Gaokao 2026: जेल की प्रिंटिंग प्रेस में छपे प्रश्नपत्र, 1.3 करोड़ छात्रों ने दी परीक्षा, पेपर लीक पर उम्रकैद तक की सजा करियर एक घंटा पहले 4
चीन की राष्ट्रीय कॉलेज प्रवेश परीक्षा गाओकाओ इस साल दो दिनों में सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जिसमें करीब 1.3 करोड़ छात्र शामिल हुए। जेल परिसर में पेपर छपाई, ड्रोन निगरानी और पेपर लीक पर उम्रकैद तक की सजा जैसी कड़ी व्यवस्थाओं ने इसे चर्चा में ला दिया है।

चीन की राष्ट्रीय कॉलेज प्रवेश परीक्षा ‘गाओकाओ’ इस वर्ष सफलतापूर्वक पूरी हो गई। महज दो दिनों के भीतर करीब 1.3 करोड़ छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया। दुनिया की सबसे बड़ी और अहम प्रवेश परीक्षाओं में गिनी जाने वाली गाओकाओ के नतीजे छात्रों की उच्च शिक्षा और करियर की दिशा तय करते हैं। भारत में चीन के राजदूत द्वारा सोशल मीडिया मंच एक्स पर इससे जुड़ी जानकारी साझा किए जाने के बाद यह परीक्षा एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।

क्या है गाओकाओ परीक्षा

गाओकाओ चीन की राष्ट्रीय कॉलेज प्रवेश परीक्षा है और इसे देश की सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक परीक्षा माना जाता है। इसकी शुरुआत 1952 में हुई थी और तब से यह चीन की उच्च शिक्षा व्यवस्था का प्रमुख आधार बनी हुई है। हर साल लाखों छात्र प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए इसमें शामिल होते हैं। परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर ही यह तय होता है कि किसी छात्र को कौन-सा विश्वविद्यालय और कौन-सा पाठ्यक्रम मिलेगा।

1.3 करोड़ छात्र हुए शामिल

चीन के शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2026 की गाओकाओ परीक्षा के लिए लगभग 1.3 करोड़ छात्रों ने पंजीकरण कराया था। परीक्षा दो दिनों में आयोजित की गई और इसके लिए पूरे देश में व्यापक स्तर पर तैयारियां की गईं। चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भी एक्स (X) पर साझा की गई जानकारी में बताया कि करोड़ों छात्रों की यह परीक्षा दो दिनों के भीतर सुचारु रूप से संपन्न करा ली गई।

परीक्षा के दौरान थम जाता है शोर और ट्रैफिक

गाओकाओ की अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि परीक्षा के दिनों में प्रशासन विशेष इंतजाम करता है। कई परीक्षा केंद्रों के आसपास फैक्ट्रियों का काम अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है ताकि छात्रों को शोर-शराबे से कोई परेशानी न हो। इसके साथ ही सड़कों पर ट्रैफिक नियंत्रण के खास प्रबंध किए जाते हैं, जिससे परीक्षार्थी समय पर केंद्र तक पहुंच सकें। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और दूसरी सरकारी एजेंसियां मिलकर छात्रों की सुविधा सुनिश्चित करती हैं।

एआई आधारित एंटी-चीटिंग सिस्टम

परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाता है। परीक्षा केंद्रों पर एआई आधारित एंटी-चीटिंग सिस्टम लगाए जाते हैं, जो किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखते हैं। इसके अलावा मेडिकल इमरजेंसी सेवाएं और विशेष पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहते हैं, ताकि किसी भी हालात से तुरंत निपटा जा सके।

कौन-कौन से विषय होते हैं शामिल

गाओकाओ परीक्षा आमतौर पर दो दिनों तक चलती है। इसमें चीनी भाषा, गणित और अंग्रेजी जैसे विषय अनिवार्य होते हैं। इसके साथ ही छात्रों को अपनी शैक्षणिक धारा के अनुसार अन्य विषयों की परीक्षा भी देनी होती है। इन्हीं अंकों के आधार पर विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिलता है, इसलिए ये छात्रों के भविष्य के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।

बेहद गोपनीय रहती है प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया

गाओकाओ के प्रश्नपत्र तैयार करने का काम परीक्षा से कई महीने पहले ही शुरू हो जाता है। विशेषज्ञों और शिक्षकों की एक विशेष टीम को ऐसे गोपनीय स्थान पर रखा जाता है, जहां उनका बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग पूरी तरह खत्म कर दिया जाता है। सुरक्षा कारणों से उनके मोबाइल फोन भी जमा करा लिए जाते हैं और प्रश्नपत्र तैयार होने तक गोपनीयता के कड़े नियम लागू रहते हैं।

जेल की प्रिंटिंग प्रेस में छपते हैं पेपर

गाओकाओ की सबसे अनोखी बातों में से एक इसकी प्रिंटिंग व्यवस्था है। प्रश्नपत्रों की छपाई जेल परिसर में मौजूद उच्च सुरक्षा वाली प्रिंटिंग प्रेस में की जाती है। छपाई के दौरान वहां काम करने वाले कर्मचारियों को भी परीक्षा पूरी होने तक बाहर जाने की इजाजत नहीं होती। इसका मकसद प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और गोपनीयता को पूरी तरह बनाए रखना होता है।

जीपीएस ट्रैकिंग और सशस्त्र सुरक्षा

प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए जीपीएस से लैस वाहनों का उपयोग किया जाता है और इनकी हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जाती है। इसके साथ ही सशस्त्र पुलिस बल प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जिससे उनके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की गुंजाइश न बचे।

ड्रोन से होती है निगरानी

परीक्षा केंद्रों पर नजर रखने के लिए ड्रोन तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाता है। प्रशासन ड्रोन के जरिए केंद्रों के आसपास की गतिविधियों पर निगरानी रखता है और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाता है। इस तकनीक का इस्तेमाल परीक्षा के दौरान किसी भी संदिग्ध हरकत को रोकने के लिए किया जाता है।

नकल और पेपर लीक पर सख्त सजा

चीन में परीक्षा से जुड़े नियम बेहद कड़े हैं। यदि कोई छात्र नकल करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे अगले तीन वर्षों तक किसी भी राष्ट्रीय परीक्षा में बैठने से रोका जा सकता है। वहीं, पेपर लीक करने या संगठित परीक्षा धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाती है। दोषी पाए जाने पर 7 साल की जेल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है, जबकि कुछ दुर्लभ और गंभीर मामलों में मौत की सजा का प्रावधान भी बताया जाता है। इन्हीं कड़े सुरक्षा उपायों, तकनीकी निगरानी और सख्त कानूनों के कारण गाओकाओ को दुनिया की सबसे सुरक्षित और व्यवस्थित प्रवेश परीक्षाओं में से एक माना जाता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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