करियर
एक घंटा पहले
5
विचारों
स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव
सागर जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। अब यहां पढ़ाई सिर्फ किताबी ज्ञान और परीक्षा देने तक सीमित नहीं रही है, बल्कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उन्हें व्यावहारिक कौशल से जोड़ा जा रहा है। सागर के सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा यानी वोकेशनल प्रोग्राम पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के साथ ही रोजगार के काबिल बनाना है। वर्तमान में जिले के 160 सरकारी स्कूलों में कुल 15 तरह की ट्रेड और 34 अलग-अलग जॉब रोल के आधार पर कोर्स संचालित किए जा रहे हैं।
हाईटेक विषयों का प्रशिक्षण
बदलते दौर और तकनीक की मांग को ध्यान में रखते हुए सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में आधुनिक विषयों को शामिल किया गया है। इन प्रोग्राम्स में एग्रीकल्चर, वेब डेवलपमेंट, ड्रोन कैमरा टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), नर्सिंग और ब्यूटी पार्लर जैसे हुनर सिखाए जा रहे हैं। खास बात यह है कि ये कोर्स केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं। इस शैक्षणिक वर्ष में लगभग 33,000 छात्रों ने व्यावसायिक शिक्षा के लिए पंजीकरण करवाया है। विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा दी जा रही ट्रेनिंग और फील्ड विजिट के माध्यम से इन बच्चों के कौशल को लगातार निखारा जा रहा है, जिससे वे 21वीं सदी की जरूरतों के हिसाब से खुद को तैयार कर रहे हैं।
समय की मांग और नई पहल
जिला व्यावसायिक समन्वयक मनीष शर्मा ने जानकारी दी कि इन प्रोग्राम्स की शुरुआत वर्ष 2014 में की गई थी। इस पहल का एकमात्र लक्ष्य युवाओं को सिर्फ एक मार्कशीट प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें नई तकनीकों से सुसज्जित करके आत्मनिर्भर बनाना है। समय के साथ बाजार की मांग को देखते हुए इन पाठ्यक्रमों में लगातार बदलाव और नए विषय जोड़े जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, पिछले वर्ष जहां कृषि क्षेत्र पर अधिक फोकस किया गया था, वहीं इस साल ड्रोन कैमरा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे भविष्योन्मुखी विषयों को शामिल किया गया है। अभिषेक जैसे छात्र, जो इन स्कूलों में ड्रोन तकनीक सीख रहे हैं, वे अब इस मशीन को बनाने से लेकर उसे उड़ाने तक की बारीकियों में माहिर हो रहे हैं। इससे वे 12वीं पास करने के बाद अपने दम पर अपना काम शुरू करने में सक्षम हो सकेंगे।
फील्ड अनुभव और शानदार परिणाम
व्यावसायिक शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए स्कूलों में इंडस्ट्री के विशेषज्ञों और सफल टेक्नीशियनों के गेस्ट लेक्चर हर महीने आयोजित किए जाते हैं। छात्रों को केवल कक्षाओं तक सीमित न रखकर हर तीन महीने में उन्हें आईटी कंपनियों, कारखानों, टेक लैब और वर्कशॉप का दौरा कराया जाता है। इस व्यावहारिक प्रशिक्षण का नतीजा यह हुआ है कि छात्रों का बोर्ड परीक्षाओं में प्रदर्शन भी काफी बेहतर हुआ है। कई स्कूलों में तो वोकेशनल विषयों के नतीजे 100% तक दर्ज किए गए हैं।
प्रमाणपत्र का लाभ
कोर्स पूरा करने के बाद विद्यार्थियों को राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के तहत भारत सरकार द्वारा मान्य प्रमाणपत्र भी दिया जाता है। यह प्रमाणपत्र न केवल उन्हें नौकरी पाने में मदद करता है, बल्कि उन्हें ड्रोन असेंबलिंग, एआई आधारित कार्यों और वेब डिजाइनिंग के क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से अपना काम (फ्रीलांसिंग) शुरू करने का आत्मविश्वास भी देता है। सरकारी स्कूलों की इस नई पहल ने साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन और आधुनिक कौशल से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के सरकारी छात्र भी किसी से पीछे नहीं हैं और वे प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अपनी जगह बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
Comments
0 comment