राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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भारत और पड़ोसी देशों में भूकंप की हलचल
शुक्रवार का दिन भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से काफी सक्रिय रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ पड़ोसी देशों में भी देर रात और तड़के धरती कांपने की घटनाएं सामने आईं। भारत के लेह-लद्दाख और असम में भूकंप के झटके महसूस किए गए, वहीं दूसरी ओर तिब्बत और अफगानिस्तान में भी धरती में हलचल देखी गई। यद्यपि इन भूकंपों की तीव्रता बहुत अधिक नहीं थी, लेकिन एक साथ कई इलाकों में झटके महसूस होने से लोगों में घबराहट का माहौल जरूर बन गया।
लेह-लद्दाख में आधी रात को लगे झटके
भूकंप के इस सिलसिले की शुरुआत भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से हुई। लेह में रात के 12 बजकर 27 मिनट पर धरती डोलने लगी। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 3.7 मापी गई। वैज्ञानिकों के अनुसार, भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर करीब 12 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। अचानक आए इन झटकों के कारण लोगों की नींद खुल गई और कई लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर सुरक्षित स्थानों की ओर भागते देखे गए। राहत की बात यह है कि इस घटना में अब तक किसी भी प्रकार के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
असम भी भूकंप से प्रभावित
लद्दाख में झटकों के कुछ समय बाद ही भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम से भी भूकंप आने की खबर मिली। शुक्रवार तड़के करीब 1 बजकर 20 मिनट पर असम की धरती हिली। यहां भूकंप की तीव्रता 3.1 दर्ज की गई, जो कि रिक्टर पैमाने पर एक हल्की श्रेणी का भूकंप माना जाता है। इस झटके की गहराई जमीन से करीब 39 किलोमीटर नीचे थी। हालांकि तीव्रता कम होने के कारण बड़े विनाश का अंदेशा कम था, फिर भी झटकों की तीव्रता से लोगों की नींद उड़ी और वे दहशत में घरों से बाहर निकल आए।
तिब्बत और अफगानिस्तान में भी कंपन
भारत के बाद भूकंप का प्रभाव पड़ोसी देशों में भी देखने को मिला। शुक्रवार तड़के 4 बजकर 2 मिनट पर तिब्बत में भूकंप आया, जिसकी तीव्रता 4.7 रही। यह इस पूरी श्रृंखला में सबसे अधिक तीव्रता वाला भूकंप था। भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर 30 किलोमीटर की गहराई पर बताया गया है। तिब्बत में आए इस भूकंप को लेकर अभी तक कोई भी विनाशकारी रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
तिब्बत के बाद अफगानिस्तान की बारी थी। तिब्बत के झटकों के ठीक 18 मिनट बाद, यानी शुक्रवार सुबह 4 बजकर 20 मिनट पर अफगानिस्तान में भी भूकंप दर्ज किया गया। अफगानिस्तान में आए इस भूकंप की तीव्रता 3.5 मापी गई। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस भूकंप का केंद्र काफी गहराई पर था, जो जमीन के अंदर करीब 163 किलोमीटर नीचे स्थित था। आमतौर पर इतनी अधिक गहराई पर आने वाले भूकंप का असर सतह पर कम महसूस किया जाता है, जिसके कारण यहां भी किसी नुकसान की खबर नहीं है।
सुरक्षा को लेकर चिंता
लगातार कई स्थानों पर भूकंप आने की इन घटनाओं ने आम नागरिकों के बीच एक डर का वातावरण पैदा कर दिया है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि ये झटके किसी बड़ी तबाही का संकेत नहीं हैं, लेकिन फिर भी लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। सरकारी एजेंसियां सभी क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी आपात स्थिति के लिए प्रशासन अलर्ट मोड पर है। फिलहाल, इन सभी स्थानों से नुकसान की कोई खबर न आना प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए राहत का विषय है।
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