देवघर: बाबाधाम में 150 AI कैमरों से कांवरियों की पल-पल गिनती, जानें कैसे काम करता है यह तकनीक झारखंड एक घंटा पहले 2
देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रावणी मेला के दौरान पहली बार 150 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरों का उपयोग श्रद्धालुओं की संख्या गिनने और भीड़ प्रबंधन के लिए किया जा रहा है। यह डिजिटल सिस्टम सटीक डेटा प्रदान करने के साथ ही श्रद्धालुओं की दोहरी गिनती की समस्या को भी समाप्त कर रहा है।

देवघर में तकनीक के जरिए भीड़ का डिजिटल प्रबंधन

झारखंड के देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में इस साल श्रावणी मेला का स्वरूप तकनीक की मदद से पूरी तरह बदल गया है। मेले के दौरान आने वाले लाखों कांवरियों की भीड़ का हिसाब रखने के लिए अब कोई पारंपरिक या मैनुअल तरीका नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित आधुनिक सिस्टम काम कर रहा है। प्रशासन ने दुम्मा बॉर्डर से लेकर बाबा मंदिर परिसर और कुमैठा तक की पूरी दूरी पर 150 से अधिक अत्याधुनिक कैमरे तैनात किए हैं। इन कैमरों के जरिए श्रद्धालुओं की पल-पल की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है और इसका मुख्य नियंत्रण कक्ष नेहरू पार्क स्थित ICMR में बनाया गया है।

कैसे काम करता है यह AI सिस्टम

इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल कैमरों की रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं है। इसमें फेस रीडिंग और हेड काउंटिंग की एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। अक्सर भीड़ वाले आयोजनों में एक ही व्यक्ति की कई बार गिनती होने से गलत आंकड़े सामने आते हैं, लेकिन यह AI सिस्टम इस त्रुटि को खत्म करने में सक्षम है। सिस्टम को इस प्रकार विकसित किया गया है कि यह एक ही श्रद्धालु की दोबारा गिनती को पहचानने और उसे हटाने में पूरी तरह कारगर है। इस कारण से अब बाबा नगरी में उमड़ने वाली भीड़ का डेटा केवल अनुमानों पर नहीं, बल्कि सटीक डिजिटल रिपोर्ट पर आधारित होता है।

प्रशासन की चुनौती और तकनीक का समाधान

देवघर प्रखंड के सीआई विजय मरांडी ने इस नई तकनीक की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्रावणी मेला के दौरान कांवरियों की भारी तादाद को नियंत्रित करना हमेशा से प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है। कांवरिया कई सौ किलोमीटर पैदल चलकर दुम्मा बॉर्डर से होते हुए बाबाधाम पहुंचते हैं। चूंकि कांवरिया मेला क्षेत्र में स्थित कई अलग-अलग चेकपॉइंट्स से गुजरते हैं, इसलिए पहले उनकी गिनती अलग-अलग स्थानों पर होती थी, जिससे आंकड़ों में उछाल आने का डर रहता था। अब इस AI आधारित डिजिटल हेड काउंटिंग सिस्टम के आने से यह दुविधा दूर हो गई है। यह प्रणाली श्रद्धालुओं के मूवमेंट को रिकॉर्ड करती है और उसे डिजिटल तरीके से प्रोसेस करके सटीक आंकड़ा जिला प्रशासन तक पहुंचाती है।

भीड़ प्रबंधन में तकनीक का बड़ा लाभ

इस अत्याधुनिक व्यवस्था का सीधा लाभ जिला प्रशासन को मिल रहा है। सटीक आंकड़ों की मदद से अब अधिकारी बेहतर निर्णय ले पा रहे हैं। तकनीक यह बताने में सक्षम है कि किस विशेष क्षेत्र में भीड़ का दबाव बढ़ रहा है और किस रास्ते पर श्रद्धालुओं की अधिक आवाजाही है। इससे भीड़ को नियंत्रित करना और उन्हें व्यवस्थित करना आसान हो गया है। सावन की सोमवारी जैसे महत्वपूर्ण दिनों में, जब लाखों भक्त एक साथ बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए उमड़ते हैं, तब यह सिस्टम सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए एक ढाल की तरह काम करता है। प्रशासन अब इन आंकड़ों के आधार पर ही सुरक्षा बलों की तैनाती और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को तय करता है।

अब तक 15 लाख से अधिक कांवरियों ने किए दर्शन

प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए हालिया आंकड़ों के अनुसार, श्रावणी मेला की शुरुआत से लेकर अब तक श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड टूटा है। बुधवार तक के आंकड़ों पर गौर करें तो 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालु तो पहले ही जलार्पण कर चुके थे, और अब यह संख्या 15 लाख के आंकड़े को भी पार कर गई है। मंदिर की आय के संदर्भ में भी यह मेला काफी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार तक मंदिर की कुल आमदनी 80 लाख रुपये से अधिक दर्ज की जा चुकी है, जो आने वाले दिनों में करोड़ों तक पहुंचने की संभावना है। आने वाली सोमवारी और अन्य महत्वपूर्ण तिथियों पर यह आंकड़ा और भी बढ़ने की उम्मीद है, जिसे ट्रैक करने के लिए प्रशासन पूरी तरह से इस डिजिटल तंत्र पर निर्भर है।

डिजिटल क्रांति का केंद्र बना देवघर

देवघर का श्रावणी मेला इस बार केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार का भी एक बड़ा उदाहरण बन चुका है। दुम्मा से लेकर कुमैठा तक फैली इस सुरक्षा व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक किस प्रकार से धार्मिक मेलों की व्यवस्था को दुरुस्त कर सकती है। ‘बोल बम’ के जयकारों के बीच गूंजने वाली बाबा की नगरी में अब यह भी दर्ज हो रहा है कि कितने भक्तों ने मंदिर में प्रवेश किया और कितनों ने जलाभिषेक पूर्ण किया। आने वाले समय में, जैसे-जैसे कांवरियों की संख्या में वृद्धि होगी, यह AI आधारित सिस्टम भीड़ के प्रबंधन में अपनी सार्थकता को और अधिक सिद्ध करेगा। प्रशासन को उम्मीद है कि तकनीक के इस समागम से श्रद्धालुओं का अनुभव और अधिक सुरक्षित एवं सुगम होगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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