करियर
5 घंटे पहले
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विचारों
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही देश भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में नए छात्रों का आगमन शुरू हो चुका है। कॉलेज जीवन की दहलीज पर कदम रखना हर छात्र के लिए एक बेहद रोमांचक और सुनहरे भविष्य की शुरुआत जैसा होता है। नए दोस्त बनाना, नए माहौल में ढलना और अपने सपनों को उड़ान देना, हर युवा का यही अरमान होता है। लेकिन इस उत्साह के बीच कई बार नए छात्रों के मन में एक अनजाना डर भी छिपा होता है। यह डर होता है सीनियर्स द्वारा 'इंट्रोडक्शन' यानी परिचय के नाम पर की जाने वाली बदसलूकी का। अक्सर छात्र समझ नहीं पाते कि सामान्य बातचीत कब प्रताड़ना में बदल गई।
बहुत से छात्रों के मन में यह गलत धारणा होती है कि जब तक उनके साथ मारपीट या कोई बड़ी शारीरिक हिंसा न हो, तब तक उसे रैगिंग की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। लेकिन नियम बिल्कुल अलग हैं। नियमों के मुताबिक, किसी भी नवप्रवेशित छात्र को मानसिक रूप से परेशान करना, उसे नीचा दिखाना या उसकी मर्जी के बिना कोई भी काम करने के लिए मजबूर करना पूरी तरह से रैगिंग के दायरे में आता है। यहाँ तक कि किसी छात्र को जबरन या अजीब तरीके से नमस्ते करने के लिए मजबूर करना भी इसी अपराध का हिस्सा है।
मानसिक और मौखिक रूप से दबाव बनाना
रैगिंग का सबसे आम रूप मानसिक और मौखिक प्रताड़ना के रूप में सामने आता है। कई बार सीनियर्स इसे महज एक मजाक का नाम देते हैं, लेकिन पीड़ित छात्र के लिए यह मानसिक आघात बन जाता है। इसमें निम्नलिखित हरकतें शामिल हैं:
- छात्रों को उनकी इच्छा के विरुद्ध सबके सामने अजीबोगरीब ढंग से नाचने या अश्लील गाने गाने के लिए मजबूर करना।
- उनके शारीरिक रंग-रूप, पहनावे, भाषा, लहजे या उनके पारिवारिक और क्षेत्रीय बैकग्राउंड का मजाक उड़ाना।
- अभद्र भाषा या गालियों का प्रयोग करना और बात-बात पर डांटकर उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाना।
निजी स्वतंत्रता और अधिकारों पर पाबंदी लगाना
यदि कोई सीनियर कॉलेज या हॉस्टल परिसर में आपकी रोजमर्रा की गतिविधियों को नियंत्रित करने का प्रयास करता है, तो इसे बिल्कुल भी सामान्य परिचय नहीं माना जा सकता। यह सीधे तौर पर आपकी व्यक्तिगत आजादी का हनन है:
- छात्र को अपने खुद के कमरे में जाने, शांति से पढ़ाई करने या सोने से रोकना।
- किसी खास तरह के कपड़े पहनने, अजीब तरीके से बाल संवारने या अजीब ढंग से चलने-उठने के लिए मजबूर करना।
- सीनियर्स के व्यक्तिगत काम करने के लिए दबाव डालना, जैसे उनके कॉलेज प्रोजेक्ट और असाइनमेंट लिखना, उनके कपड़े धोना या उनके लिए कैंटीन और बाजार से सामान लाकर देना।
शारीरिक शोषण और जबरदस्ती के नियम
शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना रैगिंग का सबसे गंभीर और दंडनीय रूप है। इसके तहत की जाने वाली हरकतों को कानूनन अपराध माना गया है:
- बिना किसी कारण के छात्र को कड़ी धूप में घंटों खड़ा रखना, उठक-बैठक कराना या कोई बेहद कठिन शारीरिक कार्य सौंपना।
- छात्र को जबरन कोई ऐसी चीज खाने या पीने के लिए मजबूर करना, जिसे वह नहीं खाना-पीना चाहता।
- किसी भी प्रकार का अनुचित शारीरिक स्पर्श, धक्का-मुक्की या मारपीट करना।
आर्थिक रूप से परेशान करना और शोषण
रैगिंग का एक रूप आर्थिक शोषण भी होता है, जिसके बारे में अक्सर बात नहीं की जाती। इसके तहत निम्नलिखित बातें आती हैं:
- जूनियर छात्रों से जबरन पैसे वसूल करना, कैंटीन में अपने खाने-पीने का बिल भरवाना या महंगी पार्टियां मांगना।
- बिना सहमति के जूनियर छात्रों की किताबें, क्लास नोट्स, लैपटॉप या अन्य कीमती सामान अपने पास रख लेना और मांगने पर भी वापस न करना।
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना क्यों है जरूरी?
रैगिंग को रोकने के लिए UGC द्वारा बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं। इस मामले में पुलिस में FIR दर्ज कराने का भी स्पष्ट प्रावधान है। यदि किसी भी छात्र को कॉलेज या हॉस्टल में इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, तो उन्हें चुप रहकर इसे सहन करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। ऐसा व्यवहार आपके मानसिक स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर डाल सकता है।
ऐसी स्थिति में छात्र को तुरंत अपने कॉलेज प्रशासन की एंटी-रैगिंग कमेटी से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा, प्रताड़ित छात्र सीधे UGC के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-5522 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। हमेशा याद रखें कि आपका स्वाभिमान और आपकी सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
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