सीबीएसई 12वीं रिजल्ट पर घमासान! 1.6 लाख छात्रों ने कॉपियों की जांच पर खड़े किए सवाल करियर एक घंटा पहले 3
सीबीएसई 12वीं के नतीजों के बाद अंकों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जहां 1.6 लाख से ज्यादा छात्रों ने 3.8 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच के लिए आवेदन किया है। पोर्टल में गड़बड़ी और 'रोल नंबर नॉट फाउंड' के आरोपों पर अब बोर्ड ने खुद सफाई दी है।

सीबीएसई कक्षा 12वीं के नतीजे सामने आने के बाद से अंकों को लेकर खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया और मिले नंबरों से बड़ी संख्या में छात्र असंतुष्ट हैं और उन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पर गंभीर आपत्ति जताई है। हालत यह है कि सिर्फ 5 दिनों के भीतर 1.6 लाख से अधिक छात्र अपनी कॉपियों की दोबारा समीक्षा कराने के लिए बोर्ड तक पहुंच गए हैं।

इस व्यापक नाराजगी के बीच छात्रों ने सोशल मीडिया पर सीबीएसई के 'पोस्ट-रिजल्ट सर्विस पोर्टल' में तकनीकी खामियां और एरर आने के गंभीर आरोप लगाए। मामला बढ़ता देख अब खुद बोर्ड ने सामने आकर पूरे प्रकरण पर विस्तार से अपना पक्ष रखा है। सीबीएसई ने न केवल पोर्टल के सही ढंग से काम करने का दावा किया, बल्कि 'रोल नंबर नॉट फाउंड' जैसे संदेश के पीछे की असली वजह भी स्पष्ट कर दी है।

3.8 लाख से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाओं की समीक्षा की मांग

सीबीएसई के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2 जून से 7 जून 2026 के बीच खुली रहीं आवेदन विंडो में रिकॉर्ड संख्या में अनुरोध दर्ज हुए। देशभर से 1.6 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने कुल 3.8 लाख से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाओं के वेरिफिकेशन और रीइवैल्युएशन के लिए सफलतापूर्वक आवेदन जमा किए हैं। बड़ी संख्या में छात्र एक से अधिक विषयों में अपने अंकों की दोबारा जांच चाहते हैं, जो दर्शाता है कि इस बार मूल्यांकन को लेकर छात्रों में कितना असमंजस है।

बोर्ड की सफाई: आईआईटी की निगरानी में रहा पोर्टल

पोर्टल के क्रैश होने और तकनीकी दिक्कतों की शिकायतों को नकारते हुए सीबीएसई ने साफ किया कि 2 से 7 जून तक री-वैल्यूएशन की विंडो पूरी तरह सक्रिय और चालू रही। बोर्ड के मुताबिक, इस भारी डिजिटल ट्रैफिक को संभालने के लिए सरकारी तकनीकी एजेंसियों के साथ-साथ आईआईटी (IIT) की विशेष टीमों को तैनात किया गया था। पूरे समय साइबर सुरक्षा टीमें इस पर नजर बनाए रहीं, ताकि किसी भी छात्र को फॉर्म भरने में परेशानी न हो।

'Roll Number Not Found' के पीछे की असली वजह

आवेदन के दौरान कई छात्रों की स्क्रीन पर 'Roll Number Not Found' का संदेश दिख रहा था, जिसे लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैल रही थीं। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं है। दरअसल नियमों के अनुसार रीइवैल्युएशन की प्रक्रिया 3 चरणों में पूरी होती है। यह संदेश केवल उन्हीं छात्रों को दिखाई दिया जिन्होंने पहले चरण में अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन नहीं किया था। नियम के मुताबिक अगले चरण के लिए केवल वही छात्र पात्र थे, जिन्होंने पहला स्टेप पूरा कर लिया था।

सिस्टम पूरी तरह सक्रिय, छात्र न हों परेशान

बोर्ड प्रशासन ने छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाते हुए कहा है कि इस पोस्ट-रिजल्ट प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और छात्र-अनुकूल बनाया गया है। इसके लिए विशेष हेल्पडेस्क और शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) को लगातार सक्रिय रखा गया है। बोर्ड का दावा है कि सामने आ रही वास्तविक शिकायतों का निर्धारित नियमों और तय व्यवस्था के तहत तेजी से समाधान किया जा रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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