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16 घंटे पहले
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डॉक्टर बनना भारत के लाखों युवाओं का सपना होता है, लेकिन सरकारी कॉलेजों में सीमित सीटें और प्राइवेट कॉलेजों की भारी-भरकम फीस अक्सर इस राह में बड़ी रुकावट बन जाती है। ऐसे में बीते कुछ वर्षों में पड़ोसी देश चीन भारतीय छात्रों के लिए एक प्रमुख ‘मेडिकल डेस्टिनेशन’ के तौर पर सामने आया है। शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर, वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटी और भारत की तुलना में किफायती बजट के चलते हर साल हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए चीन का रुख कर रहे हैं।
लेकिन वहां एडमिशन कैसे मिलता है, पढ़ाई किस भाषा में होती है, विदेशी छात्रों के लिए नियम क्या अलग हैं और कोर्स पूरा करने के बाद डॉक्टरों की कमाई कितनी होती है? ये वे सवाल हैं जो विदेश से मेडिकल पढ़ने का मन बना रहे हर छात्र और अभिभावक के मन में रहते हैं। चीन की मेडिकल शिक्षा प्रणाली काफी व्यवस्थित और दुनियाभर में मान्यता प्राप्त है। आइए जानते हैं वहां डॉक्टर बनने की पूरी प्रक्रिया।
चीन में मेडिकल की पढ़ाई कितने साल की होती है?
चीन में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए कराए जाने वाले मेडिकल अंडरग्रेजुएट कोर्स को भारत की तरह ही एमबीबीएस कहा जाता है। इस कोर्स की कुल अवधि 6 साल (5+1) होती है। शुरुआती 5 साल कॉलेज में थ्योरी, प्रैक्टिकल और क्लीनिकल विषयों की पढ़ाई होती है, जबकि आखिरी 1 साल किसी मान्यता प्राप्त अस्पताल में अनिवार्य क्लीनिकल इंटर्नशिप करनी होती है, जहां मरीजों के इलाज का प्रैक्टिकल अनुभव मिलता है।
एडमिशन कैसे मिलता है?
चीनी छात्रों को वहां के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए दुनिया की सबसे कठिन मानी जाने वाली परीक्षा ‘गाओकाओ’ (Gaokao) पास करनी होती है। हालांकि भारतीय और अन्य विदेशी छात्रों के लिए यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान है।
- मेडिकल प्रवेश परीक्षा: विदेशी छात्रों को चीन में अलग से कोई प्रवेश परीक्षा देने की जरूरत नहीं होती। भारतीय छात्रों के लिए सिर्फ भारत की NEET UG परीक्षा क्वॉलिफाई करना अनिवार्य है।
- योग्यता: 12वीं (इंटरमीडिएट) में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) में कम से कम 50% से 70% मार्क्स (यूनिवर्सिटी के स्तर के अनुसार) होने चाहिए।
- आवेदन का तरीका: सीधे यूनिवर्सिटी की वेबसाइट या रजिस्टर्ड कंसल्टेंट्स के जरिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। चीन के शिक्षा मंत्रालय (MOE) से स्वीकृत 45 टॉप मेडिकल कॉलेज हैं, जो अंग्रेजी माध्यम में MBBS कराते हैं।
पढ़ाई किस भाषा में होती है?
विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी ही होता है। हालांकि कोर्स के दौरान बेसिक चीनी भाषा (Mandarin) भी सिखाई जाती है। इसकी जरूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि तीसरे-चौथे साल में जब छात्र अस्पताल जाते हैं, तो चीनी मरीजों से उनकी भाषा में बात करके ही उनकी बीमारी को ठीक से समझा जा सकता है।
डिग्री के बाद प्रैक्टिस कैसे करें?
चीन से मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे स्वतंत्र रूप से डॉक्टरी प्रैक्टिस नहीं की जा सकती। इसके लिए तय नियमों का पालन करना होता है।
- चीन में प्रैक्टिस के लिए: अगर आप चीन में ही रहकर डॉक्टरी करना चाहते हैं, तो वहां की NMLE (National Medical Licensing Examination) पास करनी होगी। यह परीक्षा चीनी भाषा (Mandarin) में होती है और इसे पास करने के बाद ही डॉक्टरी का लाइसेंस मिलता है।
- भारत में प्रैक्टिस के लिए: अगर आप पढ़ाई पूरी कर भारत लौटते हैं, तो नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) के नियमों के अनुसार FMGE/NExT परीक्षा पास करनी होगी। इसे क्लियर करने के बाद ही भारत में डॉक्टर के रूप में रजिस्ट्रेशन मिलता है।
क्या विदेशी नागरिक चीन में डॉक्टर बन सकते हैं?
हां, बिल्कुल। चीन का कानून विदेशी नागरिकों को वहां डॉक्टर बनने और प्रैक्टिस करने की पूरी इजाजत देता है। शर्त सिर्फ इतनी है कि आपके पास चीन की किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से मेडिकल की डिग्री हो, 1 साल की क्लीनिकल इंटर्नशिप पूरी की हो और चीनी भाषा में होने वाली नेशनल मेडिकल लाइसेंसिंग परीक्षा (NMLE) पास कर ली हो।
चीन में डॉक्टर की सैलरी कितनी होती है?
चीन में डॉक्टर की सैलरी इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस शहर में है (बीजिंग, शंघाई जैसे टियर-1 शहर या छोटे शहर) और अस्पताल कैसा है।
- शुरुआती सैलरी: कोर्स और लाइसेंस पूरा करने के बाद जूनियर डॉक्टर या इंटर्न की शुरुआती सैलरी लगभग RMB 5,000 से RMB 8,000 प्रति माह (लगभग 60,000 से 1,00,000 रुपये) होती है।
- अनुभवी डॉक्टर: जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है या पोस्ट-ग्रेजुएशन (MD/MS) पूरी हो जाती है, यह सैलरी 2 लाख से 5 लाख रुपये प्रति माह या सालाना 15 लाख से 25 लाख रुपये तक आसानी से पहुंच जाती है।
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