देश की पाठशाला: बाघ से पहले कौन था भारत का राष्ट्रीय पशु और क्यों नहीं बनी गाय? राष्ट्रीय राजनीति 2 महीने पहले 77
भारत के राष्ट्रीय पशु को लेकर अक्सर कई सवाल उठते हैं। आज देश की पाठशाला में जानिए कि आजादी के बाद शेर को हटाकर बाघ को क्यों चुना गया और गाय को यह दर्जा क्यों नहीं मिला।

भारत का पुराना राष्ट्रीय पशु

आज हम सब जानते हैं कि भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है, लेकिन क्या आप इस बात से वाकिफ हैं कि आजादी मिलने के बाद के कई सालों तक शेर भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पशु था। उस समय शेर ही देश की पहचान और गर्व का प्रतीक माना जाता था।

बाघ को क्यों मिली प्राथमिकता

साल 1972 में सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राष्ट्रीय पशु के रूप में बाघ को अपनाया। इसके पीछे सबसे मुख्य कारण बाघों की घटती हुई संख्या थी। उस समय जंगलों में बाघों का शिकार बहुत तेजी से हो रहा था, जिसके चलते उनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा था। उन्हें बचाने और संरक्षण देने के लिए सरकार ने यह निर्णय लिया। इसके साथ ही, बाघ को ताकत, फुर्ती और शालीनता का प्रतीक माना जाता है जो भारत की छवि के अनुकूल था।

गाय को लेकर चर्चा

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि गाय को राष्ट्रीय पशु क्यों नहीं बनाया गया। हालांकि, यह विषय हमेशा से चर्चा का केंद्र रहा है। सरकारी मानकों और चयन प्रक्रिया में बाघ को पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए अधिक उपयुक्त माना गया। देश की पाठशाला में एंकर सुशांत सिन्हा ने विस्तार से बताया है कि किस तरह ऐतिहासिक और भौगोलिक परिस्थितियों के चलते बाघ का चयन किया गया और कैसे यह बदलाव देश की वन्यजीव नीतियों का अहम हिस्सा बना।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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