दिल्ली की सड़कों की बदलेगी तस्वीर, सरकार ने 657.99 करोड़ रुपये की योजना को दी मंजूरी दिल्ली 2 महीने पहले 89
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली की सड़कों के कायाकल्प के लिए एक बड़ी योजना को हरी झंडी दी गई है। इसके तहत 270 किलोमीटर से अधिक सड़कों को आधुनिक मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

दिल्ली की सड़कों का होगा कायाकल्प

राजधानी दिल्ली के निवासियों के लिए एक बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई में व्यय वित्त समिति यानी EFC ने दिल्ली की सड़कों को नई मजबूती देने के लिए 657.99 करोड़ रुपये की विशाल परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली के कुल 270.63 किलोमीटर लंबे प्रमुख मार्गों को आधुनिक और सुरक्षित बनाना है।

किस क्षेत्र में कितना खर्च होगा?

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस बजट का बंटवारा अलग-अलग जोन में इस प्रकार किया गया है:

  • पूर्वी मेंटेनेंस जोन: 58.292 किलोमीटर सड़क के लिए 147.08 करोड़ रुपये।
  • उत्तरी मेंटेनेंस जोन: 104.42 किलोमीटर सड़क के लिए 247.31 करोड़ रुपये।
  • दक्षिणी मेंटेनेंस जोन: 107.92 किलोमीटर सड़क के लिए 263.61 करोड़ रुपये।

अत्याधुनिक तकनीक और पारदर्शी व्यवस्था

सड़क निर्माण में पहली बार जोनवार कॉम्पोजिट टेंडर प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। इसमें कोल्ड मिलिंग, डेंस बिटुमिनस मैकाडम और बिटुमिनस कंक्रीट जैसी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल होगा ताकि सड़कें टिकाऊ बनी रहें। इसके अलावा, सड़क सुरक्षा के लिहाज से रोड मार्किंग, साइन बोर्ड, रिफ्लेक्टर और कर्ब चैनल लगाने का काम भी किया जाएगा।

गुणवत्ता की होगी कड़ी निगरानी

सरकार ने कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए कई कड़े नियम तय किए हैं:

  • निर्माण कार्य के दौरान पांच वर्ष की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि रखी गई है।
  • सड़क खराब होने या गड्ढे होने की स्थिति में उसे 48 घंटे के भीतर ठीक करना अनिवार्य होगा।
  • काम की मॉनिटरिंग के लिए जियो-टैग्ड फोटोग्राफ पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।
  • CSIR-CRRI और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर जैसी संस्थाएं कार्यों का स्वतंत्र ऑडिट करेंगी।

पूरे प्रोजेक्ट को अक्टूबर माह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि दिल्लीवासियों को बेहतर और सुगम यातायात की सुविधा मिल सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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