विदेश में पढ़ाई के बदले तौर-तरीके, डिग्री के बजाय अब इन 3 बड़े बदलावों पर दांव लगा रहे हैं भारतीय छात्र करियर एक घंटा पहले 5
आईडीपी एजुकेशन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, विदेश जाकर पढ़ने की चाह रखने वाले भारतीय छात्रों की प्राथमिकताएं बदल गई हैं और अब वे डिग्री से ज्यादा करियर सुरक्षा और भविष्य की तकनीकों पर जोर दे रहे हैं।

विदेश में पढ़ाई के बदलते चलन

अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य भविष्य में विदेश जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने की योजना बना रहा है, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इंटरनेशनल एजुकेशन सर्विस प्रोवाइडर और IELTS के को-ओनर IDP एजुकेशन ने अपनी नवीनतम इमर्जिंग फ्यूचर्स रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय छात्र अब केवल विदेश जाने के आकर्षण में किसी भी देश को नहीं चुन रहे हैं। छात्रों की सोच में एक बड़ा और व्यावहारिक बदलाव देखा गया है। इस सर्वे में दुनिया भर के 106 देशों के 4,800 से अधिक छात्रों को शामिल किया गया था, जिसमें सबसे बड़ी संख्या 994 छात्रों की हिस्सेदारी भारत से रही। रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि भारतीय युवा अब डिग्री के पीछे भागने के बजाय भविष्य की जरूरतों के अनुसार फैसले ले रहे हैं।

डिग्री से ज्यादा करियर की सुरक्षा पर ध्यान

आमतौर पर वैश्विक स्तर पर 23% छात्र विदेश में पढ़ाई का निर्णय लेते समय वहां के जीवन-यापन के खर्च को सबसे अधिक महत्व देते हैं, लेकिन भारतीय छात्रों का दृष्टिकोण थोड़ा अलग है। रिपोर्ट के अनुसार, 22% भारतीय छात्रों के लिए सबसे बड़ा कारक यह है कि पढ़ाई समाप्त होने के बाद वहां पोस्ट-स्टडी वर्क अपॉर्चुनिटी यानी काम करने के कितने अवसर मौजूद हैं। भारतीय छात्र इस बात को अच्छी तरह समझ रहे हैं कि केवल विदेशी डिग्री ही सब कुछ नहीं है। उनका पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि पढ़ाई के बाद उनके करियर का ग्राफ किस दिशा में आगे बढ़ेगा और उन्हें वहां नौकरी मिलने की कितनी संभावना है।

AI और तकनीकी कौशल के प्रति गहरी रुचि

मौजूदा तकनीकी दौर में भारतीय छात्र अपनी भविष्य की संभावनाओं को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं। इस सर्वे में शामिल 47% भारतीय छात्रों ने स्पष्ट रूप से माना कि आने वाले समय में नौकरियों में सफलता हासिल करने के लिए AI और आधुनिक तकनीकी कौशल का होना अनिवार्य है। दिलचस्प बात यह है कि यह आंकड़ा वैश्विक औसत यानी 42% से काफी ज्यादा है। इसका अर्थ यह है कि भारतीय छात्र उन देशों और विश्वविद्यालयों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो उन्हें अत्याधुनिक तकनीक और AI-रेडी स्किल्स में पारंगत बना सकें। वे अपने कौशल को भविष्य के लिए तैयार रखने की दिशा में काफी गंभीर हैं।

वीजा और इमिग्रेशन नियमों के कारण विकल्पों का विस्तार

वर्तमान में कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में वीजा नियमों और इमिग्रेशन पॉलिसीज में जिस तरह के लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं, उसने छात्रों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। इस अनिश्चितता से बचने के लिए भारतीय छात्रों ने एक स्मार्ट रणनीति अपनाई है। अब वे किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय कई देशों के विकल्पों को साथ लेकर चल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 74% संभावित भारतीय छात्र अब एक साथ कई मल्टीपल स्टडी डेस्टिनेशन यानी पढ़ने के देशों के विकल्प तलाश रहे हैं। इससे उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी एक देश के नियमों में सख्ती आती है, तो उनके करियर का साल खराब न हो और उनके पास अन्य सुरक्षित विकल्प हमेशा मौजूद रहें। यह परिपक्वता और व्यावहारिक दृष्टिकोण भारतीय युवाओं की बदलती प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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