बीएसटीसी या बीटेक: 12वीं के बाद कौन सा रास्ता चुनें, फीस से सैलरी तक समझें पूरा फर्क करियर एक घंटा पहले 2
12वीं के बाद बीएसटीसी और बीटेक में से किसी एक को चुनना मुश्किल फैसला है। दोनों कोर्स की अवधि, फीस, नौकरी और सैलरी में बड़ा अंतर है, जानिए कौन सा विकल्प आपके लिए सही रहेगा।

12वीं की परीक्षा खत्म होते ही ज्यादातर विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आगे की पढ़ाई के लिए कौन सी राह पकड़ें। आजकल साइंस समेत दूसरी स्ट्रीम के छात्रों के बीच दो कोर्स खूब चर्चा में हैं- बीएसटीसी (जिसे अब डीएलएड भी कहा जाता है) और बीटेक। बीएसटीसी को सरकारी स्कूल में शिक्षक बनने का सबसे आसान जरिया माना जाता है, जबकि बीटेक इंजीनियरिंग की वह दुनिया है जहां बड़े पैकेज और नामी टेक कंपनियों में काम करने का सपना पूरा होता है।

कई छात्र बिना सोचे-समझे या दोस्तों की देखादेखी किसी भी कोर्स में दाखिला ले लेते हैं और बाद में पछताते हैं। इसलिए किसी भी कोर्स को चुनने से पहले अपने बजट और करियर की संभावनाओं की सही जानकारी होना बेहद जरूरी है। एक कोर्स महज 2 साल में सरकारी नौकरी का दरवाजा खोल सकता है, तो दूसरा 4 साल की मेहनत और कोडिंग व मशीनों की दुनिया से गुजरने के बाद ग्लोबल टेक लीडर बनने का मौका देता है।

बीएसटीसी और बीटेक में बुनियादी अंतर क्या है?

बीएसटीसी यानी बेसिक स्कूल टीचिंग सर्टिफिकेट 12वीं के बाद किया जाने वाला 2 साल का डिप्लोमा कोर्स है। यह खासतौर पर उन छात्रों के लिए है जो प्राइमरी स्कूलों यानी कक्षा 1 से 5 तक में सरकारी शिक्षक बनना चाहते हैं। दूसरी ओर बीटेक यानी बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी 4 साल की अंडरग्रेजुएट प्रोफेशनल डिग्री है, जिसमें कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल या सिविल जैसी शाखाओं में इंजीनियरिंग की बारीकियां सिखाई जाती हैं।

दाखिले की योग्यता और फीस

बीएसटीसी: इसे आर्ट्स, साइंस या कॉमर्स किसी भी स्ट्रीम के छात्र कर सकते हैं। शर्त बस इतनी है कि 12वीं में 50% अंक हों और एक प्री-एग्जाम पास करना पड़ता है। इसकी सालाना फीस करीब 15,000 से 25,000 रुपये के बीच रहती है।

बीटेक: इसके लिए 12वीं में साइंस-मैथ यानी पीसीएम होना अनिवार्य है। आईआईटी या एनआईटी जैसे शीर्ष संस्थानों में दाखिले के लिए जेईई मेन और एडवांस्ड जैसी कठिन परीक्षाएं पास करनी होती हैं। प्राइवेट कॉलेज में बीटेक की सालाना फीस 1 लाख से 3 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

नौकरी और करियर की संभावनाएं

बीएसटीसी के बाद: कोर्स पूरा करते ही आप रीट (REET Level-1) या दूसरे राज्यों की शिक्षक पात्रता परीक्षा देने के योग्य हो जाते हैं। इसे पास करते ही सरकारी प्राइमरी स्कूल में थर्ड ग्रेड टीचर बन जाते हैं और इसमें पूरी तरह सरकारी नौकरी की सुरक्षा मिलती है।

बीटेक के बाद: कॉर्पोरेट सेक्टर के दरवाजे खुल जाते हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट या प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में Google, TCS और Infosys जैसी बड़ी कंपनियों में काम करने का अवसर मिलता है। इसके अलावा गेट परीक्षा देकर सरकारी पीएसयू में अफसर भी बना जा सकता है।

सैलरी में कितना है फर्क?

सैलरी की बात करें तो दोनों कोर्स में काफी अंतर है। बीएसटीसी के बाद सरकारी शिक्षक बनने पर शुरुआती सैलरी 35,000 से 40,000 रुपये प्रति माह के बीच होती है, जो समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। वहीं बीटेक में कमाई की कोई सीमा नहीं है। किसी सामान्य कॉलेज से पढ़ाई करने पर शुरुआत 25,000 से 35,000 रुपये महीने से हो सकती है, लेकिन अगर आपके पास बेहतरीन स्किल्स हैं या आप किसी टॉप कॉलेज से हैं तो शुरुआती पैकेज ही 10 से 15 लाख रुपये सालाना यानी 1 लाख रुपये महीने से ज्यादा तक पहुंच सकता है।

आखिर कौन सा कोर्स है आपके लिए बेहतर?

अगर आपका बजट सीमित है, जल्दी और सुरक्षित सरकारी नौकरी चाहते हैं और बच्चों को पढ़ाने में रुचि रखते हैं तो बीएसटीसी आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है। लेकिन अगर आपको तकनीक से लगाव है, कोडिंग या मशीनों के साथ दिन-रात बिता सकते हैं और कॉर्पोरेट जगत में अच्छी कमाई करना चाहते हैं तो बीटेक से बेहतर रास्ता शायद ही कोई हो।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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