देवभूमि में हिली धरती: हिमाचल और पंजाब में भूकंप के झटके, रात 10 बजे घरों से बाहर निकले लोग; जानें कितनी रही तीव्रता हिमाचल प्रदेश 3 महीने पहले 42
हिमाचल प्रदेश और पंजाब के कई इलाकों में शुक्रवार रात करीब 10:04 बजे भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिनकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.3 आंकी गई। भूकंप का केंद्र धर्मशाला से करीब 18 किलोमीटर दूर था और घबराए लोग घरों से बाहर निकल आए।

हिमाचल प्रदेश और पंजाब के कई हिस्सों में शुक्रवार की रात अचानक धरती हिलने से लोगों में हड़कंप मच गया। रात करीब 10:04 बजे आए इस भूकंप ने पल भर में लोगों को सहमा दिया और कई जगहों पर लोग घबराकर अपने घरों से निकलकर खुले मैदानों की ओर भागने लगे।

कहां था भूकंप का केंद्र और कितनी रही तीव्रता

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। एंड्रॉइड अर्थक्वेक अलर्ट सिस्टम के मुताबिक इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.3 मापी गई। इसका मुख्य केंद्र प्रसिद्ध पर्यटन नगरी धर्मशाला से करीब 18 किलोमीटर दूर जमीन के भीतर बताया गया है।

झटके इतने तेज थे कि एहतियात के तौर पर कई जगहों पर लोग अपने घरों से बाहर आ गए। राहत की बात यह रही कि फिलहाल इस भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई है।

भूकंप के समय क्या न करें

  • लिफ्ट से बिल्कुल बचें: भूकंप के दौरान या उसके तुरंत बाद बहुमंजिला इमारत से नीचे उतरने के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल न करें, केवल सीढ़ियों का ही सहारा लें।
  • इमारत के भीतर न दौड़ें: झटके आने पर घर या दफ्तर के अंदर इधर-उधर भागने से बचें, क्योंकि भगदड़ में गिरने और चोट लगने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
  • खिड़कियों और भारी सामान से दूरी रखें: कांच की खिड़कियों, शीशों, भारी अलमारियों, पंखों या झूमर के पास खड़े होने से बचें, क्योंकि ये आप पर गिर सकते हैं।
  • आग जलाने से बचें: भूकंप के बाद घर के अंदर माचिस, मोमबत्ती या लाइटर भूलकर भी न जलाएं, क्योंकि पाइपलाइन फटने से गैस रिसाव और आग का गंभीर खतरा हो सकता है।
  • अफवाहों से बचें: सोशल मीडिया या फोन पर बिना पुष्टि किए कोई भ्रामक जानकारी न फैलाएं और न ही ऐसी खबरों पर भरोसा करें। सिर्फ आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान दें।

भूकंप के समय क्या करें

  • नीचे हैं तो भागें, ऊपर हैं तो रुकें: अगर आप ग्राउंड या फर्स्ट फ्लोर पर हैं तो बिना देर किए सीधे खुले मैदान की ओर दौड़ें। लेकिन तीसरी, चौथी या उससे ऊपर की मंजिल पर हैं तो नीचे भागने की गलती न करें, क्योंकि भूकंप में सीढ़ियां सबसे पहले ढहती हैं। ऐसे में वहीं किसी मजबूत कोने को पकड़ लें।
  • गोल्डन ट्रायंगल का सहारा लें: अगर कमरे में मजबूत टेबल न हो तो किसी भारी सोफे, बेड या मजबूत दीवार के ठीक पास घुटने मोड़कर (Fetal Position) बैठ जाएं। छत या दीवार गिरने पर ये भारी चीजें एक त्रिकोण जैसा सुरक्षित स्थान बना देती हैं, जहां आप मलबे से बच सकते हैं।
  • बीम के नीचे का कोना सबसे सुरक्षित: घर के बीचोबीच खड़े होने के बजाय उस कोने में जाएं जहां पिलर और बीम आपस में मिलते हैं। यह ढांचा सबसे मजबूत होता है और इसके गिरने की आशंका सबसे कम रहती है। रसोई से तुरंत दूर हट जाएं, क्योंकि वहां गैस और धारदार चीजें सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं।
  • फ्लैशलाइट और सीटी पास रखें: अगर आप ज्यादा खतरे वाली इमारत में हैं तो झटके महसूस होते ही मोबाइल हाथ में ले लें। मलबे में फंसने पर चिल्लाने से ऊर्जा खत्म हो जाती है और आवाज बाहर नहीं पहुंचती, ऐसे में मोबाइल का फ्लैश या सीटी आपकी लोकेशन रेस्क्यू टीम तक पहुंचा सकती है।
  • मेन लाइन सबसे पहले बंद करें: हल्के झटके रुकते ही और बाहर निकलने से ठीक पहले घर का मेन पावर स्विच (MCB) और गैस का रेगुलेटर तुरंत बंद कर दें। भूकंप के बाद होने वाले हादसों में 50% से ज्यादा मौतें शॉर्ट सर्किट से लगी आग और गैस ब्लास्ट के कारण होती हैं।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप