झारखंड
एक घंटा पहले
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विचारों
देवघर में शिवभक्ति का महाकुंभ
पवित्र सावन का महीना चल रहा है और इस पूरे माह में भगवान शिव की भक्ति का विशेष महत्व माना गया है। हालांकि सावन के हर दिन बाबा भोलेनाथ की पूजा की जाती है, लेकिन सावन की सोमवारी पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक होता है। आज सावन की दूसरी सोमवारी के मौके पर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का पूरा क्षेत्र पूरी तरह से भक्ति के रंग में रंगा हुआ है। सुबह होते ही बाबा धाम में शिव भक्तों का तांता लग गया। मंदिर परिसर के भीतर और बाहर चारों तरफ केवल कांवरिये ही नजर आ रहे हैं। कोई अपने कांधे पर कांवर उठाए बाबा के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहा है तो कोई कतार में खड़े होकर बोल बम और हर हर महादेव के जयकारे लगा रहा है।
सुलतानगंज से 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा
बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने वाले अधिकांश श्रद्धालु बिहार के सुलतानगंज से अपनी यात्रा की शुरुआत करते हैं। वहां के उत्तर वाहिनी गंगा से कांवरिये पवित्र गंगाजल भरते हैं और फिर करीब 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय करके देवघर पहुंचते हैं। इस यात्रा के दौरान शारीरिक थकान के बावजूद भक्तों के कदम नहीं रुकते हैं। उनके मन में केवल एक ही लक्ष्य होता है कि जल्द से जल्द बाबा बैद्यनाथ के दरबार में पहुंचकर शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित किया जाए। यही कारण है कि सावन की सोमवारी आते-आते देवघर की सड़कें भगवा वस्त्र धारण किए हुए कांवरियों से भर जाती हैं और पूरा नगर एक विशाल धार्मिक मेले में तब्दील हो जाता है।
5 किलोमीटर तक पहुंची कतार
इस वर्ष श्रावणी मेले में पिछले वर्षों की तुलना में अधिक उत्साह दिखाई दे रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले सोमवार को ही करीब 3 लाख कांवरियों ने बाबा को जलार्पण किया था। इस बार जिला प्रशासन को उम्मीद है कि दूसरी सोमवारी के पावन अवसर पर 5 लाख से भी अधिक श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करेंगे। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आधी रात 12 बजे से ही मंदिर के बाहर कतार लगनी शुरू हो गई थी, जो अब बढ़कर करीब 5 किलोमीटर लंबी हो चुकी है।
मंदिर में षोडशोपचार विधि से पूजा
बाबा बैद्यनाथ मंदिर के कपाट आज अहले सुबह 3 बजे खोले गए। पट खुलते ही मंदिर के सरदार पंडा और अन्य तीर्थ पुरोहितों द्वारा पूरे विधि-विधान के साथ बाबा बैद्यनाथ की षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना की गई। इस प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद सबसे पहले तीर्थ पुरोहितों ने कांवरिया जल अर्पित किया। इसके पश्चात आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए गए। सुबह 4 बजे से ही कांवरिये क्रमानुसार मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं और बाबा पर जलाभिषेक कर रहे हैं।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
इतनी बड़ी संख्या में उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क और तैयार है। प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए हैं। पुलिस के आला अधिकारियों से लेकर तैनात जवानों तक को लगातार ब्रीफिंग दी जा रही है ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास के सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि भीड़ के दबाव के अनुसार व्यवस्थाओं को संचालित किया जा सके।
भक्ति के जयकारों से गूंज रहा बाबा धाम
इस समय बाबा बैद्यनाथ धाम का दृश्य अद्भुत है। हर तरफ कांवरियों का रेला, भगवा रंग के वस्त्र और बोल बम की गगनभेदी आवाजें सुनाई दे रही हैं। दूर-दराज के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु अपनी मन्नतें और अगाध आस्था लेकर बाबा के दरबार में पहुंचे हैं। कोई अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना लेकर आया है, तो कोई केवल बाबा का आशीर्वाद पाने की इच्छा से। सावन की दूसरी सोमवारी के अवसर पर दिखने वाला यह जनसैलाब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों की बाबा बैद्यनाथ के प्रति अटूट निष्ठा और विश्वास की जीवंत मिसाल है। पूरा देवघर इस वक्त हर-हर महादेव और बोल बम के उद्घोष से गूंज रहा है।
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