बिहार: सरकारी शिक्षक सालों से डकार रहे थे गरीबों का मुफ्त राशन, अपनों ने खोली पोल तो भरना पड़ा भारी जुर्माना बिहार 2 महीने पहले 75
पूर्वी चंपारण में एक सरकारी शिक्षक का कारनामा सामने आया है, जहां वे रसूख के दम पर फर्जी राशन कार्ड बनवाकर बरसों से सरकारी अनाज का लाभ उठा रहे थे। शिकायत सही पाए जाने पर प्रशासन ने उनसे जुर्माना वसूल लिया है।

शिक्षक की शर्मनाक करतूत

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां शिक्षा के मंदिर में बच्चों को संस्कार देने वाले एक गुरुजी खुद नियमों को धता बताते हुए पकड़े गए हैं। मामला तुरकौलिया प्रखंड के अंतर्गत आने वाली माधोपुर मधुमालत पंचायत का है। एक सरकारी शिक्षक, जो खुद बेहतर वेतन और सुविधाओं के बीच जीवन यापन कर रहा था, उसने गरीबों के हक का राशन हड़पने के लिए हर हद पार कर दी। जब प्रशासन ने इस मामले की गहन जांच की, तो शिक्षक की करतूतों का कच्चा-चिट्ठा सबके सामने आ गया, जिससे पूरे शिक्षा विभाग की फजीहत हो रही है।

सालों से चल रहा था खेल

प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि आरोपी शिक्षक का नाम जैद अहमद है। जैद अहमद वर्तमान में कोटवा प्रखंड के मच्छरगांवा मिडिल स्कूल में एक सरकारी शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। अपनी सरकारी नौकरी और अच्छे वेतन के बावजूद, उन्होंने अपने प्रभाव और पद का गलत इस्तेमाल करते हुए जन वितरण प्रणाली की दुकान से मुफ्त राशन लेने की सुविधा हासिल कर ली थी। शिक्षक ने राशन कार्ड बनवाने के दौरान अपनी आय को लेकर सरकार को पूरी तरह गुमराह किया और गलत जानकारी देकर अपना नाम सूची में दर्ज करवा लिया। वे कई सालों से चुपचाप सरकार द्वारा गरीबों के लिए भेजे गए मुफ्त अनाज का उपभोग कर रहे थे।

अपनों ने ही की शिकायत

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब शिक्षक के अपने ही करीबी लोगों को उनकी इस धोखाधड़ी की जानकारी मिली। किसी ने इसकी गुप्त सूचना सीधे जिला प्रशासन को दे दी। शिकायतकर्ता ने प्रशासन को यह बताया कि एक जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति किस तरह से अपात्र होते हुए भी सरकारी योजना का नाजायज लाभ उठा रहा है। शिकायत मिलने के बाद सदर एसडीओ निशांत सेहारा ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए। जांच में यह स्पष्ट हो गया कि शिक्षक द्वारा किया गया दावा पूरी तरह से गलत था और वे राशन लेने के हकदार नहीं थे।

प्रशासन का कड़ा एक्शन

जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। प्रशासन ने शिक्षक जैद अहमद से सरकारी राशि की वसूली करने का निर्णय लिया। इस धोखेबाजी के पकड़े जाने के बाद शिक्षक को न केवल सामाजिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा, बल्कि उन्हें आर्थिक दंड भी भुगतना पड़ा है। प्रशासन ने उनसे राशन के एवज में ली गई पूरी राशि और उस पर लगने वाले ब्याज को जोड़कर कुल ₹52,784 की वसूली की है। यह पूरी रकम सरकारी खजाने यानी ट्रेजरी में जमा करवा दी गई है।

भविष्य में और बढ़ेगी मुसीबत

जिला प्रशासन ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि गरीबों के राशन की कालाबाजारी या अपात्र लोगों द्वारा सरकारी अनाज का दुरुपयोग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि प्रशासनिक कार्रवाई के तहत आर्थिक दंड तो वसूला जा चुका है, लेकिन अब इस शिक्षक की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। सूत्रों के अनुसार, अब उन पर विभागीय कार्रवाई और अनुशासनात्मक गाज गिरना भी तय माना जा रहा है। इस पूरी घटना ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है और शिक्षक समाज की गरिमा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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