बिहार
2 घंटे पहले
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पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को मोबाइल फोन पर धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। एक अज्ञात व्यक्ति ने कॉल कर न सिर्फ धमकाया, बल्कि अपशब्दों का भी प्रयोग किया। इस घटना को लेकर उपमुख्यमंत्री के आप्त सचिव की ओर से पटना के साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। साइबर थाना पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला
मिली जानकारी के मुताबिक, अज्ञात व्यक्ति ने उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के सरकारी अथवा निजी नंबर पर फोन किया। कॉल रिसीव होते ही आरोपी ने अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया और अपशब्द कहे। इसी दौरान फोन पर उपमुख्यमंत्री को धमकी भी दी गई। पुलिस अब कॉल करने वाले की पहचान में जुटी है।
शिक्षकों के कोचिंग पढ़ाने पर रोक
दूसरी ओर, बिहार के सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग ने एक अहम आदेश जारी किया है। अब राज्य का कोई भी सरकारी शिक्षक किसी कोचिंग संस्थान, निजी ट्यूशन या व्यावसायिक शिक्षण संस्थान में अध्यापन कार्य नहीं कर सकेगा। सरकार ने इस पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी इस सख्त निर्देश में स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि कोई शिक्षक इस नियम का उल्लंघन करते हुए पकड़ा गया, तो उसके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
क्यों लिया गया यह फैसला
शिक्षा विभाग के अनुसार, लंबे अरसे से राज्य के अलग-अलग जिलों से शिकायतें आ रही थीं कि कई सरकारी शिक्षक स्कूल समय में या स्कूल के बाद निजी कोचिंग और ट्यूशन पढ़ाने में लगे रहते हैं। विभाग का मानना है कि शिक्षकों के कोचिंग पढ़ाने से विद्यालयों की मुख्य पढ़ाई प्रभावित होती है, जिससे छात्रों के हित को नुकसान पहुंचता है। सरकारी सेवा में रहते हुए निजी या व्यावसायिक शिक्षण से जुड़ना शिक्षकों की आचार संहिता और सेवा शर्तों के पूरी तरह विपरीत है। विभाग का कहना है कि शिक्षकों की पहली और प्रमुख जिम्मेदारी सरकारी स्कूलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है।
डीईओ को सघन निगरानी के निर्देश
शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को अपने-अपने क्षेत्रों में कड़ी नजर रखने और सघन निगरानी करने का आदेश दिया है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके जिले में कोई भी सरकारी शिक्षक किसी निजी कोचिंग या ट्यूशन गतिविधि में शामिल न हो।
बीपीएससी से बहाली के बाद उठाया कदम
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से राज्य में रिकॉर्ड संख्या में नए शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है। अब लगभग सभी सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर हो गई है और पर्याप्त संख्या में स्टाफ उपलब्ध है।
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