक्षा पास करनी होती है।
- पीएचडी के लिए: CSIR-NET, यूजीसी नेट या गेट परीक्षा क्वॉलिफाई करने के बाद एक कठिन इंटरव्यू भी पास करना होता है।
आईआईएससी की फीस कितनी है?
सरकारी संस्थान होने के कारण यहां की फीस प्राइवेट कॉलेजों की तुलना में बेहद कम है।
- बीएससी (रिसर्च)/बीटेक: इसकी सालाना ट्यूशन फीस लगभग 30,000 से 50,000 रुपये के बीच होती है (हॉस्टल और अन्य चार्ज मिलाकर इसमें थोड़ा बदलाव संभव है)।
- एमटेक/पीएचडी: इसकी सालाना फीस भी लगभग 35,000 से 40,000 रुपये के आसपास रहती है।
- स्कॉलरशिप से राहत: यहां पढ़ने वाले लगभग हर रिसर्च और एमटेक छात्र को सरकार की ओर से हर महीने अच्छी-खासी स्टाइपेंड/स्कॉलरशिप (12,400 से लेकर 37,000+ रुपये प्रति माह तक) मिलती है, जिससे पढ़ाई का खर्च अपने-आप निकल जाता है।
प्लेसमेंट का हाल कैसा है?
आईआईएससी के छात्रों की मांग पूरी दुनिया में है। भले ही यह एक रिसर्च संस्थान है, लेकिन इसका प्लेसमेंट सेल (OCCaP) दिग्गज कंपनियों को कैंपस में आमंत्रित करता है।
- औसत पैकेज: एमटेक और बीटेक के छात्रों का औसत पैकेज सालाना 20 लाख से 30 लाख रुपये के बीच रहता है। मैनेजमेंट कोर्स के लिए भी यह पैकेज शानदार होता है।
- हाईएस्ट पैकेज: अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की ओर से यहां के छात्रों को 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये सालाना तक के ऑफर भी मिलते हैं।
गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एमेजॉन, एपल और इसरो जैसी बड़ी संस्थाएं आईआईएससी से सीधे हायरिंग करती हैं।
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