इजरायली सेना हटाने को लेकर ट्रंप का दबाव, बेंजामिन नेतन्याहू ने दिया यह जवाब विश्व एक महीने पहले 71
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सीरिया और लेबनान से अपनी सेना हटाने का आग्रह किया है, जिस पर इजरायल ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए असहमति जताई है।

वॉशिंगटन और तेल अवीव के बीच बढ़ी कूटनीतिक हलचल

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक महत्वपूर्ण टेलीफोनिक बातचीत की। इस चर्चा के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट रूप से आग्रह किया कि इजरायल को दक्षिणी सीरिया और दक्षिणी लेबनान के क्षेत्रों से अपनी सेना को वापस बुला लेना चाहिए। अमेरिकी समाचार वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि इन क्षेत्रों में इजरायल की लगातार सैन्य उपस्थिति से पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और तनाव का खतरा बढ़ सकता है। अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि वहां के लोग इजरायली सेना की मौजूदगी को स्वीकार नहीं कर रहे हैं, इसलिए उन्हें अपने कदम वापस खींच लेने चाहिए। इसी तरह का संदेश दक्षिणी लेबनान में तैनात इजरायली सैनिकों के संदर्भ में भी दिया गया है।

सीरियाई नेतृत्व के साथ बैठक के बाद ट्रंप का रुख

यह कूटनीतिक बातचीत उस दिन के एक दिन बाद हुई, जब तुर्किये में आयोजित नाटो समिट के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया के राष्ट्रपति अहमत अल-शारा से मुलाकात की थी। इस सम्मेलन के दौरान अमेरिका ने इजरायल और सीरिया के बीच एक नई सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने की दिशा में गंभीर पहल की है। हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से इस फोन कॉल के आधिकारिक विवरण पर कोई विशेष टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन किसी भी स्तर पर रिपोर्ट का खंडन भी नहीं किया गया है। अमेरिकी प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बीच बेहद मजबूत रिश्ते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इजरायल हमेशा से अमेरिका का एक भरोसेमंद सहयोगी रहा है और ट्रंप इजरायल के प्रबल समर्थक होने के साथ-साथ क्षेत्र में शांति स्थापना के भी पक्षधर हैं।

नेतन्याहू ने सुरक्षा के लिए सेना की उपस्थिति को बताया जरूरी

रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप के इस सुझाव के साथ असहमति जताई है। उनका स्पष्ट मत है कि दक्षिणी सीरिया और दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैनिकों का तैनात रहना देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा के लिए अपरिहार्य है। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने सीमाओं के करीब एक मजबूत सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अमेरिका पिछले कई महीनों से इजरायल और सीरिया के बीच किसी नए सुरक्षा समझौते को अंजाम देने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अब यह देखना बाकी है कि इन कोशिशों को कितनी सफलता मिल पाती है।

सीरियाई इलाकों में बढ़ता जन-आक्रोश

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सरकार गिरने के बाद जिन क्षेत्रों में इजरायल ने सैन्य तैनाती में बढ़ोतरी की थी, वहां से चरणबद्ध तरीके से सेना हटाने का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि, वॉशिंगटन को यह संदेह है कि नेतन्याहू अभी किसी भी बड़े रणनीतिक समझौते के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं। हालिया दिनों में दक्षिणी सीरिया में इजरायली सेना द्वारा की गई सैन्य कार्रवाइयों के बाद वहां के स्थानीय लोगों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया है। कुछ स्थानों पर तो आईडीएफ के साथ सीधे टकराव और झड़पें भी देखी गई हैं, जिसने इस पूरे मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

लेबनान और इजरायल के बीच वार्ता की स्थिति

इसी बीच, अमेरिका की मध्यस्थता के तहत इजरायल और लेबनान के प्रतिनिधियों के बीच मंगलवार को रोम में फिर से बातचीत शुरू हुई। दोनों पक्षों ने कुछ सप्ताह पहले तैयार किए गए एक प्रारंभिक समझौते को लागू करने की दिशा में चर्चा की। इस प्रस्तावित समझौते में इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के 2 पायलट जोन से अपनी सेना हटाने और वहां लेबनान की आधिकारिक सेना को तैनात करने पर सहमति जताई थी। हालांकि, वास्तविकता यह है कि इजरायली सेना ने अभी तक इन इलाकों से पूर्ण वापसी नहीं की है। लेबनान की सरकार इजरायल से सैन्य वापसी के लिए एक ठोस समय-सीमा की मांग कर रही है। दूसरी ओर, इजरायल का कहना है कि वापसी से पहले यह सुनिश्चित होना अनिवार्य है कि उन इलाकों से हिज्बुल्लाह के हथियारों का जखीरा और लड़ाकों का नेटवर्क पूरी तरह साफ हो चुका है।

इजरायल में चुनाव की आहट और क्षेत्रीय चुनौतियां

यह सारा घटनाक्रम एक ऐसे समय में सामने आया है जब पूरे क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है। हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा व्यावसायिक जहाजों पर हमले किए जाने के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों के विरुद्ध नौसैनिक नाकेबंदी को फिर से लागू कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह दबाव ऐसे वक्त में आया है जब प्रधानमंत्री नेतन्याहू अपने देश में 3 महीने बाद होने वाले आम चुनावों की तैयारियों में जुटे हैं। इजरायल के कई दिग्गज मंत्री इन क्षेत्रों में स्थायी रणनीतिक नियंत्रण बनाए रखने के हक में हैं। उनका तर्क है कि यह तैनाती 7 अक्टूबर 2023 जैसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए एकमात्र विकल्प है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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