पद्म विभूषण तीजन बाई पंचतत्व में विलीन, राजकीय सम्मान के साथ दुर्ग में हुआ अंतिम संस्कार, 'चोला माटी के हे राम' की गूंज से नम हुईं आंखें छत्तीसगढ़ 2 महीने पहले 77
छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पटल पर पहचान दिलाने वाली सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया, जिसके बाद दुर्ग में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

छत्तीसगढ़ की माटी की सुपुत्री और पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली पद्म विभूषण तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। 70 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, जिससे पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। दुर्ग जिले में रविवार को अत्यंत गमगीन माहौल में उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनकी अंतिम यात्रा और विदाई समारोह में उमड़े जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि वे लोगों के दिलों में कितनी गहरी छाप छोड़ गई हैं।

राजकीय सम्मान और नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

स्वर्गीय तीजन बाई के पार्थिव शरीर को जब अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम लाया गया, तो वहां उपस्थित हर आंख नम थी। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए भारी संख्या में स्थानीय नागरिक, प्रशंसक, देश-विदेश के कलाकार और जनप्रतिनिधि पहुंचे। राज्य सरकार की ओर से उन्हें राजकीय सम्मान प्रदान किया गया। अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित छत्तीसगढ़ के कई गणमान्य नागरिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

'चोला माटी के हे राम' की गूंज और भावुक क्षण

मुक्तिधाम का पूरा वातावरण उस समय अत्यंत भावुक और मार्मिक हो गया जब वहां उपस्थित लोगों ने तीजन बाई के सबसे प्रसिद्ध और कालजयी लोकगीत 'चोला माटी के हे राम' को सामूहिक रूप से गाना शुरू कर दिया। उनके खुद के गाए इस गीत की पंक्तियां जब हवा में गूंजीं, तो वहां उपस्थित लोगों के आंसू नहीं थमे। इसके बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से उन्हें मुखाग्नि दी और इस तरह लोक संस्कृति की एक महान साधिका पंचतत्व में विलीन हो गई।

कला जगत को लगी अपूरणीय क्षति

तीजन बाई के निधन से भारतीय लोक कला और पंडवानी परंपरा को एक ऐसी क्षति पहुंची है जिसकी भरपाई असंभव है। वे छत्तीसगढ़ी संस्कृति की जीवंत प्रतीक थीं। मुक्तिधाम में जुटे लोक कलाकारों, साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने उनके अद्वितीय योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज और अनूठी अभिनय शैली से पंडवानी को वैश्विक पहचान दिलाई। वहां मौजूद कला प्रेमियों ने पंडवानी परंपरा और उनके प्रसिद्ध प्रसंगों का स्मरण करते हुए उन्हें सादर नमन किया।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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