अमेरिकी डिजिटल टैक्स पर डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख, यूरोपीय देशों को दी 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी विश्व 3 महीने पहले 122
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो भी देश अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर डिजिटल सर्विस टैक्स लगाएंगे, उन देशों के निर्यात पर अमेरिका 100 फीसदी शुल्क लगाएगा।

डोनाल्ड ट्रंप की दो टूक चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि कोई भी देश अमेरिकी कंपनियों की डिजिटल सेवाओं पर कर लगाता है, तो उसे अमेरिका को भेजे जाने वाले निर्यात पर 100% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। यह कड़ा रुख तब सामने आया है जब यूरोप के कई देश बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए नए डिजिटल सर्विस टैक्स लागू करने की दिशा में विचार कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथसोशल पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए ट्रंप ने कहा कि जो भी देश अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाकर इस तरह का कदम उठाएंगे, वॉशिंगटन उन पर तुरंत भारी आयात शुल्क लगाकर कड़ा जवाब देने के लिए तैयार है।

टैरिफ नीति किसी भी समझौते से ऊपर

अपनी योजना को विस्तार से स्पष्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा कि उनके इस बयान को एक चेतावनी के रूप में लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी राष्ट्र इस तरह का टैक्स लागू करेगा, उसे बिना किसी देरी के अमेरिका आने वाले अपने सभी सामानों पर 100% टैरिफ देना होगा। ट्रंप ने इस बात पर भी जोर दिया कि उनकी यह प्रस्तावित टैरिफ नीति पहले से किए गए किसी भी मौजूदा व्यापार समझौते से कहीं ऊपर होगी। हालांकि यह चेतावनी वैश्विक स्तर पर लागू होगी, लेकिन फिलहाल इसका सीधा निशाना यूरोपीय देशों की तरफ है, जो इस डिजिटल टैक्स को लेकर काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं।

व्यापारिक तनाव बढ़ने की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की इस ताजा चेतावनी से अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव फिर से चरम पर पहुंच सकता है। कई देशों का मानना है कि मल्टीनेशनल टेक कंपनियों को उन देशों में भी कर देना चाहिए जहां वे अपना कारोबार कर रही हैं और बड़ी कमाई कर रही हैं। यह मसला पिछले कुछ समय से वॉशिंगटन और कई यूरोपीय सरकारों के बीच असहज संबंधों का बड़ा कारण बना हुआ है। अमेरिकी प्रशासन का स्पष्ट तौर पर यह रुख है कि ये नए टैक्स नियम केवल और केवल अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

क्या है डिजिटल सर्विस टैक्स का विवाद?

डिजिटल सर्विस टैक्स मुख्य रूप से उन बड़ी तकनीकी कंपनियों पर लगाया जाता है जो किसी देश में ऑनलाइन विज्ञापन, इंटरनेट आधारित सेवाओं और डिजिटल मार्केटप्लेस के जरिए भारी मुनाफा कमाती हैं। इन कर प्रणालियों की संरचना कुछ इस तरह से बनाई जाती है कि इनका असर दुनिया की सबसे स्थापित कंपनियों जैसे मेटा, अल्फाबेट और अमेज़न पर ही पड़ता है। चूंकि ये सभी अमेरिकी कंपनियां हैं, इसलिए अमेरिका लगातार इनका विरोध करता रहा है। अमेरिका का तर्क है कि इससे उसकी कंपनियों पर अनुचित दबाव पड़ता है। दूसरी ओर, यूरोपीय देशों का तर्क है कि पुरानी अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था वर्तमान डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुकूल नहीं है और राजस्व का उचित हिस्सा पाने के लिए नियमों में बदलाव अनिवार्य है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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