दिल्ली
एक घंटा पहले
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दिल्ली विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल की हत्या की गुत्थी सुलझाते हुए दिल्ली पुलिस ने पश्चिम बंगाल के एक दंपती को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि करोड़ों रुपये मूल्य की पैतृक संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद ने इस वारदात की पटकथा लिखी। पुलिस के अनुसार आरोपी करीब 1,400 किलोमीटर का सफर तय कर दिल्ली पहुंचे और हत्या को अंजाम दिया। पकड़े जाने से बचने और पहचान छिपाने के लिए दोनों ने जो तरकीबें अपनाईं, अंततः वही उनके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बन गईं।
49 वर्षीय देबोस्मिता पॉल दिल्ली विश्वविद्यालय के शिवाजी कॉलेज में अंग्रेजी पढ़ाती थीं। उनका शव 4 जून को पूर्वी दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित सत्यम अपार्टमेंट में उनके फ्लैट से बरामद हुआ था। मामले की पड़ताल के बाद पुलिस ने पश्चिम बंगाल के बर्दवान निवासी रामप्रसाद दास (42) और उनकी पत्नी बनश्री दास (36) को हिरासत में लिया। आरोपी दंपती के नाबालिग बेटे को भी किशोर न्याय कानून के तहत हिरासत में रखा गया है।
संपत्ति विवाद बना हत्या की वजह
पुलिस जांच के मुताबिक आरोपी दंपती वर्ष 2023 से बर्दवान के उस मकान में रह रहा था, जो पारिवारिक बंटवारे के बाद देबोस्मिता पॉल के हिस्से में आया था। यह संपत्ति प्रोफेसर को उनके नाना की मृत्यु के बाद मिली थी। पुलिस का कहना है कि देबोस्मिता लगातार आरोपियों से मकान खाली करने की मांग कर रही थीं और हाल ही में उन्होंने आखिरी चेतावनी भी दे दी थी। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया।
लिफ्ट छोड़कर सीढ़ियों से पहुंचे छठी मंजिल
जांच अधिकारियों के अनुसार, संपत्ति पर अपना कब्जा बनाए रखने के इरादे से दंपती ने हत्या की साजिश रची। 3 जून को वे अपने बेटे के साथ बर्दवान से दिल्ली पहुंचे। पुलिस का मानना है कि संदेह से बचने के लिए ही नाबालिग बेटे को साथ लाया गया था। दिल्ली पहुंचने पर उन्होंने एक गेस्ट हाउस में डेरा डाला और अपनी पहचान छिपाने के लिए दूसरे लोगों के आधार कार्ड का विवरण इस्तेमाल किया।
सीसीटीवी फुटेज में 4 जून को दो नकाबपोश लोग वसुंधरा एन्क्लेव के आवासीय परिसर में घुसते दिखे। दोनों एक निजी कैब से वहां पहुंचे थे और बैग लेकर लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों के रास्ते छठी मंजिल पर बने प्रोफेसर के फ्लैट तक गए। पुलिस के मुताबिक पहले से परिचित होने के कारण आरोपी बिना किसी शक के फ्लैट के भीतर दाखिल होने में कामयाब रहे।
कपड़े बदलने की चाल पड़ी भारी
पुलिस का आरोप है कि फ्लैट के अंदर आरोपियों ने अपने साथ लाए हथियार से देबोस्मिता पॉल पर हमला किया। इस हमले में उनके सिर पर गंभीर चोट आई और हाथ की नसें भी काट दी गईं। वारदात के करीब आधे घंटे बाद दोनों कपड़े बदलकर दोबारा परिसर में दिखाई दिए और उसी कैब से वहां से फरार हो गए।
मामला तब सामने आया, जब अगले दिन प्रोफेसर की बहन देवरती उनसे संपर्क नहीं कर पाईं। बार-बार फोन करने पर भी जवाब न मिलने पर वे फ्लैट पहुंचीं। बाहर से ताला बंद देख उन्होंने दरवाजा खुलवाया और अंदर जाकर बहन का शव पाया। मौके पर पुलिस को लूटपाट का कोई निशान नहीं मिला। घर में रखे गहने, नकदी और दूसरा कीमती सामान सुरक्षित था, जिसके चलते जांच का रुख निजी और संपत्ति संबंधी विवाद की ओर मुड़ गया।
200 लोगों की गतिविधियों की हुई पड़ताल
दिल्ली पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए व्यापक अभियान चलाया। अपार्टमेंट और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। जांचकर्ताओं ने उस दिन सोसायटी में दाखिल हुए करीब 200 लोगों की गतिविधियों की समीक्षा की और 13 संदिग्धों को चिन्हित किया। सात पुलिस टीमों ने चार राज्यों में छापेमारी कर संदिग्धों की यात्रा और हरकतों का पता लगाया।
जांच में सबसे बड़ा सुराग उस कैब चालक से मिला, जिसने आरोपियों को घटनास्थल तक पहुंचाया था। सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों के कपड़े बदलने और पहचान छिपाने की कोशिश भी पकड़ में आ गई। इसके बाद दिल्ली पुलिस की टीम 6 जून को बर्दवान पहुंची और रेलवे स्टेशन से मिले सुरागों के आधार पर आरोपियों के ठिकाने तक जा पहुंची। 7 जून को दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
ट्रांजिट रिमांड पर लाए जा रहे दिल्ली
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मृतका का मोबाइल फोन, कपड़े, यात्रा से जुड़े दस्तावेज और हत्या में इस्तेमाल होने के संदेह वाला एक रेजर बरामद किया है। दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया जा रहा है, जहां उनसे आगे की पूछताछ होगी। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच में जुटी है।
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