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एक घंटा पहले
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बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की राह हुई कठिन
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जा रही असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने वाले लाखों अभ्यर्थियों के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। हाल ही में जारी किए गए संशोधनों के बाद रिक्त पदों की संख्या में भारी कमी कर दी गई है, जिससे चयन प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में उम्मीदवारों के मन में सबसे प्रमुख सवाल यह है कि इंटरव्यू के लिए बुलावा प्राप्त करने हेतु कम से कम कितना API स्कोर सुरक्षित माना जा सकता है। इस विषय पर पटना यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अखिलेश कुमार ने विस्तार से प्रकाश डाला है और विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण किया है।
पदों में कटौती के पीछे की असल वजह
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने संविदा आधारित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में पदों की संख्या को संशोधित करते हुए इसे 3,687 से घटाकर 2,532 कर दिया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस भर्ती प्रक्रिया में कुल 1,155 पदों को कम कर दिया गया है। डॉ. अखिलेश कुमार के अनुसार, इसके पीछे कानूनी और प्रशासनिक कारण हैं। राज्य में हाल ही में 211 नए डिग्री कॉलेज खोले गए थे, जिसके चलते शुरुआती तौर पर अधिक पदों का आकलन किया गया था। योजना यह थी कि प्रत्येक विषय में दो-दो गेस्ट फैकल्टी रखी जाएगी। हालांकि, उच्चतम न्यायालय के एक स्पष्ट आदेश के मद्देनजर, जिसमें यह कहा गया है कि एक संविदा कर्मी को हटाकर उसकी जगह दूसरे संविदा कर्मी की नियुक्ति नहीं की जा सकती, आयोग को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। वर्तमान में अब राजकीय डिग्री महाविद्यालयों के छह विषयों में 422-422 पद निर्धारित किए गए हैं, जिससे कुल पदों की संख्या 2,532 ही रह गई है।
कितना API स्कोर माना जाएगा सुरक्षित
डॉ. अखिलेश कुमार का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों और उपलब्ध डेटा के विश्लेषण के आधार पर, इंटरव्यू कॉल पाने के लिए 60 से 62 का API स्कोर काफी हद तक सुरक्षित माना जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट करना अनिवार्य है कि यह कोई आधिकारिक कट-ऑफ नहीं है। वास्तविक कट-ऑफ का निर्धारण संबंधित विषय और श्रेणी यानी कैटेगरी के आधार पर भिन्न हो सकता है। कुछ प्रमुख विषयों में प्रतिस्पर्धा अधिक होने के कारण मेरिट ऊपर जा सकती है, जबकि अन्य विषयों में इससे कम स्कोर वाले अभ्यर्थियों को भी मौका मिल सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस भर्ती में इतिहास विषय के लिए सर्वाधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिससे वहां मुकाबला सबसे कड़ा रहने की संभावना है, जबकि अर्थशास्त्र विषय में आवेदनों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है।
कैसे तैयार होता है आपका API स्कोर
असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए चयन प्रक्रिया केवल शैक्षणिक डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि उम्मीदवारों की मेरिट का निर्धारण एकेडमिक परफॉरमेंस इंडेक्स यानी API स्कोर के माध्यम से किया जाता है। इसके अंक वितरण का ढांचा बेहद विस्तृत है।
- शोध कार्य: इसमें अधिकतम 22 अंक निर्धारित हैं। पीएचडी के लिए 11 अंक, जेआरएफ के लिए 11 अंक और नेट के लिए 8 अंक दिए जाते हैं। ध्यान रहे कि पीएचडी और जेआरएफ होने पर कुल 22 अंक मिलेंगे, वहीं पीएचडी और नेट के साथ 19 अंक प्राप्त होंगे।
- स्नातकोत्तर (PG): 80 प्रतिशत से अधिक अंक पर 26 अंक, 70 से 80 प्रतिशत के बीच 23 अंक, 60 से 70 प्रतिशत के बीच 20 अंक और 55 से 60 प्रतिशत के बीच 17 अंक मिलते हैं। आरक्षित श्रेणी यानी एससी और एसटी वर्ग के लिए 50 से 60 प्रतिशत से कम होने पर भी 17 अंकों का प्रावधान है।
- स्नातक (UG): 80 प्रतिशत से ऊपर 17 अंक, 70-80 प्रतिशत के बीच 15 अंक, 60-70 प्रतिशत के बीच 13 अंक, 55-60 प्रतिशत के बीच 11 अंक और 45-55 प्रतिशत के बीच 9 अंक दिए जाएंगे। 45 प्रतिशत से कम अंक होने पर कोई अंक नहीं मिलेगा।
- इंटरमीडिएट और मैट्रिक: इंटर के लिए अधिकतम 13 अंक तय हैं, जिसकी गणना (13/100) गुणा प्राप्त प्रतिशत के फार्मूले से होती है। इसी प्रकार मैट्रिक के लिए अधिकतम 10 अंक हैं, जिसकी गणना (10/100) गुणा प्राप्त प्रतिशत के आधार पर की जाती है।
इन सभी शैक्षणिक श्रेणियों के अंकों को जोड़कर अभ्यर्थी का अंतिम स्कोर तैयार होता है, जो भविष्य की चयन सूची का आधार बनता है। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर पहले ही अपना संभावित स्कोर जोड़कर देख लें।
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