शिक्षा के व्यवसायीकरण के बीच अनूठी मिसाल: आरा के प्रोफेसरों ने शुरू की UPSC-BPSC की मुफ्त कोचिंग, ऐसे मिलेगा होनहार छात्रों को फायदा करियर एक महीने पहले 68
बिहार के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के एचडी जैन कॉलेज के शिक्षकों ने आर्थिक रूप से कमजोर और होनहार छात्रों के लिए निशुल्क यूपीएससी और बीपीएससी कोचिंग की शुरुआत की है, जहां 50 छात्रों को मुफ्त में मार्गदर्शन दिया जाएगा।

आज के दौर में जब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराना एक बड़ा व्यवसाय बन चुका है और इसके लिए छात्रों को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, तब बिहार के भोजपुर जिले से एक बेहद प्रेरणादायक खबर सामने आई है। आरा के ऐतिहासिक एचडी जैन कॉलेज के कुछ प्रोफेसरों और प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों ने मिलकर एक ऐसी अनूठी पहल शुरू की है, जो आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन बेहद प्रतिभाशाली छात्रों के सपनों को एक नई उड़ान देगी। इन शिक्षकों ने अपने व्यक्तिगत स्तर पर प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बिल्कुल मुफ्त कोचिंग शुरू करने का फैसला किया है। इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि छात्रों से किसी भी तरह का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और न ही पढ़ाने वाले शिक्षकों को इसके बदले में कोई मानदेय या पारिश्रमिक प्राप्त होगा। यह पूरी तरह से समाज सेवा और शिक्षा के प्रति समर्पण की भावना से प्रेरित पहल है।

इस सराहनीय पहल के पीछे की सोच

प्रतियोगी परीक्षाओं के इस दौर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण ग्रामीण और छोटे शहरों के छात्र अक्सर पीछे रह जाते हैं, क्योंकि वे दिल्ली, पटना या अन्य बड़े शहरों की महंगी कोचिंग का खर्च उठाने में असमर्थ होते हैं। एचडी जैन कॉलेज के अनुभवी शिक्षकों ने इस दर्द को महसूस किया और यह माना कि यदि सही समय पर योग्य और जरूरतमंद विद्यार्थियों को सही दिशा और कुशल मार्गदर्शन मिल जाए, तो वे भी राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रशासनिक सेवाओं में अपनी जगह बना सकते हैं। इसी विचार को धरातल पर उतारने के लिए कॉलेज के कई प्रोफेसर एक साझा मंच पर आए।

इस पूरे अभियान की परिकल्पना कॉलेज के इतिहास विभाग के वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक डॉ. अरविंद कुमार ने की है। डॉ. अरविंद कुमार स्वयं UPSC की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं और तीन बार इसके साक्षात्कार तक का सफर तय कर चुके हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या मोटी फीस की मोहताज नहीं होती है। यदि छोटे शहरों और गांवों के बच्चों को उचित मार्गदर्शन मिले, तो वे भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर उन्होंने अपने साथी शिक्षकों को इस नेक कार्य के लिए एकजुट किया और निशुल्क कोचिंग की नींव रखी।

कोचिंग की मुख्य विशेषताएं और चयन प्रक्रिया

इस निशुल्क कोचिंग संस्थान में दाखिले और पढ़ाई को लेकर बेहद पारदर्शी और सरल व्यवस्था बनाई गई है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • सीटों की सीमित संख्या: इस कोचिंग कार्यक्रम के तहत पहले चरण में केवल 50 विद्यार्थियों का ही चयन किया जाएगा।
  • पहले आओ, पहले पाओ: छात्रों का चयन पूरी तरह से "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर किया जाएगा, ताकि बिना किसी पक्षपात के जरूरतमंदों को मौका मिल सके।
  • कोई शुल्क नहीं: इस कोचिंग में पंजीकरण या प्रवेश के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह पूरी तरह निशुल्क है।
  • इंटरव्यू और मेंटरिंग गाइडेंस: नियमित थ्योरी कक्षाओं के अलावा छात्रों को उत्तर लेखन अभ्यास, टेस्ट सीरीज, मॉक इंटरव्यू गाइडेंस और विषयवार मेंटरिंग की सुविधा भी पूरी तरह मुफ्त दी जाएगी।
  • हाइब्रिड मोड में पढ़ाई: सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले छात्रों की सुविधा के लिए कक्षाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही माध्यमों से संचालित की जाएंगी।

अनुभवी मार्गदर्शकों की कुशल टीम

इस निशुल्क कोचिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां छात्रों को पढ़ाने वाले शिक्षक केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे अपने वास्तविक जीवन के अनुभवों और परीक्षाओं की बारीकियों को भी छात्रों के साथ साझा करेंगे। इस टीम में ऐसे शिक्षक शामिल हैं जिन्होंने स्वयं UPSC और BPSC की परीक्षाओं को बेहद करीब से देखा और समझा है। इनमें से कई शिक्षक ऐसे भी हैं जिन्होंने BPSC परीक्षा उत्तीर्ण कर SDM और प्रोबेशन अधिकारी जैसे अत्यंत प्रतिष्ठित पदों पर चयन हासिल किया था, लेकिन बाद में उन्होंने प्रशासनिक सेवा के बजाय शिक्षा के क्षेत्र को अपना करियर चुना।

इस मुहिम में अपनी स्वैच्छिक सेवाएं देने वाले प्रमुख शिक्षकों की सूची इस प्रकार है:

  • डॉ. अरविंद कुमार (इतिहास विभाग)
  • डॉ. निर्भय कुमार
  • डॉ. पुरुषोत्तम
  • डॉ. राजीव कुमार
  • डॉ. अरुण कुमार
  • डॉ. अंकुर त्रिपाठी
  • डॉ. माधवी कुमारी
  • अजय कुमार
  • डॉ. रविशंकर तिवारी
  • डॉ. अनुपमा कुमारी

समाज निर्माण और गुरु-शिष्य परंपरा का पुनरुद्धार

आज के दौर में जब शिक्षा का तेजी से व्यवसायीकरण हो रहा है, आरा के इन प्रोफेसरों का यह कदम न केवल एक कोचिंग कार्यक्रम है, बल्कि यह गुरु-शिष्य की उस महान भारतीय परंपरा को पुनर्जीवित करने का एक सराहनीय प्रयास है जहां शिक्षा को व्यवसाय नहीं बल्कि एक पवित्र कर्तव्य माना जाता था। इन शिक्षकों का मानना है कि अध्यापन केवल एक नौकरी या जीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर समाज के निर्माण का माध्यम है। यदि उनके व्यक्तिगत अनुभवों और ज्ञान के माध्यम से किसी गरीब और वंचित परिवार के बच्चे का भविष्य संवर जाता है और वह प्रशासनिक अधिकारी बन जाता है, तो उनके लिए इससे बड़ा कोई अन्य पुरस्कार या सम्मान नहीं हो सकता।

एचडी जैन कॉलेज के शिक्षकों का यह अभूतपूर्व प्रयास पूरे समाज के लिए एक बड़ा संदेश देता है कि जब देश के शिक्षक अपनी कक्षाओं की चारदीवारी से बाहर निकलकर विद्यार्थियों के सपनों को अपना व्यक्तिगत मिशन बना लेते हैं, तो शिक्षा सही मायने में समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे सशक्त माध्यम बन जाती है। आरा के शिक्षकों की यह पहल निश्चित तौर पर बिहार और देश के अन्य हिस्सों के शिक्षकों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण साबित होगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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